ममता बनर्जी क्या पश्चिम बंगाल में टीएमसी को बचा पाएंगी? ग्राउंड रिपोर्ट
साल 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 34 साल पुराने लेफ़्ट शासन को ख़त्म कर सत्ता हासिल की और अगले 15 सालों तक राज्य की सबसे म़जबूत राजनीतिक ताक़त के रूप में उभरीं.
लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार ने सब कुछ बदलकर रख दिया.
कभी 200 से ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी अब 80 सीटों पर सिमट गई, जिसके बाद अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा.
पार्टी के कई सांसदों और विधायकों ने बग़ावत कर नई राह चुन ली, जिससे तृणमूल के भीतर गुटबाज़ी और नेतृत्व को लेकर सवाल तेज़ हो गए.
एक तरफ़ ममता बनर्जी और उनके समर्थक इन नेताओं को 'गद्दार' बता रहे हैं, तो दूसरी ओर बाग़ी नेता पार्टी की दिशा और कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं.
तो क्या वाक़ई तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व ख़तरे में है? या ममता बनर्जी पार्टी को फिर से एकजुट कर उसे नई ताक़त दे पाएंगी?
तृणमूल कांग्रेस में चल रहे संकट से जुड़े इन्हीं सब सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव ने.
देखिए उनकी ये ख़ास ग्राउंड रिपोर्ट.
कैमरा और एडिटिंग: रुबाइयत बिस्वास
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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