...घर बार छूटने का दर्द

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लंदन में यूरोप के शरणार्थी संकट के बाद विस्थापित हुए लोगों के तस्वीरों की प्रदर्शनी चल रही है. ये तस्वीरें मानवता के बड़े संकट को दिखाती हैं.

शरणार्थी
इमेज कैप्शन, राहत संस्था ऑक्सफ़ैम के लिए आठ फोटोग्राफरों ने 13 देशों में ये तस्वीरें लीं. ये तस्वीरें शरणार्थी संकट से जूझने वाले लोगों, बच्चों और महिलाओं की है. सैम टारलिंग की इस तस्वीर में जॉर्डन में सीरियाई शरणार्थी एक नाटक में हिस्सा ले रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, यह तस्वीर 28 साल की नवल गरब नाम की सीरियाई शरणार्थीं की है. वे लेबनान में एक कमरे के मकान में रह रही हैं. यहां न तो बिजली की सुविधा है और न ही पानी की. ये तस्वीर भी टारलिंग की है. गरब के परिवार को तब सीरिया में अपने घर से भागना पड़ा जब उनके बच्चे बम के फटने से घायल हो गए.
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इमेज कैप्शन, फोटोग्राफर फिल मूरे की ये तस्वीर तंज़ानिया के शरणार्थी कैंप की है. यह दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी कैंपों में से एक है. इस शिविर में 1 लाख 40 हजार लोग रहते हैं.
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इमेज कैप्शन, माओम्बी नाम की ये महिला कांगो में रहती है और कुछ पैसे कमा कर अपने परिवार के लिए भोजन जुटाती हैं. इलियनर फार्मर को वे कांगो की सड़क पर मिलीं.
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इमेज कैप्शन, पाब्लो टोस्को की यह तस्वीर मैसिडोनिया और सर्बिया सीमा रेखा के पास की है. हज़ारों शरणार्थियों की तरह इस परिवार को भी ग्रीस के तट पर पहुंचने से पहले सैंकड़ों मील तक पैदल चलना पड़ा.
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इमेज कैप्शन, इस तस्वीर में जो महिला हैं उनके घर को हाल ही में इराक़ी गठबंधन सेना ने कथित चरमपंथी गुट इस्लामिक़ स्टेट के कब्ज़े से छुड़ाया है. परिवार के बाक़ी लोगों के वापस लौटने से मना करने के बाद, ये अपने बच्चे के साथ अकेली इस मकान में रह रही हैं. ये तस्वीर टॉम्मी ट्रेंचर्ड ने ली है. ऑक्सफ़ैम की मदद से उन्होंने अपना घर रहने लायक दुरुस्त कर लिया है और अब रोजी-रोटी के लिए गांव में कपड़े सिलने का काम कर रही हैं.