एआई क्या इंसान को 'शैतान' की पूजा के लिए उकसा रही है? एक विवादित मान्यता की पड़ताल

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
    • Author, लिबो डेसिको
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

'एआई आख़िरी ज़माने में अहम भूमिका निभाएगी.'

ये बात किसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी के एक्सपर्ट ने नहीं कही है. ये अमेरिका के शहर अटलांटा के प्रभावशाली पादरी फ़िलिप एंथनी मिचेल के शब्द हैं.

उनके लिए 'आख़िरी ज़माने' का मतलब दुनिया का अंत है. मिचेल की इस भविष्यवाणी को एक साल से ज़्यादा समय हो चुका है.

अब कई दूसरी मशहूर मसीही शख़्सियतें भी टिकटॉक, पॉडकास्ट और किताबों समेत कई प्लेटफ़ॉर्म पर यह सवाल उठा रही हैं कि क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस दुनिया की तबाही का कारण बन सकती है.

मेगा चर्च के पादरी ग्रेग लॉरी सवाल करते हैं, "क्या एआई दुनिया के अंत की वजह हो सकता है?" फिर वह ख़ुद ही जवाब देते हैं. "यह पूरी तरह मुमकिन है."

पादरी माइक साइनोरेली ने एक पॉडकास्ट में कहा, "यह इस बात का एक अहम हिस्सा है कि दज्जाल, जिसे शैतान का नुमाइंदा माना जाता है, कैसे सामने आएगा."

ये पादरी मानते हैं कि एआई का इस्तेमाल अच्छे मक़सदों के लिए भी किया जा सकता है. लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि दज्जाल, इसका इस्तेमाल लोगों को ख़ुदा की बजाय अपनी इबादत के लिए तैयार करने में कर सकता है.

Antichrist
इमेज कैप्शन, तस्वीर में शैतान को अपने मोहरे दज्जाल का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है, दज्जाल लोगों को धोखा देता है और अनजाने में उन्हें ईसा के बजाय दज्जाल की पूजा करने के लिए प्रेरित करता है

ईसाई धर्म में "एंड टाइम्स" शब्द दुनिया के आख़िरी दिनों से जुड़ी भविष्यवाणियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

ईसाई और इस्लाम धर्म में एंटीक्राइस्ट को ईश्वर का दुश्मन माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आख़िर में यीशु उसे एक बड़ी लड़ाई में हरा देंगे.

ये धारणाएं काफ़ी हद तक बाइबल की आख़िरी किताब 'रिवेलेशन' पर आधारित हैं. इस किताब में डरावने और प्रतीकात्मक दृश्यों का वर्णन है.

इनमें "समुद्र से निकलने वाले एक जानवर" का भी ज़िक्र है, जिसके सात सिर और दस सींग हैं. कुछ ईसाई इसे एंटीक्राइस्ट का संकेत मानते हैं.

कई ईसाई मानते हैं कि रिवेलेशन की ये भविष्यवाणियां प्रतीकात्मक हैं.

कुछ लोगों के अनुसार, इनका संबंध रोमन साम्राज्य की ओर से शुरुआती ईसाई चर्च पर किए गए उत्पीड़न से है.

हालांकि, कुछ लोग इसे भविष्य की वास्तविक भविष्यवाणी भी मानते हैं.

कुछ लोगों का तर्क है कि एआई उस किताब में बताए गए "दूसरे जानवरों" का रूप ले सकती है. उनका मानना है कि इससे इंसान एंटीक्राइस्ट की पूजा करने लग सकते हैं.

वहीं, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि एआई ख़ुद ही एंटीक्राइस्ट हो सकती है.

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आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी एआई बेशक दुनिया को तेज़ी से बदल रही है. इसकी ताक़त और क्षमताओं को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं.

एन्थ्रोपिक के पूर्व शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने यहां तक कहा है कि "हो सकता है हम सब निकट भविष्य में मर जाएं".

वहीं, बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर एआई के विकास की रफ़्तार कम नहीं की गई, तो इसके गंभीर ख़तरे सामने आ सकते हैं.

सेंट जॉन्स स्कूल ऑफ़ थियोलॉजी एंड सेमिनरी से जुड़ी प्रोफ़ेसर नोरीन हर्ज़फ़ेल्ड एआई और टेक्नोलॉजी की नैतिकता पर शोध करती हैं.

उनका कहना है कि "बड़े बदलाव के दौर में दुनिया के ख़त्म होने से जुड़ी बहस भी तेज़ हो जाती है."

उनके अनुसार, "ऐसी धारणाएं लोगों को समाज में पैदा हो रहे दबाव को समझने का एक तरीका देती हैं. इससे उन्हें लगता है कि जो कुछ हो रहा है वह सिर्फ़ संयोग नहीं, बल्कि ईश्वर की योजना का हिस्सा है."

हर्ज़फ़ेल्ड का कहना है कि "नौकरियों पर एआई के संभावित असर की तुलना औद्योगिक क्रांति से की जा सकती है. उस दौर में भी लोगों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल पैदा हुआ था."

वे कहती हैं, "हम तेज़ी से बदलती दुनिया में रह रहे हैं. कंप्यूटर टेक्नोलॉजी जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है, पहले कभी इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ी."

"हमें बताया जा रहा है कि यह टेक्नोलॉजी लोगों की नौकरियां ले लेगी. यह सब कुछ बदल देगी और हर क्षेत्र में क्रांति ला देगी. लोगों के लिए इतनी तेज़ी से हो रहे बदलाव को स्वीकार करना बहुत मुश्किल होता है."

इसके साथ यह एहसास भी बढ़ रहा है कि शायद इंसान का अपने फ़ैसलों और हालात पर पहले जैसा नियंत्रण नहीं रहा. एआई, चाहे हम चाहें या नहीं, हमारी ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों का हिस्सा बन चुकी है.

दूसरी ओर, सिलिकॉन वैली से ऐसी चेतावनियां भी आ रही हैं जिनमें कहा जाता है कि एआई के कारण इंसानियत के पूरी तरह ख़त्म हो जाने की आशंका 10 या 15 फ़ीसदी तक हो सकती है.

हर्ज़फ़ेल्ड के अनुसार, अगर लोगों को यह भरोसा हो कि "अब भी ईश्वर ही सब कुछ नियंत्रित कर रहा है और इसके पीछे कोई उद्देश्य है. यह सब एक योजना के तहत हो रहा है," तो वे इस स्थिति को अलग नज़रिए से देख सकते हैं.

फिर वे ख़ुद से यह सवाल कर सकते हैं कि "मैं इस समय का सामना कैसे करना चाहता हूं? मुझे क्या करना चाहिए? और बुराई के बजाय भलाई का साथ देने के लिए मैं ख़ुद को किस तरह तैयार करूं?".

पादरी माइक सिग्नोरेली भी उन 47 फ़ीसदी वयस्क अमेरिकी ईसाइयों में शामिल हैं जो एक सर्वे के हिसाब से ऐसा मानते हैं कि हम दुनिया के ख़त्म होने से पहले के "आख़िरी ज़माने" में रह रहे हैं
इमेज कैप्शन, पादरी माइक सिग्नोरेली भी उन 47 फ़ीसदी वयस्क अमेरिकी ईसाइयों में शामिल हैं जो एक सर्वे के हिसाब से ऐसा मानते हैं कि हम दुनिया के ख़त्म होने से पहले के "आख़िरी ज़माने" में रह रहे हैं

साल 2022 में प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे के अनुसार, लगभग 40 फ़ीसदी वयस्क अमेरिकी मानते हैं कि वे दुनिया के "आख़िरी ज़माने" में रह रहे हैं.

ईसाइयों के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 47 फ़ीसदी हो जाता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विचार हर कुछ दशकों बाद फिर सामने आता है. ऐसा तब होता है जब लोग अपने समय के डर और बेचैनी को दज्जाल की धारणा से जोड़ने लगते हैं.

नॉर्थ कैरोलाइना की एलोन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जेफ़्री सी. पग कहते हैं, "मेरी दादी मानती थीं कि फ़्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट ही दज्जाल हैं."

अमेरिकी राष्ट्रपति रूज़वेल्ट ने गंभीर आर्थिक संकट और ग़रीबी के दौर में सत्ता संभाली थी. उनकी "न्यू डील" नाम की आर्थिक योजना को उस समय एक क्रांतिकारी क़दम माना गया था.

पग के अनुसार, उनकी दादी का यह विचार इस बात का उदाहरण है कि मौजूदा घटनाओं को बाइबल की किसी ख़ास भविष्यवाणी से जोड़ने की कोशिश कभी-कभी कितनी ग़ैर-तर्कसंगत हो सकती है.

हालांकि अमेरिका में दुनिया के ख़त्म होने से जुड़ी बातें समय-समय पर सामने आती रही हैं. लेकिन 1960 के दशक में इस विचार को ख़ास तौर पर ताक़त मिली.

पग कहते हैं, "वह सामाजिक उथल-पुथल का एक असाधारण दौर था. हमारे दो राजनीतिक नेताओं की हत्या कर दी गई थी. अगर मार्टिन लूथर किंग जूनियर को भी इसमें शामिल करें, तो यह संख्या तीन हो जाती है."

"श्वेत लोगों के अत्याचार और दमन के ख़िलाफ़ अश्वेत अमेरिकियों में ग़ुस्सा बढ़ रहा था. इसकी वजह से कई शहर जल रहे थे."

"बच्चे और युवा भी ऐसे तरीक़े से अपनी आवाज़ उठाने लगे थे, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था. चाहे वे युद्ध-विरोधी प्रदर्शन हों या युवाओं की वैकल्पिक संस्कृति."

'ख़ौफ़नाक टेक्नोलॉजी'

सांकेतिक तस्वीर

1970 के दशक में "द लेट ग्रेट प्लैनेट अर्थ" नाम की एक किताब काफ़ी लोकप्रिय हुई थी.

इस किताब में दुनिया के ख़त्म होने से जुड़ी बाइबल की भविष्यवाणियों को उस समय के हालात और वैश्विक राजनीति से सीधे जोड़ा गया था.

प्रोफ़ेसर पग कहते हैं, "इसके बाद से हर बड़ी सामाजिक उथल-पुथल को दुनिया के ख़त्म होने की इसी धारणा से जोड़ा जाने लगा."

शीत युद्ध के दौर में सोवियत संघ और साम्यवाद को दज्जाल से जोड़ा गया. वहीं, 11 सितंबर के हमलों के बाद कुछ ईसाइयों ने इस्लाम को दज्जाल से जोड़ना शुरू कर दिया.

डॉ. पग कहते हैं, "हर दौर के डर आख़िरकार दुनिया के ख़त्म होने से जुड़ी इन्हीं धारणाओं के रूप में सामने आने लगते हैं."

ऑस्ट्रेलिया के पादरी स्टीफ़न ड्रिस्कॉल, जो "मेड इन आवर इमेज: गॉड, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एंड यू" नाम की किताब के लेखक हैं.

वे कहते हैं कि उन्हें यक़ीन के साथ नहीं पता कि दज्जाल कौन है या क्या है.

उनके अनुसार, एआई "इंसान की बनाई सबसे ख़ौफ़नाक टेक्नोलॉजी में से एक" है. इसलिए यह दज्जाल के लिए एक "समझ में आने वाला संभावित उम्मीदवार" हो सकती है. लेकिन बाइबल की मदद से भविष्य की भविष्यवाणी करने की कोशिश ज़्यादा उपयोगी नहीं है.

ड्रिस्कॉल कहते हैं, "बाइबल हमें सिर्फ़ यह अनुमान लगाने के लिए नहीं है कि दज्जाल कौन है. बल्कि यह इससे कहीं ज़्यादा मार्गदर्शन देती है."

उनके अनुसार, यह हमें बदलाव के लिए तैयार करती है. यह कामकाज के बारे में धार्मिक नज़रिया देती है. साथ ही एआई को इंसानों के लिए सुरक्षित और फ़ायदेमंद बनाने के तरीक़ों को यथार्थवादी ढंग से समझने में मदद करती है.

'ईश्वर की आज्ञा का पालन करें'

पुराने नियम में कृषि टेक्नोलॉजी में हुए नवाचारों का ज़िक्र मिलता है. इनमें अनाज की मड़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां और दूसरे उपकरण शामिल हैं.

इसमें कहा गया है कि यह सब ईश्वर की ओर से है.

स्टीफ़न ड्रिस्कॉल के अनुसार, "ईश्वर टेक्नोलॉजी का ज्ञान रखने वाला ईश्वर है." पत्थर, कांस्य, लोहे और इस्पात के युग से लेकर परमाणु टेक्नोलॉजी और एआई तक, हर दौर की टेक्नोलॉजी पर आख़िरकार उसी का नियंत्रण है.

ड्रिस्कॉल कहते हैं, "पुराने नियम में निर्वासित दानियेल अलग-अलग साम्राज्यों के दौर में जीवन बिताते हैं. उन दौरों में विभिन्न तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता था."

वे कहते हैं, "दानियेल अपने समय के हालात को नियंत्रित नहीं कर सकते थे. न ही वे आने वाले साम्राज्यों को रोक सकते थे, चाहे वे अपने साथ विनाश ही क्यों न लाएं."

"लेकिन वे जहां भी हों, वफ़ादार और आशावान रह सकते हैं. वे अच्छी ज़िंदगी जी सकते हैं, लोगों से प्रेम कर सकते हैं और ईश्वर की आज्ञा का पालन कर सकते हैं."

"वे समय को अपने नियंत्रण में नहीं रख सकते. लेकिन अच्छी ज़िंदगी ज़रूर जी सकते हैं."

इसलिए चाहे हम सचमुच दुनिया के ख़त्म होने की ओर बढ़ रहे हों या नहीं. आख़िरकार हालात बेहतर दिशा में जा सकते हैं.

ड्रिस्कॉल कहते हैं, "जो कुछ होता है, वह सब अच्छा नहीं होता." लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि "ईश्वर अच्छा है और सब कुछ उसी के नियंत्रण में है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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