ट्रंप ने दिए ईरान से दोबारा बातचीत के संकेत, कहा- 'मेरे प्रतिनिधि पाकिस्तान जा रहे हैं'

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, "मेरे प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जा रहे हैं. वे कल शाम बातचीत के लिए वहां पहुंच जाएंगे."
ट्रंप ने कहा, "हम एक बहुत ही सही और वाजिब डील का प्रस्ताव दे रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे, क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अमेरिका, ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को तबाह कर देगा."
हालांकि, ईरान की आईआरजीसी से जुड़ी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, जब तक अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक ईरान बातचीत के लिए अपने दल को पाकिस्तान नहीं भेजेगा.
न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, "तस्नीम के एक संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार, बातचीत के पहले दौर की समाप्ति के बाद हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच एक पाकिस्तानी मध्यस्थ के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहा है."
"ईरानी दल ने इस बात पर जोर दिया है कि जब तक ट्रंप की ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा जारी रहेगी, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी."
ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता के समय और स्थान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
बीबीसी की फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने है कि ईरान और अमेरिका दोनों बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके.
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अब बातचीत नाकाम रहती है, तो "अब और कोई नरमी नहीं बरती जाएगी."
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पुल और पावर प्लांट "बहुत तेज़ी से और आसानी से गिरा दिए जाएंगे."
बीबीसी की फ़ारसी सेवा के मुताबिक़ ईरान के साथ इस बातचीत में अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस अपने देश के दल का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे.

अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर "युद्धविराम समझौते का उल्लंघन" करने का आरोप भी लगाया है. इसकी वजह ईरान की ओर से शनिवार को होर्मुज़ स्ट्रेट पर गोलियां चलाना है.
ट्रंप ने कहा, "यह अच्छा नहीं था, है ना?, ईरान का कहना था कि गोलियां एक फ़्रांस के जहाज और ब्रिटेन के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाकर चलाई गईं."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट को बंद करने के ईरान के फैसले को "अजीब" बताया है. ट्रंप का कहना है कि ये इसलिए अजीब है क्योंकि अमेरिकी नाकाबंदी ने "होर्मुज़ स्ट्रेट पहले ही बंद कर रखा है."
ट्रंप ने कहा, "वे अनजाने में हमारी मदद कर रहे हैं. इस मार्ग के बंद होने से उन्हीं को नुकसान हो रहा है. हर दिन 50 करोड़ डॉलर! अमेरिका को इससे कोई नुकसान नहीं होता."
वहीं ईरान ने अमेरिका पर यह आरोप लगाया है कि उसने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाकर संघर्ष-विराम की शर्तों का उल्लंघन किया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी की आलोचना करते हुए इसे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा है कि यह "गैर-क़ानूनी और आपराधिक" है.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, बक़ाई ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के एक अनुच्छेद और संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव का हवाला दिया है.
इसके बारे में उनका कहना है कि वे किसी देश के बंदरगाहों और तटरेखा की नाकेबंदी करने पर रोक लगाते हैं.
बक़ाई ने अमेरिका पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि " अमेरिका ईरानी आबादी को जान-बूझकर सामूहिक दंड दे रहा है. उन्होंने इसे "मानवता के खिलाफ अपराध" बताया है.
पाकिस्तान में बातचीत की तैयारियों के संकेत

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बीबीसी की पाकिस्तान संवाददाता कैरी डेविस ने इस्लामाबाद से बताया है कि सोशल मीडिया पर ट्रंप के इस एलान के साथ ही पाकिस्तान में बातचीत की तैयारियां शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं. यहां सुरक्षा व्यवस्था में सख़्ती देखी जा रही है.
पिछले सप्ताहंत जिस होटल में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत हुई थी, वहां ठहरे मेहमानों से कहा गया कि वे होटल खाली कर दें.
तीन विश्वविद्यालयों ने अपनी क्लासेज ऑनलाइन कर दी हैं.
इस्लामाबाद पुलिस ने घोषणा की है कि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के आने के कारण शहर से जुड़ने वाली प्रमुख सड़कों को बंद किया जा सकता है. साथ ही भारी ट्रैफिक़ के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है.
शहर की सीमाओं पर पहले से ही ट्रैफि़क जाम लगना शुरू हो गया है.
कुल मिलाकर, शहर किसी बड़े घटनाक्रम के लिए तैयारी कर रहा है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ रविवार को इस्लामाबाद के विशाल पांच सितारा मैरियट होटल के मैनेजमेंट ने अपने मेहमानों को रविवार दोपहर तीन बजे तक होटल खाली करने का निर्देश दिया था.
इसके अलावा रावलपिंडी और इस्लामाबाद के उपायुक्तों ने रविवार से अगले आदेश तक सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई पर रोक लगा दी थी.
न्यूक्लियर एनरिचमेंट बातचीत में बड़ी अड़चन

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बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक़ ईरान का न्यूक्लियर एनरिचमेंट का मुद्दा बातचीत में एक बड़ी अड़चन बना हुआ है.
फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक, "ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाएं. उसकी अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुज़र रही है. अब तो हालात और भी बदतर हो गए हैं, क्योंकि वह खाड़ी क्षेत्र में स्थित अपने बंदरगाहों से अपना निर्यात बाहर नहीं भेज पा रहा है."
"समय भी ईरान के पक्ष में नहीं है."
उन्होंने कहा, "अमेरिका और ईरान दो मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं: पहला न्यूक्लियर एनरिचमेंट. दूसरा वो अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम, जो अभी भी इस्फ़हान के पहाड़ों के नीचे बनी सुरंगों में मौजूद है, ठीक उसी जगह, जहां पिछले साल अमेरिका ने बमबारी की थी."
फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक़, "इसे बाहर निकालने की कोशिश में एक विशेष अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन भेजने के बारे में बहुत सी मनगढ़ंत बातें की गई हैं. लेकिन इसके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है. ईरान उस जगह को अपनी सेना से घेर लेगा."
"आप उसकी अनुमति के बिना ऐसा नहीं कर सकते. बमबारी से तबाह हुई सुरंगों के अंदर उतरना एक बहुत ही नाज़ुक ऑपरेशन होगा."
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ऐसा करने के लिए तैयार है. लेकिन गोलीबारी के बीच नहीं. यह अमेरिका के साथ एक संयुक्त मिशन हो सकता है, लेकिन तभी जब ईरान इसके लिए राज़ी हो.
पहली बातचीत रही थी नाकाम

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ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत नाकाम रही थी.
अमेरिका की ओर से बातचीत का नेतृत्व करने वाले उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा थी बातचीत सफल नहीं रही. उन्होंने कहा था अमेरिका ने ईरान को अपना फ़ाइनल ऑफर दे दिया है और इसके बाद वो स्वदेश लौट गए थे.
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी.
जेडी वेंस ने कहा था कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच फ़ासला कम करने और समझौता कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन "बुरी ख़बर यह है कि हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके."
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह ख़बर अमेरिका के लिए उतनी बुरी नहीं है जितनी ईरान के लिए है, "कोई समझौता नहीं हुआ है और हम अमेरिका वापस लौट रहे हैं."
पाकिस्तान के कहने पर अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष विराम पर राज़ी हुए थे और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे.
अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की नाकामी के लिए अलग-अलग वजहें बता रहे थे.
अमेरिका और ईरान की नाकाबंदी में अंतर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को 'बंद करने की कोशिश' को "अजीब" बताया और कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी ने "पहले ही इसे बंद कर दिया है."
हालांकि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने सीधे तौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के गुजरने पर साफ़ रोक नहीं लगाई है.
आइए दोनों पक्षों के रुख़ को सरल तरीके से समझते हैं.
ईरान का रुख़
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सरकारी टीवी पर कहा कि तेहरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों की निगरानी और नियंत्रण करेगा.
यह तब तक जारी रहेगा जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती.
ईरान के मुताबिक़
- हर जहाज़ से पूरी जानकारी ली जाएगी
- ट्रांजिट सर्टिफ़िकट जारी किया जाएगा
- "सुरक्षा, सेफ्टी और पर्यावरण संरक्षण" के नाम पर टोल लिया जाएगा
अमेरिका का रुख़
जब ट्रंप ने नाकाबंदी की घोषणा की, तो उन्होंने कहा था कि यह होर्मुज़ में आने-जाने वाले "हर जहाज़" पर लागू होगी.
उन्होंने नौसेना को यह भी निर्देश दिया कि जो जहाज़ ईरान को टोल देकर गुजरने की कोशिश करें, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोका जाए.
लेकिन बाद में अमेरिकी सेना ने इसे अलग तरह से स्पष्ट किया. सेंटकॉम के मुताबिक़
- नाकेबंदी का मुख्य लक्ष्य ईरान के बंदरगाह हैं.
- अन्य देशों के बंदरगाहों के लिए जाने वाले जहाज़ों को रोका नहीं जाएगा.
- होमुर्ज़ में जहाज़ों की आवाजाही (नेविगेशन की आज़ादी) बाधित नहीं की जाएगी
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित



































