लाइव, एक सर्वे के मुताबिक़ ट्रंप की लोकप्रियता मौजूदा कार्यकाल में सबसे निचले स्तर पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता उनके मौजूदा कार्यकाल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. एक सर्वे के मुताबिक़ ट्रंप की लोकप्रियता मौजूदा कार्यकाल में सबसे निचले स्तर पर

    डोनाल्ड ट्रंप

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता उनके मौजूदा कार्यकाल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

    यह बात ब्रिटिश अख़बार द गार्जियन में छपे रॉयटर्स-इप्सोस के नए सर्वे में सामने आई है.

    अमेरिकियों की नाराज़गी की प्रमुख वजह है बढ़ती महंगाई पर ट्रंप क़ाबू नहीं पा सके. इसके अलावा, ईरान के ख़िलाफ़ उनकी जंग लोगों को पसंद नहीं आ रही. इस युद्ध से अमेरिका में पेट्रोल की क़ीमतें बढ़ गई हैं.

    चार दिन चले सर्वे में सिर्फ़ 34 प्रतिशत अमेरिकियों ने ट्रंप के कामकाज को सही बताया, जबकि 15 से 20 अप्रैल के बीच हुए पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत था.

    महंगाई से जुड़े कामकाज पर ट्रंप को सिर्फ़ 22 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला, जबकि पिछले सर्वे में यह 25 प्रतिशत था.

    रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में भी चिंता बढ़ रही है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में वे अमेरिकी संसद कांग्रेस में कमज़ोर पड़ सकते हैं.

    हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के 78 प्रतिशत लोग अब भी ट्रंप का समर्थन करते हैं, लेकिन 41 प्रतिशत पार्टी सदस्य महंगाई से निपटने में उनके कामकाज से असंतुष्ट हैं.

  2. ट्रंप के सामने किंग चार्ल्स ने ऐसा क्या कहा, जिसके बाद गूंजने लगे ठहाके

    किंग चार्ल्स और डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, व्हाइट हाउस में हुए स्टेट डिनर के दौरान किंग चार्ल्स और डोनाल्ड ट्रंप

    ब्रिटेन के किंग चार्ल्स अमेरिका में राजकीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने कहा है कि अगर ब्रिटिश न होते तो अमेरिकी लोग फ़्रेंच बोल रहे होते.

    किंग चार्ल्स ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में हुए स्टेट डिनर के दौरान मज़ाक़िया अंदाज़ में कहा, "राष्ट्रपति जी (डोनाल्ड ट्रंप) ने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते. मैं यह कहने की हिम्मत करूंगा कि अगर हम न होते, तो आप फ़्रेंच बोल रहे होते."

    इसके बाद हॉल में ठहाके गूंजने लगे और किंग चार्ल्स के सामने बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हंसने लगे.

    इससे पहले स्टेट डिनर में भाषण देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि चार्ल्स भी इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए.

  3. ट्रंप ने किंग चार्ल्स की मौजूदगी में ईरान को लेकर दिया बयान, किंग चार्ल्स ने नेटो की अहमियत पर दिया ज़ोर

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के दौरान ट्रंप ने भाषण दिया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है. उन्होंने यह बात व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की मौजूदगी में कही.

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "हम कभी भी उस विरोधी (ईरान) को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे. चार्ल्स मुझसे भी ज़्यादा इस बात से सहमत हैं, हम कभी भी ऐसा नहीं होने देंगे."

    ट्रंप ने अपने भाषण में मध्य पूर्व का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में बहुत अच्छा कर रहा है.

    राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर "कम्युनिज़्म, फ़ासीवाद और तानाशाही ताक़तों के खिलाफ डटकर खड़े रहे हैं."

    इसके बाद किंग चार्ल्स ने नेटो और ऑकस अलायंस की अहमियत पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे अलायंस से तकनीकी और सैन्य सहयोग को और मज़बूत किया जा सकता है.

  4. पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटों पर मतदान जारी

    वोटिंग के लिए कतार में लगे लोग

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    इमेज कैप्शन, दूसरे चरण की 142 सीटों पर कुल 3.21 करोड़ मतदाता हैं (सांकेतिक फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 142 सीटों पर बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दूसरे चरण में कुल 1448 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें से 220 महिलाएं हैं. दूसरे चरण की इन सीटों पर कुल 3.21 करोड़ वोटर्स हैं.

    कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्दवान जिलों में लोग मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े दिखे.

    2021 में इन 142 सीटों में से टीएमसी ने 123 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ 18 और आईएसएफ को 1 सीट मिली थी.

    पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. 4 मई को चुनाव के रिज़ल्ट आएंगे.

  5. अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए किंग चार्ल्स ने क्या कहा?

    किंग चार्ल्स

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी संसद को संबोधित करते किंग चार्ल्स

    ब्रिटेन के किंग चार्ल्स अमेरिका दौरे पर हैं. यहां पर उन्होंने मंगलवार को अमेरिकी संसद 'कांग्रेस' को संबोधित किया.

    यह दूसरा मौका था जब ब्रिटेन के सबसे बड़े शाही पद पर बैठे व्यक्ति ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया. इससे पहले उनकी मां क्वीन एलिज़ाबेथ ने कांग्रेस को संबोधित किया था.

    किंग चार्ल्स ने अपने भाषण में अमेरिका और ब्रिटेन के साझा इतिहास की ओर इशारा किया और कहा कि यह रिश्ता कई सदियों पुराना है.

    किंग चार्ल्स ने कहा, "इतिहास से आगे बढ़कर दोनों देशों के पास साझा लोकतांत्रिक मूल्य हैं, जो उनकी शासन व्यवस्था की नींव हैं."

    उन्होंने आगे कहा, "ब्रिटेन और अमेरिका की ख़ास साझेदारी सिर्फ़ पुरानी कामयाबियों पर नहीं टिक सकती, ख़ासकर ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है."

    उन्होंने ब्रिटेन और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में और ज़्यादा सहयोग की अपील की और कहा कि यूक्रेन को समर्थन देना ज़रूरी है ताकि यूरोप में स्थायी शांति हासिल हो सके.

    किंग चार्ल्स

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    इमेज कैप्शन, व्हाइट हाउस में हुए स्टेट डिनर के दौरान किंग चार्ल्स

    इसके बाद व्हाइट हाउस में हुए स्टेट डिनर के दौरान किंग चार्ल्स ने नेटो और ऑकस अलायंस की अहमियत पर ज़ोर दिया.

    उन्होंने ट्रंप की मौजूदगी में कहा कि ऐसे अलायंस से तकनीकी और सैन्य सहयोग को और मज़बूत किया जा सकता है.

    उन्होंने आगे कहा, "ऐसा करने से हम मिलकर ऐसी दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकें जो लगातार जटिल होती जा रही है."

    गौरतलब है कि ब्रिटेन के किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला चार दिन के राजकीय दौरे पर अमेरिका में हैं.

  6. अमेरिका ने ईरान से जुड़े 35 लोगों और कंपनियों पर लगाया बैन, इन पर क्या आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप

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    अमेरिका ने ईरान से जुड़े 35 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. इन पर आरोप है कि ये लोग ईरान की "हिडन बैंकिंग व्यवस्था" का हिस्सा हैं.

    अमेरिकी वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल का कहना है कि ये लोग 'अरबों डॉलर के लेन-देन में शामिल थे' और 'ईरान की आतंकवाद को मदद देने वाली गतिविधियों से जुड़े' हैं.

    रिपोर्ट के मुताबिक, "इस नेटवर्क ने अवैध तेल बिक्री से पैसा कमाया, मिसाइल और हथियारों के लिए ज़रूरी पुर्ज़े खरीदे और ईरान से जुड़े लड़ाकों को पैसे भेजे."

    अमेरिका का आरोप है कि ये नेटवर्क ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड को दुनिया की वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच दिलाते हैं.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी अमेरिका ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे ईरान पर आर्थिक तौर पर दबाव बनाया जा सके.

  7. नमस्कार!

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