रूस में इंटरनेट पर सरकार की मज़बूत होती पकड़ से बढ़ती नाराज़गी

इंटरनेट एक्सेस करने की कोशिश करतीं क्रेमलिन के क़रीब खड़ी महिलाएं (सांकेतिक तस्वीर)

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इमेज कैप्शन, इंटरनेट एक्सेस करने की कोशिश करतीं क्रेमलिन के क़रीब खड़ी लड़कियां, यह तस्वीर 31 मार्च की है (सांकेतिक तस्वीर)
    • Author, स्टीव रोज़नबर्ग
    • पदनाम, रशिया एडिटर
  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

क्रेमलिन के पास रूसी राष्ट्रपति के प्रशासकीय कार्यालय के बाहर दर्जनों लोग लाइन में लगे हुए हैं.

वे राष्ट्रपति पुतिन से इंटरनेट पर कार्रवाई ख़त्म करने की अपील करने वाली याचिका देने आए हैं.

रूसी अधिकारी देश के साइबर स्पेस पर नियंत्रण बढ़ा रहे हैं. देश में ग्लोबल मैसेजिंग ऐप्स का एक्सेस रोक दिया गया है या इसमें बड़े पैमाने पर रुकावटें आ रही हैं. यहां तक कि मोबाइल इंटरनेट भी बड़े पैमाने पर बाधित हो रहा है या बंद भी किया गया है.

रूस में आम नागरिक राष्ट्रपति को अपनी याचिकाएं दे सकते हैं. लेकिन ऐसा करना सिस्टम को चुनौती देने जैसी बात है और लोगों को यह महसूस भी कराया जा रहा है.

सड़क के उस पार से सिक्योरिटी ऑफ़िसर याचिकाकर्ताओं और हमारी वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं.

मैंने लाइन में खड़ी यूलिया से पूछा, "क्या आपको डर नहीं लग रहा?"

उनका जवाब था, "बहुत डर लग रहा है. मैं कांप रही हूं."

पुतिन ने इंटरनेट में आ रही बाधाओं को स्वीकार किया है और इसे 'आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए किए जा रहे काम' से जुड़ा बताया है.

हालांकि उनका कहना है कि अधिकारियों को ज़रूरी इंटरनेट सेवा 'बिना किसी बाधा के चलने' देने के निर्देश दिए गए हैं.

पाबंदियों से व्यापार पर असर

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यूलिया एक केटरिंग कंपनी चलाती हैं. वह बताती हैं कि इंटरनेट सेंसरशिप ने उनके बिज़नेस को कैसे प्रभावित किया है.

वह कहती हैं, "हाल ही में कई बार ऐसा हुआ जब हमारी वेबसाइट खुल ही नहीं रही थी. हम कोई कमाई नहीं कर पा रहे थे. जब भी इंटरनेट बंद होता है, या मैसेजिंग ऐप्स टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ब्लॉक होते हैं, तो हमें हर बार नुक़सान होता है. हमारा पूरा बिज़नेस इंटरनेट पर ही चलता है. ऐसी हालत में इंटरनेट के बिना मेरा बिज़नेस चल ही नहीं पाएगा."

रूसी अधिकारियों का कहना है कि कम्युनिकेशन पर लगाई गईं पाबंदियां लोगों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं. उनका दावा है कि मोबाइल इंटरनेट बंद करने से यूक्रेन के हमलावर ड्रोन भटक जाते हैं, हालांकि ऐसे हमले उन इलाक़ों में भी जारी रहे हैं जहां इंटरनेट बंद कर दिया गया था.

सरकारी अधिकारी दुनिया भर के मैसेजिंग ऐप्स पर रूस के डेटा क़ानूनों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाते हैं. रूस में व्हाट्सऐप और टेलीग्राम की एक्सेस पर बहुत ज़्यादा पाबंदियां लगा दी गई हैं.

इस बीच, सरकारी नियामक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) को निशाना बना रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पाबंदियों से बचने के लिए किया जाता है.

'स्वायत्त इंटरनेट' (सॉवरेन इंटरनेट) को बढ़ावा देने की मुहिम के तहत सरकार मैक्स (MAX) नाम के एक सरकारी रूसी मैसेजिंग ऐप को प्रमोट कर रही है. लेकिन लोग इसे लेकर आशंकित हैं.

पुतिन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की कोशिश करने वाले पूर्व रूसी सांसद बोरिस नादेज़दिन कहते हैं, "बहुत से लोगों को लगता है कि यह मैसेंजर ख़ास तौर पर सरकार ने हमारे मैसेज चेक करने के लिए बनाया है."

सिर्फ़ इतना नहीं, रूस के कई हिस्सों में अब मोबाइल फ़ोन पर सिर्फ़ वही वेबसाइटें और सर्विस खुलती हैं, जिन्हें सरकार ने मंज़ूरी दी है.

ऐसा लगता है जैसे कोई डिजिटल 'लोहे का पर्दा' बनाया जा रहा हो.

'हर कोई प्रभावित हुआ है'

क्रेमलिन के पास कतार में मौजूद लोग
इमेज कैप्शन, रूस में क़ानूनी तौर पर राष्ट्रपति के पास याचिका डाली जा सकती है, लेकिन इस तरह सरकारी फ़ैसले के ख़िलाफ़ सिर उठाने में जोखिम भी है

विपक्षी मीडिया आउटलेट 'नोवाया गज़ेटा' के स्तंभकार आंद्रेई कोलेसनीकोव कहते हैं, "इसका मक़सद रूस को बाहरी दुनिया से अलग करना है."

ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि "यह दुनिया रूसियों के दिमाग़ के लिए ज़हरीली है."

उनका कहना है, "रूस हमेशा से ही बाहरी दुनिया से कटा रहा है. शुरुआत में रूस पश्चिम से कटा हुआ था. पश्चिम को 'बुरे, क्रांतिकारी और उदारवादी विचारों' का स्रोत माना जाता था. यह हमेशा से ऐसा ही रहा है."

फिर भी, रूसियों ने डिजिटल युग और इंटरनेट को इतनी शिद्दत से अपनाया कि साइबर पाबंदियां और रुकावटें उनके लिए एक बड़े झटके की तरह हैं.

एक्टिविस्ट यूलिया ग्रेकोवा बताती हैं, "यह अभिव्यक्ति की आज़ादी से ज़्यादा, हमारी आदतों से जुड़ा मामला है. लोगों को अपने मोबाइल फ़ोन से चीज़ों के लिए पेमेंट करने और टैक्सी बुक करने की आदत पड़ गई है."

"वे बस में बैठे-बैठे अपने दोस्तों को मैसेज करते रहते हैं. ऐसे बहुत कम लोग हैं जो काम-काज, सरकारी सेवाओं और अपने परिवार से जुड़े रहने के लिए मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते. इसीलिए लोगों में इतना ग़ुस्सा है, क्योंकि हर कोई इससे प्रभावित हुआ है."

मैं मॉस्को से क़रीब 190 किलोमीटर दूर व्लादिमीर शहर में यूलिया ग्रेकोवा से बात कर रहा हूं. उन्होंने हाल ही में यहां इंटरनेट पाबंदियों के ख़िलाफ़ एक रैली निकालने की कोशिश की थी.

वह कहती हैं, "हमने स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया और जगह के लिए कई विकल्प सुझाए. उन्होंने जवाब दिया कि यह मुमकिन नहीं है, क्योंकि जिस तारीख़ को हमने अनुरोध किया था, उस दिन हमारी सुझाई गई सभी 11 जगहों पर सड़कों की सफ़ाई करने की योजना थी."

"सिटी हॉल ने एक दूसरी जगह और समय का प्रस्ताव दिया. लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि यह भी मुमकिन नहीं है, क्योंकि (यूक्रेनी) ड्रोन हमले का ख़तरा है."

यूलिया ग्रेकोवा ने इंटरनेट प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया
इमेज कैप्शन, यूलिया ग्रेकोवा ने इंटरनेट प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया

फिर यूलिया के पास पुलिस आई और उन्हें विरोध प्रदर्शन न करने की चेतावनी दी.

वह बताती हैं, "वे उस जगह आए जहां मैं काम करती हूं. एक पुलिस की गाड़ी और तीन लोग. उन्होंने मुझे प्रॉसिक्यूटर की तरफ़ से मिली आधिकारिक चेतावनी पर दस्तख़त करते हुए फ़िल्माया. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं."

रूस के दर्जनों क़स्बों और शहरों में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के लिए इसी तरह के अनुरोध ठुकरा दिए गए. मॉस्को में स्थानीय अधिकारियों ने कोरोना वायरस से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया.

रूसी शहर पेन्ज़ा के अधिकारियों ने दावा किया कि जिस जगह के लिए अनुरोध किया गया था, वहां रोलर-स्केटिंग की एक मास्टरक्लास होने की वजह से रैली नहीं हो सकती.

व्लादिमीर शहर के बीचों-बीच मैंने अपना फ़ोन देखा. यहां टैक्सी बुकिंग ऐप काम कर रहा है और मैं सरकारी मीडिया देख पा रहा हूँ. लेकिन गूगल सर्च काम नहीं कर रहा और स्वतंत्र समाचार साइटें खुल नहीं रही हैं.

अपने बच्चे के साथ टहलने निकलीं मारिया कहती हैं, "बातचीत करना बहुत मुश्किल हो गया है. हम ताज़ा ख़बरों और ट्रेंड्स से जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन इसके बजाय, हम पीछे छूटते जा रहे हैं."

लेकिन जैसे-जैसे हमारी बातचीत आगे बढ़ती है, मारिया की दिलचस्पी ताज़ा जानकारी में कम होती जाती है.

वह कहती हैं, "पहले जब इंटरनेट नहीं था, तो दुनिया ज़्यादा अच्छी लगती थी, क्योंकि हमें चीज़ों के बारे में कम पता होता था."

"जहाँ तक रूस के यूक्रेन पर हमले की बात है तो मैं इस तरह की ख़बरों से दूर रहने की कोशिश करती हूँ. मैं अपना दिमाग़ इन चीज़ों से भरना नहीं चाहती. हम लोगों के मारे जाने की ख़बरें सुन-सुनकर थक चुके हैं."

'MAX' ऐप के कुछ स्क्रीनशॉट्स (सांकेतिक तस्वीर)

इमेज स्रोत, MAX

इमेज कैप्शन, सरकार रूसियों को 'MAX' नामक एक सरकारी मंज़ूरी वाली मैसेजिंग सेवा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन कई लोगों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जाएगा (सांकेतिक तस्वीर)

डेनिस कहते हैं, "इंटरनेट पाबंदियों से रोज़ाना दिक्कतें होती हैं. आज मैं पेट्रोल के पैसे नहीं दे पाया. और मेरा सैटेलाइट नेविगेशन भी ठीक से काम नहीं कर रहा है."

अलेक्ज़ेंडर का कहना है, "लोग परेशान हैं. ख़ासकर वे लोग जिनके छोटे-मोटे कारोबार हैं. जब वे इंटरनेट इस्तेमाल नहीं कर पाते, तो उनके ग्राहक छिन जाते हैं."

यूलिया ग्रेकोवा कहती हैं, "ऐसा लगता है जैसे हम विपरीत दिशा में जा रहे हैं... अतीत की ओर खिसकते जा रहे हैं."

क्या रूस की इंटरनेट पर सख़्ती अतीत की ओर ले जा रही है?

मॉस्को में पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मुझे भरोसा दिलाते हुए कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है."

पेस्कोव आगे कहते हैं, "मौजूदा हालात में, सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं की वजह से कुछ क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है. ये क़दम उठाए जा रहे हैं और हमारे ज़्यादातर नागरिक इनकी ज़रूरत को समझते हैं."

"यह साफ़ है कि इंटरनेट पर पाबंदियों से कई लोगों को परेशानी हो रही है. लेकिन हम अभी ऐसे ही दौर से गुज़र रहे हैं. जैसे ही इन क़दमों की ज़रूरत ख़त्म हो जाएगी, सभी सेवाएं पूरी तरह से बहाल हो जाएंगी और सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो जाएगा."

लेकिन पाबंदियां और दमन अब 'न्यू नॉर्मल' जैसे लगने लगे हैं.

पत्रकार आंद्रेई कोलेसनीकोव ने अपनी बात ख़त्म करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह सरकार पीछे हटने के लिए तैयार है. वे सिर्फ़ और ज़्यादा दमन की दिशा में ही आगे बढ़ सकते हैं."

"अधिकारियों के लिए बुरी बात यह है कि लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, और भविष्य में यह किसी भी रूप में सामने आ सकता है. हमें नहीं पता कि इसका रूप क्या होगा. लेकिन यह साफ़ है कि लोगों में ग़ुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है."

और अब यह खुलकर सामने आने लगा है.

व्लादिमीर में एक युवक अपने फ़ोन का इस्तेमाल करते हुए
इमेज कैप्शन, बीबीसी की टीम ने पाया कि रूस के व्लादिमीर शहर में इंटरनेट एक्सेस काफ़ी सीमित था (सांकेतिक तस्वीर)

हाल ही में, रूस की मशहूर ब्लॉगर विक्टोरिया बोन्या ने इंस्टाग्राम पर 'रूस के राष्ट्रपति के नाम एक संदेश' पोस्ट किया. उन्होंने इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदियों और रूस में चल रहे दूसरे विवादों की कड़ी आलोचना की.

यह वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ और इसे करोड़ों लोगों ने देखा. अपने इस संदेश में विक्टोरिया बोन्या ने सीधे तौर पर पुतिन पर कोई आरोप नहीं लगाया.

लेकिन उन्हें संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "आपके और हमारे, यानी आम लोगों के बीच एक बहुत बड़ी दीवार खड़ी हो गई है."

गुरुवार को पुतिन ने कहा कि इंटरनेट में आ रही दिक्कतों की वजह से रूस के लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उन पर 'ध्यान देना' उनके लिए ज़रूरी है.

उन्होंने क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे 'समझदारी भरा और पेशेवर रवैया अपनाएं और नागरिकों के ज़रूरी हितों का ध्यान रखें'.

पुतिन के इस बयान में कोई 'यू-टर्न' नहीं था. इससे पाबंदियों को ख़त्म करने का कोई संकेत भी नहीं मिला.

रूस में हाल ही में हुए सर्वे बताते हैं कि 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से, पुतिन की लोकप्रियता (रेटिंग) अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

लोगों में बेचैनी की वजह सिर्फ़ इंटरनेट पर लगी पाबंदियां ही नहीं हैं. रूस के लोग देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंतित हैं, और यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध को लेकर भी लोगों में अब थकान और ऊब बढ़ती जा रही है.

बोरिस नादेज़दिन ने मुझसे कहा, "लोगों को यह समझ आने लगा है कि उनकी रोज़मर्रा की समस्याओं- जैसे स्वास्थ्य सेवा, खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें और इंटरनेट से जुड़ी दिक्कतों- और व्लादिमीर पुतिन की राजनीति के बीच सीधा संबंध है."

"और रूस में यह एक नई स्थिति है."

यूलिया बताती हैं कि इंटरनेट को सेंसर किए जाने ने उनके बिज़नेस को काफ़ी प्रभावित किया है
इमेज कैप्शन, यूलिया बताती हैं कि इंटरनेट को सेंसर किए जाने ने उनके बिज़नेस को काफ़ी प्रभावित किया है

राष्ट्रपति के दफ़्तर में अपनी याचिका जमा कराने के बाद यूलिया फिर से अपने काम पर लौट आई हैं. वह अपनी कैटरिंग कंपनी में दोबारा काम करने लगी हैं.

उन्होंने अपना पक्ष तो साफ़ रख दिया है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा नहीं है कि इससे कुछ बदलेगा. वह पहले से ही यह सोचने लगी हैं कि इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदियों के साथ ख़ुद को कैसे ढालना होगा. यूलिया कहती हैं कि रूसियों को बड़े बदलावों के साथ तालमेल बिठाने का अच्छा-खासा अनुभव है.

"मेरे परदादा औसत से ज़्यादा अमीर थे. सोवियत दौर के एक गांव में इसे गुनाह माना जाता था. उनकी सारी जायदाद छीन ली गई और उन्हें साइबेरिया भेज दिया गया. लेकिन उनका परिवार फिर भी हालात के साथ ढल गया."

"मेरे माता-पिता ने सोवियत संघ के टूटने का दौर देखा. उन्होंने बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था में ख़ुद को ढाल लिया. अब मेरी बारी है ढलने की और फिर एक दिन मेरी बेटी की बारी आएगी."

तो यूलिया रूस के हालात को आगे कैसे बढ़ते हुए देखती है?

वह कहती हैं, "दोस्तों और रिश्तेदारों से रोज़मर्रा की बातचीत में भविष्य की कोई बात ही नहीं होती. बस यही होता है- तीन दिन बाद हम क्या करेंगे, एक हफ्ते में क्या, या एक महीने में क्या?"

"एक महीने से आगे का कोई विचार नहीं है."

जैसे ओवन में रखी रोटी फूलती जा रही है, वैसे ही पूरे रूस में अनिश्चितता की एक गहरी भावना फैलती जा रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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