बाब अल-मंदेब के क़रीब एक टापू पर हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा, निशाने पर सऊदी अरब

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ईरान समर्थित हूती ग्रुप के लड़ाकों ने लाल सागर के एक अहम द्वीप पर कब्ज़ा कर लिया है.
बीबीसी न्यूज़ के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित पेरीम द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लिया है. इस द्वीप को मय्युन भी कहा जाता है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी का भी कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों और एक स्थानीय सरकारी अधिकारी के अनुसार, हूतियों ने पेरीम द्वीप पर "कब्ज़ा कर लिया है."
इस अधिकारी ने एएफ़पी को बताया, "सरकारी बलों के कल मय्युन (पेरिम) द्वीप से पीछे हटने के बाद, सशस्त्र हूती लड़ाकों की नावें वहां पहुंच गईं."
पेरिम द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को दो हिस्सों में बाँटता है. यह उस व्यापारिक मार्ग का दक्षिणी प्रवेश द्वार है, जो एशिया और यूरोप को जोड़ता है.
हूतियों ने कहा है कि वे इंटरनेशनल शिपिंग के लिए कोई ख़तरा नहीं हैं, लेकिन उन्होंने सऊदी अरब के जहाज़ों को निशाना बनाने की अपनी धमकी दोहराई है.
हूतियों के एक प्रवक्ता ने कहा है कि वे एक 'बड़े पैमाने के सैन्य अभियान' चलाएंगे.
अमेरिका और इसराइल के युद्ध के कारण होर्मुज़ स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद होने के बाद से सऊदी अरब तेल निर्यात के लिए लाल सागर पर निर्भर रहा है.
इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर माइग्रेशन के अनुसार, पिछले हफ़्ते लड़ाई तेज़ होने के बाद से यमन में कम से कम 46,000 लोग विस्थापित हुए हैं.
सऊदी तेल पाइपलाइन पर धुएं का गुबार

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सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि कल सऊदी अरब की अबक़ैक-यानबू तेल पाइपलाइन के 109 किलोमीटर लंबे हिस्से में कई जगह आग लगी थी. यह पाइपलाइन खाड़ी और लाल सागर को जोड़ती है.
बीबीसी वेरिफ़ाई की ओर से जाँची गई यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की तस्वीरों में मदीना से लगभग 72 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक पंपिंग स्टेशन के आसपास काले धुएँ का बड़ा गुबार उठता दिखाई देता है.
आग का पता लगाने वाले नासा के सॉफ़्टवेयर फ़र्म्स के डेटा में भी गुरुवार शाम पाइपलाइन के आठ जगहों पर गर्मी से जुड़ी असामान्य गतिविधियां दिखाई दीं.
इनमें से एक जगह उसी पंपिंग स्टेशन की है.
सऊदी अरब इस पाइपलाइन का इस्तेमाल होर्मुज़ के रास्ते तेल निर्यात के विकल्प के तौर पर करता है.
फ़रवरी में ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही बुरी तरह बाधित रही है.
सैटेलाइट तस्वीरों से यह बताना संभव नहीं है कि धुएं का गुबार उठने की सटीक वजह क्या थी या कितना नुक़सान हुआ है.
लेकिन सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी पाइपलाइन को नुक़सान पहुंचता है, तो आगे के असर को कम करने के लिए सिक्युरिटी सिस्टम के ज़रिए वाल्व बंद हो जाते हैं.
इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से में पाइपलाइन को दूसरी दिशा में भेजकर फ्लेयर के रूप में जलाया जाता है.
सऊदी तेल निर्यात पर पड़ सकता है असर

अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान लंबे समय तक स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के प्रभावी रूप से बंद रहने के बाद, सऊदी अरब ने अपने तेल निर्यात को लाल सागर तक पहुँचाने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का रुख़ किया था.
इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब इस पाइपलाइन के ज़रिए अपने कच्चे तेल के निर्यात का 70 फ़ीसदी तक हिस्सा खाड़ी से लाल सागर के यानबू बंदरगाह की ओर भेज रहा था.
इस पाइपलाइन के ज़रिए सऊदी अरब लाल सागर के बाब अल-मंदेब से दक्षिण की ओर जाते हुए एशिया तक तेल भेजने में सक्षम रहा है.
अब हूती पेरिम द्वीप तक पहुँच गए हैं, इससे सऊदी तेल निर्यात प्रभावित हो सकता है.
सऊदी अरब से तेल सप्लाई घटेगी
जोनाथन जोसेफ़्स
बीबीसी बिज़नेस रिपोर्टर

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इस हालिया घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और बढ़ने की आशंका है. तेल की क़ीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं.
जुलाई के बाद यह पहली बार है, जब तेल की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई है. इससे पता चलता है कि कारोबारी चिंतित हैं कि सऊदी अरब के तेल की सप्लाई में तेज़ी से गिरावट आई है.
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक सऊदी अरब पर हूतियों के नए सिरे से हमलों के बीच उसकी तेल आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है.
पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब के तेल उत्पादन के अलग-अलग आँकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन दोनों ही आँकड़ों में जुलाई के मुक़ाबले अगस्त में बड़ी गिरावट दिखाई गई है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, यह उत्पादन 8.24 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 5.97 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया.
वहीं, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की ओर से जारी सऊदी सरकार के आँकड़ों के मुताबिक, इसमें 8.14 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 6.24 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट आई है.
आँकड़ा चाहे जो भी हो, यह कमी काफ़ी बड़ी है और इसका मतलब है कि पिछले साल इसी समय के मुक़ाबले तेल का उत्पादन काफ़ी कम हो गया है.
इस बीच, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते होने वाली सप्लाई भी कम बनी हुई है.
ऊर्जा की इन बढ़ी हुई क़ीमतों से दुनिया भर में महँगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव पड़ रहा है. गुरुवार को यूरोप के केंद्रीय बैंक ने कल यही किया है.
अगले हफ़्ते अमेरिका और जापान के भी ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ रही है. आशंका है कि इससे आर्थिक विकास की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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