सीरिया की गद्दी के कई दावेदार, असद के बाद किसके पास होगी सत्ता की कमान

सीरिया में जश्न
इमेज कैप्शन, बशर अल-असद के रूस चले जाने के बाद सीरिया के कई शहरों में लोगों ने ख़ुशी ज़ाहिर की है.
    • Author, लीज़ डुसेट
    • पदनाम, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

'इस्लामी चरमपंथियों के आने से वे चिंतित हैं.'

एक सूत्र ने शनिवार शाम दोहा में जमा हुए अरब देशों के विदेश मंत्रियों की मनोदशा के बारे में यह बात कही थी. ये मंत्री इस बात पर चर्चा करने आए थे कि सीरिया कहीं अराजकता और खूनख़राबे के दौर में दाख़िल न हो जाए.

इसके कुछ घंटों में ही सत्ता पर कब्ज़ा करने के अभियान की अगुवाई करने वाले ताक़तवर इस्लामी ग्रुप ने एलान कर दिया था कि विद्रोहियों ने सीरियाई राजधानी पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है.

हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) नेता अबू मोहम्मद अल जुलानी ने 'दमिश्क पर कब्ज़े' का विजयी एलान किया.

बीबीसी हिंदी का व्हाट्सऐप चैनल
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

अब वो अपने उपनाम की बजाय असली नाम अहमद अल-शारा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जोकि राष्ट्रीय फलक पर बड़ी भूमिका के रूप में उनके उभार का एक संकेत है.

एचटीएस अकेला दावेदार नहीं

सीरिया
इमेज कैप्शन, रविवार को असद सरकार के गिरने के बद दमिश्क में जश्न का सिलसिला शुरू हो गया.

सीरिया पर आधी सदी तक चले असद परिवार के दमनकारी शासन के अचानक अंत होने के बाद, अब ये निश्चित हो गया है कि एचटीएस प्रमुख जुलानी सीरिया की नई परिस्थिति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंधित किए गए इस संगठन के नेता, सीरिया के तेज़ी से बदलते हालात में अकेले खिलाड़ी नहीं हैं.

यूरोपीय इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस में काम करने वाली वरिष्ठ सीरियाई सलाहकार मैरी फ़ोरेस्टियर थोड़ी सतर्कता बरतते हुए कहती हैं, "पटकथा अभी पूरी नहीं हुई है."

वार्षिक दोहा फ़ोरम में हिस्सा लेने वाली मैरी और सीरिया पर नज़र रखने वाले अन्य पर्यवेक्षकों का कहना है कि एक और विद्रोही ग्रुप था जो राजधानी में घुसा था और शहर के लोगों के साथ उसका अच्छा तालमेल था.

हाल ही में इस ग्रुप को सदर्न ऑपरेशंस रूम का नाम दिया गया था.

इस ग्रुप में अधिकांश लड़ाके फ़्री सीरियन आर्मी (एफ़एसए) के पूर्व सदस्य हैं, जिन्होंने सीरिया के 2011 के आंदोलन के दौरान पश्चिमी देशों के साथ मिलकर काम किया था.

फ़ोरेस्टियर कहती हैं, "खेल अभी शुरू हुआ है."

उनकी यह बात उस माहौल की तस्दीक है जिसमें बड़ी तेज़ी से घटे घटनाक्रम के बाद सड़कों पर जश्न देखने को मिला था, लेकिन आगे क्या होगा इसे लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हुए.

इस्लामी चरमपंथी गुट हयात तहरीर अल-शाम हैरानी भरी रफ़्तार से आगे बढ़ा और उसे कुछ ख़ास प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा. इससे सीरिया के अन्य क्षेत्रों के बाकी विद्रोही ग्रुपों और हथियारबंद स्थानीय ग्रुपों की संख्या भी बढ़ी जो अपने अपने इलाक़ों में सत्ता साझा करने की उम्मीद लगाए हुए हैं.

विद्रोहियों में एकजुटता की चुनौती

सीरिया
इमेज कैप्शन, एचटीएस की तरह कुछ विद्रोही गुटों का देश के अलग-अलग हिस्सों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओटावा में मध्य पूर्व के एक्सपर्ट थॉमस जूनोव भी दोहा की बैठक में मौजूद थे.

जूनोव कहते हैं, "असद सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई वह गोंद थी, जिसने इस स्वाभाविक गठबंधन को एकजुट किए रखा था. अब असद देश से जा चुके हैं और अब ग्रुपों के बीच उस एकता को बनाए रखने की चुनौती है, जिसकी वजह से असद सरकार सत्ता से बेदख़ल हुई."

इन ग्रुपों में तुर्की समर्थित मिलिशिया ग्रुपों का गठबंधन भी है, जिसे सीरियन नेशनल आर्मी के नाम से जाना जाता है.

इनका एचटीएस की तरह ही उत्तरपश्चिम सीरिया के एक हिस्से पर कब्ज़ा है.

देश के पूर्वोत्तर हिस्से में कुर्दिश सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्स (एसडीएफ़) का दबदबा है. इस ग्रुप ने हाल के दिनों में और बढ़त हासिल की है.

अबू मोहम्मद जुलानी को लेकर सतर्क प्रतिक्रिया

अबू मोहम्मद जुलानी
इमेज कैप्शन, अबू मोहम्मद जुलानी हयात तहरीर अल-शाम के नेता हैं.
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

लेकिन इन सबके बीच एचटीएस के महात्वाकांक्षी हाई प्रोफ़ाइल नेता ने सुर्खियां अधिक बटोरी हैं. उनकी बयानबाज़ी और इतिहास पर अब सीरियाई लोगों, पड़ोसी राजधानियों और अन्य लोगों की नज़र है.

जिस मिलिशिया के वो कमांडर हैं, वह पहली बार अलक़ायदा के सहयोगी के रूप में सामने आया.

लेकिन 2016 में उन्होंने अलक़ायदा का साथ छोड़ दिया और उसके बाद से ही एचटीएस कमांडर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.

सालों से उन्होंने विदेशों में समझौते वाले संदेश भेजे हैं. अब वह सीरिया के कई अल्पसंख्यक समुदायों को ये भरोसा दे रहे हैं कि उन्हें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

फ़ोरेस्टियर कहती हैं, "उनके इस संदेश का सावधानी बरतते हुए स्वागत हो रहा है. लेकिन उनके आठ साल के निरंकुश शासन और उनकी पृष्ठभूमि को हम नहीं भूल सकते."

एचटीएस ने सीरिया के उत्तर में इदलिब में अपना शासन स्थापित किया ता और उसे नाम दिया साल्वेशन गवर्नमेंट. इस शासन के तहत धर्म की सीमित आज़ादी थी और इस दौरान दमनकारी तरीक़े भी अपनाए गए.

अलेप्पो सीरिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां एचटीएस ने अपने औचक आक्रमण में बहुत तेज़ी से कब्ज़ा किया था. वहां एचटीएस के लड़ाके यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे शासन करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं.

यह ग्रुप इराक़ जैसे देशों को सीमा पार भरोसा देने वाला संदेश भेज रहा है कि यह जंग उनकी सीमा तक नहीं फैलेगी.

सीरिया
इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति असद के जाने की दमिश्क में खुशी तो है लेकिन भविष्य को लेकर चिंताएं भी हैं.

जॉर्डन समेत अन्य पड़ोसी देश इस बात से चिंतित हैं कि पड़ोस में इस्लामी चरमपंथियों की सफलता, उनके देश में मौजूद असंतुष्ट चरमपंथी ग्रुपों को उकसा सकती है.

तुर्की का सीरिया में मुख्य भूमिका निभाना निश्चित हैं लेकिन वह भी चिंतित है. वह एसडीएफ़ को 'आतंकवादी ग्रुप' मानता है जिसका संबंध तुर्की के प्रंतिबंधित पीकेके कुर्दिश ग्रुप से है.

अगर तुर्की के हितों को ख़तरा होगा तो वह सैन्य और राजनीतिक रूप से दख़ल देने में हिचकेगा नहीं, जैसा वह सालों से करता आया है.

रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने शनिवार को दोहा फ़ोरम को बताया था कि जिस समूह को (एचटीएस) उन्होंने आतंकवादी क़रार दिया है, उसका सीरिया पर नियंत्रण करना 'अस्वीकार्य' है.

लेकिन शाम को सीरिया मामले में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेर पेडर्सन ने मुझे बताया कि फ़ोरम में 'एक बदली वास्तविकता को लेकर नई समझादारी थी.'

इस ताज़ा घटनाक्रम से निराश राष्ट्रपति असद के पूर्व कट्टर सहयोगी ईरान और रूस भी एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने का आह्वान कर रहे हैं.

पेडर्सन की बात से यही लगा.

दोहा की बैठक के बाद उन्होंने कहा, "इस काले अध्याय ने गहरे घाव छोड़े हैं, लेकिन आज हम, सभी सीरियाई लोगों के लिए शांति, सुलह और सम्मान के एक नए अध्याय की उम्मीद करते हैं."

जब वह बोल रहे थे, मीटिंग हॉल, सीरिया से ताज़ा ख़बर की उम्मीद में वरिष्ठ राजनयिकों, विद्वानों और दुनिया भर के अधिकारियों से भरा हुआ था.

सीरिया के भविष्य की तरह की सरकार होगी इस बारे में कोई भी एक्सपर्ट जल्दबाज़ी में कुछ नहीं कहना चाह रहा है.

जब एक पश्चिमी राजनयिक से पूछा गया कि क्या कट्टर इस्लामी चरमपंथियों की प्रमुख भूमिका के संबंध में किसी तरह की चिंता है, उनका जवाब था, "अभी हम उस तरफ़ नहीं सोचना चाहते. हमने एचटीएस से अभी बात करना शुरू किया है, जिसने अभी तक रक्तहीन तख़्तापलट किया है."

जुनोव इस बात से सहमत हैं, "फ़िलहाल, पिछले दशकों में सबसे क्रूर सरकारों में से एक के ऐतिहासिक पतन की बस सराहना करना ही अच्छा है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)