तेल और एलपीजी से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक, पीएम मोदी के यूएई दौरे पर और क्या हुआ?

यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने शुक्रवार को अबू धाबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है.

मोदी और अल नाहयान की बैठक प्रधानमंत्री के खाड़ी देश पहुंचने के कुछ ही देर बाद हुई.

यह पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा का पहला चरण है. इस यात्रा में चार यूरोपीय देश भी शामिल हैं.

यूएई के राष्ट्रपति के साथ बैठक में शुरुआती टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा, "हम यूएई पर हुए हमलों की निंदा करते हैं."

यूएई में अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है. युद्ध के दौरान ईरान ने कई बार यूएई को निशाना बनाया है.

पीएम मोदी ने आगे कहा, "जिस तरह यूएई को निशाना बनाया गया, उसे मंज़ूर नहीं किया जा सकता. लेकिन जिस संयम के साथ यूएई ने मौजूदा स्थिति को संभाला है, वह सराहनीय है."

रक्षा सहयोग पर समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रवार को अबू धाबी पहुंचने पर 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया.
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बाद में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री ने यूएई पर हुए हमलों की भारत की ओर से कड़ी निंदा दोहराई. साथ ही यूएई के नेतृत्व और वहां के लोगों के प्रति एकजुटता भी जताई. प्रधानमंत्री ने होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही और बिना किसी बाधा के जहाज़ों के आवागमन को सुनिश्चित करने के पक्ष में भारत का स्पष्ट रुख भी रखा. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद अहम है."

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है."

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प्रधानमंत्री का हवाई अड्डे पर अल नाहयान ने स्वागत किया, जो इस यात्रा की अहमियत को दिखाता है. प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.

विशेष सम्मान के तौर पर उनके विमान को यूएई के सैन्य लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया.

सोशल मीडिया पोस्ट में मोदी ने अबू धाबी हवाई अड्डे पर स्वागत करने के लिए यूएई राष्ट्रपति के "सौहार्दपूर्ण व्यवहार" पर उनका आभार जताया.

इस दौरान भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर हुआ समझौता है.

इस समझौते के तहत दोनों देश एडवांस रक्षा तकनीकों के संयुक्त विकास और सह-उत्पादन, ख़ुफ़िया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत करने पर केंद्रित हैं.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "दोनों नेताओं ने भारत और यूएई के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ माना. उन्होंने यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया."

इस समझौते के तहत दोनों पक्ष रक्षा उद्योग सहयोग को और गहरा करने और एडवांस टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा और सुरक्षित संचार बढ़ाने पर सहमत हुए हैं.

मध्य-पूर्व मामलों के जानकार कबीर तनेजा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "हमने देखा है कि कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं. इसमें एलीपी से लेकर पांच अरब डॉलर के निवेश की बात है. और इनमें एक रणनीतिक रक्षा समझौता भी है. मेरे ख़्याल ये समझौता भारत की यूएई के साथ मौजूद रणनीतिक साझेदारी को ही आगे बढ़ाएगा.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा मोटे तौर यूएई को समर्थन देने के लिए है क्योंकि ईरान युद्ध के दौरान यूएई पर सबसे अधिक मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं. साथ ही भारत और यूएई के बीच 100 बिलियन से अधिक ट्रेड होता है और यूएई गल्फ़ में भारत का सबसे बड़ा पार्टनर है.

तेल और गैस से जुड़े समझौते

भारत और यूएई के बीच एलपीजी सप्लाई पर समझौता हुआ है
इमेज कैप्शन, भारत और यूएई के बीच एलपीजी सप्लाई पर समझौता हुआ है

इसके अलावा भारत और यूएई ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते का मकसद कच्चे तेल के अस्थिर बाज़ार और क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं से निपटने के लिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है.

मौजूदा समय में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) भारत के भूमिगत भंडार में तेल रखने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है. इस समझौते से भारत को भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी. साथ ही यूएई को अपने बढ़े हुए कच्चे तेल उत्पादन के लिए भारत जैसा बड़ा बाज़ार मिलेगा.

दोनों पक्षों ने एलपीजी की आपूर्ति पर भी समझौता किया. दुनिया के बाज़ार में एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है. इस समझौते के जरिए इसी प्रभाव को कम करने की कोशिश की गई है. यह समझौता इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल) और एडीएनओसी के बीच हुआ है.

इसके तहत यूएई से प्राथमिकता के आधार पर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित होगी. भारत की घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा यूएई से आता है.

इसके अलावा गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर बनाने के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.

यूएई में भारत के राजदूत, दीपक मित्तल ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सबसे अहम समझौता रणनीतिक तेल भंडार को बढ़ाने को लेकर हुआ है.

उन्होंने कहा, "सबसे अहम पहलू भारत के रणनीतिक तेल भंडार को बढ़ाना है. इसे करीब 5.5 मिलियन बैरल से बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक ले जाने की योजना है. इसके तहत नई जगहों की पहचान की जा रही है, जिनमें ओडिशा का चंडीखोल भी शामिल है."

"दूसरा पहलू यह था कि यूएई के फुजैरा स्थित भंडार में भी भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता विकसित की जाए. तीसरा पहलू केवल कच्चे तेल तक सीमित न रहकर पहली बार गैस यानी एलएनजी और एलपीजी के लिए नए रणनीतिक भंडारण विकसित करना था.

"चौथा पहलू दोनों देशों के बीच एलएनजी की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था पर काम करना था. ये सभी कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने के लिए हैं."

पांच अरब डॉलर का निवेश

भारत और यूएई
इमेज कैप्शन, यूएई की अलग-अलग संस्थाएं भारत में पांच अरब डॉलर तक का निवेश कर सकती है

विदेश मंत्रालय ने बताया है कि दोनों नेताओं ने यूएई की संस्थाओं की ओर से भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश की घोषणा का स्वागत किया.

इसके तहत एमिरेट्स एनबीडी की ओर से भारत के आरबीएल बैंक में तीन अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा. साथ ही अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए) भारत के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट फंड (एनआईआईएफ) के साथ मिलकर भारत की प्राथमिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी.

इसके अलावा इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी भारत की सम्मान कैपिटल में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी.

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "ये निवेश भारत की विकास यात्रा के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं. साथ ही द्विपक्षीय रणनीतिक निवेश साझेदारी को भी मजबूत करते हैं."

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि शुक्रवार की बातचीत मुख्य रूप से "ऊर्जा, व्यापार और निवेश, ब्लू इकोनॉमी, फिनटेक समेत तकनीक, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों" जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही.

बयान में कहा गया, "दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए."

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