'बोरिंग चिकन करी' से तंग पत्नी का स्टार्टअप

दार्जीलिंग एक्स्प्रेस की महिला शेफ़
    • Author, श्रेष्ठा त्रिवेदी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

खाना बनाने का व्यवसाय पुरुष-प्रधान रहा है और लंदन में भी इसकी कहानी कुछ अलग नहीं है.

यहाँ पुरुष शेफ़ की अच्छी खासी संख्या है और कई मशहूर भी हैं, मसलन विनीत भाटिया, अतुल कोचर, करम सेठी और अल्फ्रेड प्रसाद. लेकिन इसमें महिलाओं की संख्या नहीं के बराबर है.

अब फ़ूड बिज़नेस में दक्षिण एशियाई महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. वे इस बाधा को निहायत ही ग़ैर पारम्परिक तरीक़े से स्टार्टअप खोलकर पार कर रही हैं.

बुलंदशहर और बंगाल के शाही परिवार से ताल्लुक़ात रखने वाली आसमा ख़ान का जन्म और परवरिश कोलकाता में हुई. वे साल 1991 में ब्रिटेन चली गईं.

आसमा को खाना बनाना नहीं आता था और वो अपने पति की 'बोरिंग चिकन करी' से ही काम चलाती रहीं.

ब्रिटेन में उन्हें उन लज़ीज़ खानों की कमी खलने लगी, जिन्हें खाते हुए वे कोलकाता में बड़ी हुई थीं. वे इन्हें 'कलकत्ता मुस्लिम फ़ूड' कहती हैं. यानी अवध, बंगाल और हैदराबाद की पाक कलाओं का मिलाजुला रूप.

वे खाना बनाना सीखने के लिए भारत लौटीं, खासकर उन पकवानों के लिए जो उनके परिवार में परंपरागत तरीकों से पीढ़ियों से बनते आ रहे हैं.

और इस तरह खाना पकाने की शाही विरासत से उनकी मोहब्बत हुई.

उन्होंने साल 2012 में लंदन में अपने घर में एक सुपर क्लब खोला और उसे 'दार्जिलिंग एक्सप्रेस' का नाम दिया.

आसमा खान

आसमां अकेली नहीं हैं. लंदन में ऐसी बहुत सी दक्षिण एशियाई महिलाएं हैं, जिन्होंने इतनी ही सफलता से अपने काम को अंजाम दिया है.

इनमें से ज़्यादातर ने शेफ़ बनने की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. उनके पास रेस्तरां खोलने के लिए संसाधन भी नहीं थे. लेकिन वो ग्लोबल ट्रेंड को समझते हुए स्ट्रीट फ़ूड के तौर तरीक़ों को नया रूप दे रही हैं.

वो सुपर क्लब खोल रही हैं, रेस्तरां को पाक कला के सुझाव दे रही हैं या फ़ूड ब्लॉगर के रूप में सामने आ रही हैं.

आसमां कहती हैं कि जब उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया तो उनके घर चिकन चाप, चुकंदर का रायता और कलकत्ता बिरयानी का ज़ायका लेने के लिए प्रवासी भारतीय, फ्रांसीसी पड़ोसी और फ़ूड ब्लॉगरों की भीड़ आनी शुरू हो गई.

आख़िरकार, उन्होंने अपने व्यवसाय को एक पब में ले जाने का फ़ैसला किया.

आसमा खान

इसी तरह धारिणी शिवाजी ने साल 2014 में विज़ुअल मर्केंडाइज़र की नौकरी छोड़ लंदन में श्रीलंकाई खाने का प्रचार करने के लिए 'स्ट्रीट फ़ूड कोथु कोथु' शुरू किया.

कोथु रोटी श्रीलंका में एक लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड है जो गोधाम्बा रोटी से बनती है. इसे मांस, सब्जी, अंडा, मसाले और नारियल के साथ मिक्स कर बनाते हैं. इसमें लहसुन, मिर्च और नींबू भी पड़ता है.

कोथु कोथु की सफलता ने श्रीलंकाई व्यंजनों को गैर श्रीलंकाइयों के मुख्य भोजन का हिस्सा बना दिया और उपलब्धता बढ़ा दी.

वे कहती हैं, "कई लोगों की सलाह के बावजूद मैंने शाकाहारी खाने में पनीर को शामिल नहीं किया, क्योंकि पनीर श्रीलंकाई नहीं है. मैं वही करती हूं जो मेरी मां ने सिखाया था, यानी मसाले की सही मात्रा, ताकि ये बहुत तीखा न हो."

भारतीय मूल की आसमा ख़ान अपनी सफलता का श्रेय अपनी टीम को देती हैं.

वो कहती हैं, "ये सभी महिलाएं हैं और सभी मुझसे ज़्यादा उम्रदराज़ हैं. ये हर जगह की हैं, भारतीय, रोमानियाई, इसराइली और ऑस्ट्रेलियाई."

उन्हें यह देखकर अच्छा लगता है कि महिलाएं लंदन में खानपान पर अपना दावा मजबूत कर रही हैं क्योंकि आज भी हमारे घरों में जो खाना बनता है, उन्हें ज़्यादातर महिलाएं ही बनाती हैं.

आसमा खान

इसी बीच कुछ महिलाएँ ऐसी भी हैं, जो 'सेहतमंद भारतीय खाने' में कुछ नया करने की कोशिश कर रही हैं.

उपमा अरोड़ा और आरती बारेजा को साल 2014 में 'ढाबा लेन' शुरू करने का आइडिया आया, जो उचित दाम पर सेहतमंद भारतीय भोजन मुहैया कराए.

उपमा कहती हैं, "भारतीय व्यंजनों को चिकना खाना बताने वाले लोगों की बातों से मैं तंग आ गई थी. मेरा आइडिया था कि हर चीज ताज़ी हो, 600 कैलोरी के अंदर हो और क़ीमत छह पाउंड से अधिक न हो."

अब उनके ग्राहकों में कॉग्नीजेंट, ट्रांसफ़रवाइज़ और उबर जैसी कंपनियां हैं.

उपमा का मानना है कि भोजन के व्यवसाय में अधिक महिलाओं के आने के पीछे लंदन की समावेशी संस्कृति का बड़ा हाथ है.

वहीं आसमा का मानना है कि महिलाओं को अक्सर '3-सी' यानी कैपिटल (पूंजी), कनेक्शंस (सम्पर्क) और कॉन्फ़िडेंस (आत्मविश्वास) की कमी का सामना करना पड़ता है. इसलिए प्रोत्साहन और समर्थन बहुत मददगार होता है.

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में वो एक ऐसा फ़ोरम बनाने की सोच रही हैं, जो प्रवासी महिलाओं और उनकी विविध पाक कला विरासत को बढ़ावा दे.

वे वहां अपने अनुभव बांट सकें, दूसरों से प्रेरणा ले सकें, खाने और यादों के सहारे एक-दूसरे से घुलमिल सकें.

दार्जीलिंग एक्स्प्रेस

सुमैया उस्मानी एक स्वतंत्र फ़ूड राइटर हैं. वे कहती हैं कि जब वे पहली बार ब्रिटेन आई तो यह देखकर बहुत निराश हुईं कि पाकिस्तानी खान-पान का अन्य दक्षिण एशियाई तरीक़ों के साथ घालमेल कर दिया गया है. उनका पसंदीदा फ़ूड है कुन्ना गोश्त.

वे कहती हैं, "यह पाकिस्तान में पंजाब के चिनियट इलाक़े में त्यौहारों पर बनने वाला डिश है. इसे मटन या बकरी के पाये से बनाया जाता है. यह निहारी जैसा है, थोड़ा अधिक मसालेदार."

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के निकलने के फ़ैसले से आर्थिक अनिश्चितता और सामाजिक विभाजन का ख़तरा बढ़ गया है.

ऐसे में खान-पान से जुड़ा व्यवसाय इन महिलाओं को न सिर्फ़ आर्थिक आज़ादी दे रहा है बल्कि समुदायों के सामाजिक तानेबाने को मज़बूत करने में भी अपनी भूमिका अदा कर रहा है.

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