नेपाल: बाढ़ को लेकर इतनी अलग-अलग ख़बरें क्यों आ रही हैं और सच क्या है?

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- Author, विनीता दाहाल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ नेपाली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने रासुवा के भोटेकोशी इलाके में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और हज़ारों लोग अब भी लापता हैं.
नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और लगभग 2,500 लोग लापता हैं. वहीं, लगभग 4,500 लोगों को बचाया गया है.
राहत और बचाव अभियान के बीच अब सवाल उठ रहा है कि क्या ख़तरा पूरी तरह टल गया है?
मौसम विभाग ने फ़िलहाल भारी बारिश की संभावना से इनकार किया है, लेकिन ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बनी दो अस्थिर झीलों ने एक और बाढ़ की आशंका को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है.
दोबारा बाढ़ आने की कितनी संभावना है?

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हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि भले ही कुछ बारिश हुई है, लेकिन बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की कोई संभावना नहीं है.
सीनियर मौसम विज्ञानी विभूति पोखरेल का कहना है, "ऐसा लगता है कि सिर्फ़ हल्की बारिश होगी और भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है."
हालांकि, विभाग के सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट बिनोद पराजुली ने कहा कि बाढ़ का खतरा बना हुआ है क्योंकि बुधवार को जहां हिमस्खलन हुआ था, उस जगह के नीचे दो झीलें बन गई हैं.
पराजुली ने कहा, "पहाड़ों के बीच, हिमस्खलन वाली जगह के ठीक नीचे और भूस्खलन वाली जगह के ऊपर एक झील बनी हुई दिखाई दे रही है. इसी तरह, भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता रुक जाने से एक और झील बन गई है."
"ये दोनों झीलें बेहद अस्थिर हैं, क्योंकि जिस इलाके में ये बनी हैं, वहां भूस्खलन का ख़तरा भी है. जैसे-जैसे इनमें पानी भरता जाएगा, इनके फटने का ख़तरा बना रहेगा."
उन्होंने कहा कि लगभग 4,000 और 3,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित झीलें शायद न भी फटें, लेकिन निचले किनारों पर बसी बस्तियों को लगातार ख़तरे के बारे में आगाह किया गया है.

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हाइड्रोलॉजिस्ट पराजुली ने कहा कि हालांकि शुरुआत में ऐसा अनुमान था कि हिमस्खलन तिब्बत की ओर हुआ है, लेकिन जांच के दौरान विभाग को यह स्पष्ट हो गया कि हिमस्खलन असल में नेपाल की ओर हुआ था.
उन्होंने कहा, "सैटेलाइट तस्वीरों को देखने से ऐसा नहीं लगता कि बाढ़ तिब्बत की तरफ से आई है. ऐसा लगता है कि बाढ़ नेपाल और चीन की सीमा के पास से आई है."
"हिमस्खलन नेपाल के लांगटांग लिरुंग हिमाल के पश्चिमी हिस्से से आया हुआ लगता है. इसलिए हिमस्खलन वाली जगह नेपाल के इलाके में है, जबकि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वह नेपाल और तिब्बत, दोनों की सीमा में आता है."
बाढ़ को लेकर शुरुआती कयास

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अधिकारियों का कहना है कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में हालात को समझना मुश्किल होता है, इस वजह से शुरुआती दिनों में इसे लेकर कई तरह के अनुमान लगाए गए और गलत जानकारी भी फैली.
उन्होंने बताया कि शुरुआत में बाढ़ की वजह को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं. इसकी वजह सैटेलाइट तस्वीरों से मिली अधूरी जानकारी और हेलीकॉप्टरों के उस इलाके तक नहीं पहुंच पाने जैसी मुश्किलें थीं.
रासुवा के भोटेकोशी में अचानक आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ. शुरुआत में जब सरकार की एजेंसियों और जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के पास भी बाढ़ की सही वजह की जानकारी नहीं थी, तो भूकंप और ग्लेशियर फटने जैसी कई आशंकाएं जताई गईं.
हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग ने बताया था कि बाढ़ के ठीक अगले दिन भोटेकोशी में हिमस्खलन हुआ, जिससे भारी बाढ़ आ गई.
हालांकि, अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि इस इलाके में भूकंपीय गतिविधि के संकेत भी मिले थे.
बाढ़ के बारे में अलग-अलग रिपोर्ट क्यों थीं?

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कहा है कि ऊंचे हिमालयी इलाके में हुई इस घटना की वजह पता लगाना मुश्किल है, इसलिए इसे लेकर कई तरह के अनुमान लगाए गए.
अथॉरिटी के प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने कहा, "ऊंचे हिमालयी इलाके में असल में क्या हुआ, हमें इसकी जानकारी नहीं थी. इसलिए लोग अपने-अपने अनुमान लगा रहे थे. कुछ लोगों ने कहा कि यह हिमस्खलन था, जबकि कुछ ने इसे ग्लेशियर झील के फटने की घटना बताया. इस तरह की स्थिति इसलिए बनी क्योंकि हमारे पास वैज्ञानिक जानकारी की कमी थी."
"इसलिए हमें इस पूरे मामले की जटिलता को समझते हुए पहले से चेतावनी देने वाला सिस्टम तैयार करना होगा. इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश की ज़रूरत होगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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