मुर्सी के सत्ता में आने पर हमास की उम्मीदे बढ़ी

मोहम्मद मुर्सी
इमेज कैप्शन, हमास को मुस्लिम ब्रदरहुड का हिस्सा माना जाता है
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मिस्र में पिछले महीने हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मुस्लिम ब्रदरहुड को मिली जीत का जश्न मिस्र में ही नहीं बल्कि फलस्तीनी क्षेत्र में भी मनाया गया.

फलस्तीनी क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले इस्लामिक समूह हमास मूल रुप से ब्रदरहुड का ही हिस्सा है. होस्नी मुबारक के शासनकाल के दौरान हमास ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था.

अब बद्ररहुड के सत्ता में आने के बाद हमास की कितनी अपेक्षाएं बढ़ी हैं?

मिस्र में मुस्लिम बद्ररहुड के सत्ता में आने का स्वागत गज़ा के निवासियों ने कार का हॉर्न बजाकर किया. नए राष्ट्रपति के आने पर पटाखे छोड़कर भी खुशियां मनाई गई भले ही वो सीमापार मिस्र के राष्ट्रपति क्यों न हो.

जश्न

हमास मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मुर्सी को अपना मानते हैं जो पिछले महीने राष्ट्रपति चुने गए हैं.

गज़ा के एक बाशिंदे का कहना था, '' हम लोग बहुत खुश है.ये बहुत ही बढ़िया है और लोकतांत्रिक चुनाव हुए हैं.''

गाज़ी अहमद हमास के उपविदेश मंत्री हैं. वो मिस्र के बारे में बातचीत करने को लेकर उत्सुक लगते हैं.

उनका कहना था, '' मिस्र की नई आवाज, नया शासन फलस्तीन का समर्थक होगी, केवल हमास के लिए नही बल्कि पूरे फलस्तीन के लिए.इसराइल अब अकेला पड़ गया है.इससे फलस्तीन ज्यादा मज़बूत होगा.''

मुखमिर अबू सदा, अल अजहर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर हैं.

हिस्सा

उनका कहना है कि हमास इंटरनेश्नल, मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन का हिस्सा है.हमास का गज़ा पट्टी में गठन ही मुस्लिम ब्रदरहुड के हिस्से के तौर पर किया गया था साथ ही हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड एक ही सिद्धांत पर काम करते हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि मिस्र जैसे शक्तिशाली और पड़ोसी मित्र होने के कारण, हमास का आत्मविश्वास बढ़ा है.लेकिन मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि वो मिस्र की इसराइल के साथ चली आ रही शांति संधि को बरकरार रखना चाहता है.

प्रोफेसर अबू सदा का मानना है कि ब्रदरहु़ड, हमास पर दबाव डालेगा ताकि कुछ शांति बनी रहे.

उनका कहना था, ''मिस्र की इसराइल को उकसाने में कोई रुचि नहीं है.मिस्र गरीबी और बेरोज़गारी जैसी अपनी आंतरिक समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है वहीं हमास की भी ऐसी ही दिक्कते है उसकी एक नए युद्ध में प्रवेश करने की बजाय गज़ा पट्टी के पुनर्गठन में रुचि है.''

स्थिति बदलेगी

गज़ा में जहां भी नज़र जाएगी वहां पुर्नर्निमाण के सबूत देखे जा सकते हैं.पिछले साल से जो वहां शांति रही है उसकी वजह से वहां बड़ी इमारतों का निर्माण हो सका है लेकिन जो भी सामग्री इस निर्माण में लगी है - सीमेंट ,बजरी या रोड़ी वो तस्करी के लिए बनी सुरंगों से मिस्र से आ रही है.

होसनी मुबारक ने हमास के सत्ता में आने के बाद इसराइल की अपील पर व्यापार के लिए जो नाकेबंदी लगाई थी उसे अभी तक हटाया नहीं गया है.

रफीक हसोना गज़ा में सबसे बड़ी निर्माण कंपनी चलाते हैं. उन्हें उम्मीद है कि मोहम्मद मुर्सी के शासनकाल में स्थिति में बदलाव आएगा.

वे कहते हैं, '' हमने होसनी मुबारक के शासनकाल के दौरान बहुत दुख झेला है.हम ये उम्मीद करते है मोहम्मद मुर्सी गज़ा को एक पड़ोसी देश की तरह देखेंगे.मिस्र के लीबिया और सूडान के साथ व्यापारिक संबंध है मैं ये प्रार्थना करता हूं कि गज़ा और मिस्र में भी ऐसे ही संबंध हों.''

लेकिन ये माना जाता है कि दोनों के बीच व्यापारिक संबंधों का दरवाज़ा नहीं खुलेगा.हमास और मिस्र नज़दीक तो आना चाहते हैं लेकिन ज्यादा नहीं.