क्यों चुप हैं सचिन और द्रविड़ जैसे दिग्गज?

सचिन तेंदुलकर
    • Author, पंकज प्रियदर्शी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

नब्बे के दशक के अंत में मैच फ़िक्सिंग स्कैंडल ने भारतीय क्रिकेट को हिला दिया.

उसके बाद आईपीएल में स्पॉट फ़िक्सिंग से एक बार फिर क्रिकेट की प्रतिष्ठा को धक्का लगा.

लेकिन कभी भी दिग्गज खिलाड़ियों ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा.

क्रिकेट को नुकसान पहुंचाने वाले इस गंभीर मुद्दे पर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ सरीखे बड़े खिलाड़ियों की चुप्पी, क्रिकेट प्रशंसकों के लिए हमेशा बेचैनी भरी रही.

क्रिकेट विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन इस पर क्या कहते हैं.

'ग़लत है ये चुप्पी'

राहुल द्रविड़

"मेरे ख़्याल से भारत में क्रिकेट का स्ट्रक्चर कुछ ऐसा है कि खिलाड़ी, हमेशा बीसीसीआई के अधिकारियों से डरते रहे हैं. बड़े खिलाड़ी भी डरते हैं कि कहीं अधिकारी ख़फ़ा ना हो जाएं.

चेन्नई सुपर किंग्स में गुरुनाथ मयप्पन का नाम सामने आया और धोनी ने इस पर कभी कुछ नहीं कहा. उसी तरह से राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों का नाम फ़िक्सिंग में आया. इसके मालिक राज कुंद्रा पर सवाल उठे. उसके बावजूद टीम के सीनियर खिलाड़ी राहुल द्रविड़ कभी कुछ नहीं बोले.

एन श्रीनिवासन, एम एस धोनी

फ़िक्सिंग के बार-बार सामने आने से क्रिकेट की प्रतिष्ठा को धक्का लगता रहा और ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों का चुप रहना बिलकुल ग़लत था.

जबकि मुझे लगता है कि इन बड़े खिलाड़ियों को खुलकर अपनी बात सामने रखनी चाहिए. उनकी साख इतनी बड़ी है, लोगों में वो इतने लोकप्रिय हैं कि बोर्ड उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता"

कौन हैं वो खिलाड़ी?

एस श्रीसंत

जस्टिस मुद्गल ने सुप्रीम कोर्ट को जो बंद लिफ़ाफ़ा दिया है उसके बारे में कयास हैं कि 13 खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं. फिर उनके नाम अब तक क्यों सार्वजनिक नहीं किए गए?

इस पर प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "मेरे ख़्याल से इन खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ शायद पर्याप्त सबूत ना मिले हों. तो ऐसे में डर हो कि उनके नाम सार्वजनिक करने पर बेवजह उनकी बदनामी होगी. बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के बारे में भी कई बातें हैं कि उसने इस मामले की जांच में सहयोग नहीं दिया. लेकिन हां, उन खिलाड़ियों के नाम के बारे में स्पष्टीकरण ज़रूरी है."

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