गज़ा पर ज़मीनी हमले की तैयारी, इसराइल की रणनीति और चुनौती

ग़ज़ा सीमा पर तैनात इसराइल के टैंक
    • Author, जोनाथन बेल
    • पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता
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इसराइल की सेना ने बताया है कि उसने ग़ज़ा में ‘ग्राउंड रेड’ किए हैं और अग़वा किए गए कई लोगों के शवों को बरामद किया है.

इसराइल ने ग़ज़ा पर हमले के लिए पूरी तैयारी भी कर ली है. इसी बीच 11 लाख फ़लस्तीनी लोगों से 24 घंटों के भीतर उत्तरी इलाक़े को छोड़कर दक्षिणी ग़ज़ा की तरफ़ जाने के लिए कहा गया है.

इसराइल की सेना ने कहा है कि शनिवार सुबह दस बजे से चार बजे के बीच सड़क मार्गों पर हमले नहीं किए जाएंगे.

ग़ज़ा बॉर्डर के पास इसराइल ने लाखों सैनिक, तोपखाने और टैंक तैनात कर दिए हैं.

लेकिन घनी आबादी वाले ग़ज़ा में ज़मीन पर सेना भेजना इसराइल के लिए एक ख़तरनाक अभियान भी साबित हो सकता है.

इसराइल ज़मीनी हमला कैसे करेगा, ये अभी स्पष्ट नहीं है. अभी ये भी साफ़ नहीं है कि उसकी सेना कितनी भीतर तक घुसेगी और ये अभियान कितना लंबा चलेगा.

हालांकि इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संदेश में कहा है कि 'ये अभियान कुछ दिनों, सप्ताह, या महीनों तक भी चल सकता है, लेकिन इसराइल हमास को नष्ट करने के अपने लक्ष्य को पूरा करके रहेगा.'

ग़ज़ा के भीतर अभियानों का अनुभव रखने वाले इसराइल के पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अमोस गिलाड कहते हैं, "इसराइल के लिए पहला काम ये था कि वो एक यूनिटी सरकार बनाये ताकि आगे वो जो करने जा रहा है उसके लिए देश का समर्थन हासिल हो."

हाल के दिनों में कई शीर्ष अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसराइल का दौरा किया है जिससे इसराइल को अपने सैन्य अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने में मदद मिली है.

हालांकि जब युद्ध आगे बढ़ेगा और अगर हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ेगी तो ये समर्थन डांवाडोल भी हो सकता है. किसी भी सैन्य अभियान में इसराइली सैनिकों का बड़ी संख्या में मारा जाना भी इसराइल की इच्छाशक्ति की परीक्षा होगा.

जहां तक सैन्य अभियान का सवाल है, ग़ज़ा की सीमा पर अब तक तीन लाख से अधिक रिज़र्व सैनिकों को बुलाया गया है. ये इसराइल की नियमित सेना से अतिरिक्त हैं जिसमें एक लाख 60 हज़ार से अधिक सैनिक हैं.

इसराइल के सैनिक

हौसला है बुलंद

हमने इसराइल के कई रिज़र्व सैनिकों से बात की जो हाल ही में ग़ज़ा बॉर्डर पर पहुंचे हैं. इनका कहना है कि उनके हौसले ऊंचे हैं और वो लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

जब इसराइल पर हमास का हमला हुआ, नसीम श्रीलंका में थे, उन्होंने वापसी की टिकट ली और पहली फ्लाइट पकड़कर अपनी यूनिट में शामिल होने पहुंच गए.

वो कहते हैं, “ये हमारी मातृभूमि है और हम इसके लिए ही लड़ते हैं.”

चकी ने तुरंत अपनी सेल्स की नौकरी छोड़ दी. वो बताते हैं. “हम शांति चाहते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश ये संभव नहीं है. अगर हमें शांति से रहना है तो हमें इसके लिए लड़ना ही होगा.”

इसराइल ग़ज़ा पर कार्रवाई के लिए एकजुट दिखाई देता है, समय बीत रहा है और इसराइल के सैनिक आगे बढ़ने के आदेश का इंतेज़ार कर रहे हैं. जितना अधिक सैनिकों को इंतज़ार करना पड़ेगा, उतना ही हौसले और तैयारी बनाये रखना मुश्किल होता जाएगा.

इसराइल ने फ़लस्तीनियों को शनिवार शाम तक उत्तरी इलाक़े खाली करने का आदेश दिया है जिससे संकेत मिल रहे हैं के ये ज़मीनी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकता है.

ग़ज़ा सीमा पर तैयार खड़ी इसराइल की सेना

ज़मीनी हमले की तैयारियां

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इसराइल का पहला मिशन ग़ज़ा के आसपास के इलाक़े को सुरक्षित करना और यहां घुसे हमास के चरमपंथियों का सफाया करना है. हमास के हमलावरों ने बीते शनिवार (सात अक्टूबर ) को हमला किया, जिसमें 1300 से अधिक इसराइली लोगों की मौत हुई है. हमलावरों ने 160 से अधिक लोगों को अग़वा कर लिया था.

इसराइल ने हमास के हमले के बाद ही ग़ज़ा पर भारी हवाई हमले शुरू कर दिए थे. इसराइल का कहना है कि वो हमास के नेताओं और इंफ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है.

पिछले छह दिनों में इसराइल की सेना ने गज़ा पर 6000 से अधिक बम गिराये हैं. इसकी तुलना में, 2011 में लीबिया में समूचे युद्ध के दौरान नेटो सहयोगी देशों ने कुल 7700 बम गिराये थे.

इसराइल के हवाई हमलों में अब तक 2250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

इसराइल अपने ज़मीनी हमले की योजना को गुप्त ही रखेगा लेकिन वो लंबे समय से ऐसे अभियान की तैयारी कर रहा है.

इसराइल ने कई अरब डॉलर ख़र्च करके दक्षिणी क्षेत्र में ‘ग़ज़ा सिमुलेटर’ स्थल बनाया है, जिसे मिनी ग़ज़ा भी कहा जाता है. यहां इसारइली सैनिक ग़ज़ा जैसे हालात में लड़ाई की तैयारियां करते हैं.

सैनिकों को भीड़भाड़ वाली इमारतों, सुरंगों में लड़ने का प्रशिक्षण लेते हैं. अनुमान के मुताबिक़, हमास ने ग़ज़ा में एक हज़ार से अधिक सुरंगे बनाई हैं.

यरूशलम पोस्ट के पूर्व एडिटर और आईडीएफ़ पर कई किताबों के लेखक याकोब कात्ज़ कहते हैं कि इसराइल की सेना को इसी मक़सद के लिए विशेष ब्रिगेडों में अभियान चलाने के लिए तैयार किया गया है. सेना के इंजीनियर और बुलडोजर, ज़मीनी सैनिकों और टैंकों के साथ मिलकर अभियान चलाते हैं.

ग़ज़ा में हमास की सुरंगे का बड़ा जाल है.

शहरी लड़ाई और सुरंगें

आईडीएफ़ के पूर्व कमांडर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल याकोब अमिड्रोर मानते हैं कि हमास से लड़ना मुश्किल होगा.

वो कहते हैं कि हमास ने बूबी ट्रैप लगा दिए होंगे और दाख़िल होने के रास्ते और संकरी गलियों में आईईडी लगा दिए होंगे.

इसराइल का अनुमान है कि हमास के पास 30,000 लड़ाके हैं. उनके पास मशीन गन, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) और एंटी टैंक मिसाइलें हैं. इनमें से कुछ रूस में निर्मित हैं जैसे कॉर्नेट और वागोट रॉकेट.

हमास के पास अभी भी इसराइल पर दागे गए रॉकेट बड़ी तादाद में हैं. उसके पास स्वनिर्मित छोटे ड्रोन हैं, इनमें आत्मघाती ड्रोन भी शामिल हैं.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: ग़ज़ा में अस्पताल में हर तरफ़ लाशें, ज़मीनी हमले की तैयारी में इसराइल

मेजर जनरल आमिड्रोर का अनुमान है कि हमास के पास सीमित संख्या में कंधे पर रखकर दागी जाने वाली कम दूरी की मिसाइलें भी हैं. लेकिन उनके पास इसराइल की तरह टैंक, तोपखाने और बख़्तरबंद गाड़ियां नहीं हैं.

इसराइल की सबसे बड़ी चुनौती घनी आबादी वाली शहरी गलियों में आमने सामने की लड़ाई होगी.

हालांकि इसराइल के पास ऐसी विशेष सैन्य यूनिटें हैं जिन्हें सुरंगों में लड़ने में महारथ हासिल है, जैसे कि इंजीनियरिंग यूनिट येहालोम और ऑकेत्स डॉग यूनिट.

कात्ज़ मानते हैं कि इसराइल के सैनिक तब तक सुरंगों में नहीं घुसेंगे जबतक ऐसा करना उनकी मजबूरी नहीं होगी. इसका एक कारण ये है कि हमास को इन सुरंगों की अधिक जानकारी हैं. कात्ज़ मानते हैं कि सुरंगों में घुसने के बजाये इसराइल की सेना इन्हें रॉकेटों और बमों के ज़रिये बर्बाद करने पर अधिक ध्यान केंद्रित रखेगी.

हमास के लड़ाके

अग़वा किए गए लोगों का क्या होगा?

शनिवार को ही इसराइल की सेना ने बताया है कि उसने ग्राउंड अभियान में अग़वा किए गए कुछ लोगों के शव बरामद किए हैं. हालांकि इनकी तादाद नहीं बताई गई है.

अग़वा किए गए इसराइली लोगों का क्या होगा, ये ज़मीनी अभियान को और भी जटिल बना देता है.

जनरल गिलाड उस वार्ता का हिस्सा रहे थे जिसके बाद अग़वा किए गए इसराइली सैनिक गिलाड शालित को रिहा किया गया था. गिलाड को साल 2006 से 2011 तक हमास ने बंधक बनाये रखा था. उनके बदले एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा किया गया था.

जनरल गिलाड कहते हैं कि सेना को अपने अभियान के दौरान अग़वा किए गए लोगों के अंजाम को भी ध्यान में रखना होगा. वो कहते हैं, “अगर हम कुछ ठोस नहीं करेंगे तो हमें और अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.”

लेकिन जनरल अमिड्रोर का मानना है कि अग़वा लोगों की वजह से अभियान नहीं रुकेगा.

“हम अंत तक हमास के ख़िलाफ़ लड़ेंगे और अभियान के दौरान ही हमें अग़वा किए गए इन लोगों को खोजना होगा.”

ग़ज़ा में पलायन करते स्थानीय लोग

इसराइल का मक़सद क्या है?

30 साल तक आईडीएफ़ में सेवा देने वाले मेजर जनरल गिलाड कहते हैं कि इस अभियान का मक़सद अब तक ग़ज़ा में किए गए सभी अभियानों से बड़ा है. अब तक के अभियान हमास को सीमित करने पर केंद्रित थे, इसका मक़सद हमास को समाप्त करना है.

“इस बार हमें कुछ ऐसा करना होगा जो अधिक नाटकीय हो, निर्णायक सैन्य कार्रवाई हो जो इस क्षेत्र में इसराइल के दुश्मनों को रोके, उदाहरण के लिए हिज़बुल्लाह और ईरान.”

कात्ज़ मानते हैं कि इसराइल का मक़सद हमास को पूरी तरह से ख़त्म करना होगा ताकि वो दोबारा सैन्य ताक़त हासिल कर इसराइल पर हमला न कर सके. ‘हालांकि इसराइल ग़ज़ा पर फिर से क़ब्ज़ा करना नहीं चाहता है क्योंकि वो उन 21 लाख लोगों पर शासन नहीं करना चाहता जो उसे दुश्मन के रूप में देखते हैं.’

लेकिन हालिया इतिहास ये बताया है कि आक्रमण योजना के अनुसार नहीं चलते हैं.

यहां तक कि दुनिया की सबसे उन्नत सेनाएं भी पिछड़ सकती हैं, अमेरिका का इराक़ और अफ़गानिस्तान में जो हुआ वो इसका उदाहरण है. या हाल ही में रूस की सेना का जो यूक्रेन में हुआ.

वीडियो कैप्शन, उस जंग की कहानी जिसमें इसराइल ने छह दिन में युद्ध जीत लिया था

इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रेटिजिक स्टडीज़ से जुड़े जनरल टॉम बेकेट कहते हैं, “हालांकि गज़ा सिर्फ़ 40 किलोमीटर लंबा इलाक़ा है और यहां सैन्य अभियान उतना विस्तृत नहीं होगा. लेकिन इसका नतीजा क्या होगा, ये अनुमान लगाना अभी मुश्किल है.”

जनरल बेकेट कहते हैं, “वास्तव में, इसराइल के पास ग़ज़ा में अभियान का कोई अच्छा विकल्प नहीं है. भले ही हमास के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान कितना ही कामयाब हो, सैन्य रूप से हमास को कितना ही नुक़सान हो, लेकिन उसका राजनीतिक प्रभाव और लोगों का विद्रोहियों के प्रति समर्थन बना रहेगा.”

“या तो इसराइल ग़ज़ा पर क़ब्ज़ा करेगा और इसे अपने नियंत्रण में रखेगा या फिर हमले के बाद पीछे हट जाएगा और इस इलाक़ों को उन्हीं लोगों के पास छोड़ देगा जिनके लिए विद्रोह अस्तित्व का सवाल है.”

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