'जो करना है करो, मेरी बेटी को छोड़ दो'

मारिया
    • Author, लूसी ऐश
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कोलंबिया
  • प्रकाशित

कोलंबियाई हथियारबंद गुटों की महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा की निंदा करने वाली महिला को चरमपंथियों ने अगवा कर कड़ी यातनाएं दीं. उनकी कहानी बताती है कि कोलंबिया में हथियारबंद गुट कितने शक्तिशाली हैं.

कोलंबिया में फ़ार्क विद्रोहियों ने युद्धविराम की घोषणा की हुई है, लेकिन इसके बाद भी देश के कुछ इलाक़ों में क़ानून व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है.

ये कहानी है रंगीन पगड़ी और ढीले पैजामे में खड़ी अफ़्रीकी कोलंबियन महिला मारिया की, जो अपने मरीज़ों का इलाज पारंपरिक जड़ी-बूटियों से बनाई दवा से करती हैं. उनके पास बगोटा के सुदूर इलाकों में हथियारबंद संघर्ष में घायल हुए लोग इलाज के लिए आते हैं.

चरमपंथी गुट

पचास साल से भी लंबे समय से यहाँ वामपंथी गुरिल्ला लड़ाकों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है. लोग मारिया के इस सरकारी क्लीनिक में इलाज और अपना दर्द बांटने के लिए पहुंचते हैं. दूसरों का इलाज करने वाली मारिया ख़ुद भी एक बुरे अनुभव और दर्द से निकलने की कोशिश कर रही हैं, जिसकी वजह से उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है.

कोलंबिया में हर 10 में से एक नागरिक अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहा है और मारिया भी उनमें से एक हैं. देश में चल रहे संघर्ष की वजह से साल 1964 से अब तक क़रीब 70 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और 2 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

1964 में ही हथियारबंद गुट फ़ार्क ने सामाजिक बराबरी और भूमि सुधार की मांग करते हुए सरकार के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी थी. हालांकि फ़ार्क गुट ने फिलहाल युद्धविराम कर रखा है और इससे एक उम्मीद जगी है कि दूसरे गुट भी इसे मानेंगे, जिन्होंने इस देश के बड़े इलाक़े को अशांत कर रखा है.

एक छोटे से मकान में रहने वाली मारिया ने बताया कि 6 साल पहले वो चार सौ मील दूर पश्चिमी कोलंबिया में क़ीब्दो में रहती थीं. यह देश के सबसे पिछड़े इलाक़ो में से एक है.

मारिया का अपना शहर

मारिया वहां एक महिला संगठन 'एफ़्रोमुपाज़' की नेता थीं. यह संगठन वहां चल रहे संघर्ष में विस्थापित परिवारों की मदद करता था. मारिया ने हथियारबंद गुटों में बच्चों को भर्ती किए जाने के ख़िलाफ़ भी आंदोलन चलाया था. इसके अलावा हथियारबंद गुटों के हाथों महिलाओं और लड़कियों पर होने वाली यौन हिंसा के ख़िलाफ़ भी मारिया ने आवाज़ उठाई.

साल 2010 के जुलाई महीने में एक आदमी मारिया के पास पहुंचा और उसने मारिया के संगठन को बच्चों के कपड़े और जूते दान करने की इच्छा जताई. उसने मारिया से यह सब इकट्ठा करने के लिए पास के ही एक घर में चलने को कहा.

मारिया बताती हैं, "मैं बिना किसी संदेह के उसके ट्रक में सवार हो गई. लेकिन जब वह ट्रक को शहर से बाहर की ओर ले जाने लगा तो मुझे अजीब-सा लगा और मैंने पूछा कि सारा सामान कहां है. उसी समय किसी ने मेरे ऊपर बंदूक तान दी और उसके पिछले हिस्से से मेरे सिर पर वार किया."

मारिया को उसके बाद जंगल ले जाया गया जहां उसे कई हथियारबंद लोगों ने घेर लिया. मारिया तब और भी ज़्यादा डर गईं, जब एक आदमी उनकी 13 साल की बेटी को लेकर वहां पहुंचा.

मारिया की बेटी कैमिला को 'लोस राष्ट्रोजोस पैरामिलिट्री' ग्रुप की महिला सदस्यों ने फुसलाकर एक कार में बिठा लिया. कैमिला को मां से मिलवाने के नाम पर लाया गया था, लेकिन मां-बेटी दोनों का ही अपहरण किया गया था.

एक महिला का हाथ

हालांकि आधिकारिक तौर पर इस दक्षिणपंथी चरमपंथी गुट को एक दशक पहले की ख़त्म किया जा चुका है. लेकिन इसके कई सदस्यों ने आपराधिक गिरोह बना लिए हैं जो वास्तव में एयूसी यानी ऑटोडिफ़ेंसास यूनिडास डी कोलंबिया के नीचे काम करते हैं. इन गिरोहों को भूमि मालिकों और नशे के कारोबारियों से चंदा मिलता है, जिन्हें वामपंथी गुरिल्ला लड़ाकों से अपनी सुरक्षा की ज़रूरत होती है.

मारिया बताती हैं, " शुरू में तो मुझे लगा कि वो लोग मुझे मारने वाले हैं. फिर उनमें से ही एक ने कहा कि मुझे बहुत ज़्यादा बोलने की सज़ा दी जाएगी. उन लोगों ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जिससे मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया कि वो क्या करने वाले हैं. फिर मैंने कहा कि तुम लोगों को जो भी करना है करो, लेकिन मेरी बेटी को हाथ मत लगाना. "

उसके बाद पांच लोगों ने लगातार पांच दिनों तक मारिया का रेप किया. फिर एक समय बाद मारिया बेहोश हो गईं और जब उनकी आँख खुली तो वो क़ीब्दो के एक अस्पताल में थीं. वो सड़क पर पड़ी हुई थीं और वहीं से उन्हें हॉस्पिटल लाया गया था.

बुरी तरह से घायल उनकी बेटी कैमिला को वापस घर भेज दिया गया. उनके साथ किसी ने रेप नहीं किया था. मारिया बताती हैं, "उन लोगों ने कैमिला से ख़ामोश रहने को कहा था और किसी को कुछ भी बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी. इसलिए उसने बात करना ही बंद कर दिया था. बहुत दिनों के बाद वो केवल 'हां' या 'नहीं' बोलती थी."

नदी -नाव

मारिया धीरे-धीरे ठीक हो गई और छह महीने के बाद उसने फिर से 'एफ़्रोमुपाज़' में काम शुरू कर दिया. लेकिन एक दिन उसी हथियारबंद गुट का एक आदमी आया और उसने मारिया से 48 घंटे में शहर छोड़कर चले जाने की धमकी दी. मारिया बताती हैं, " मैं समझ गई कि मुझे जाना ही होगा."

उसके बाद मारिया कोलंबिया की राजधानी बगोटा में आकर बस गईं. यहां अधिकारियों ने उन्हें बुलेट प्रूफ़ जैकेट और एक मोबाइल फ़ोन भी दिया. मारिया को हर महीने टैक्सी का किराया भी दिया जाने लगा, क्योंकि उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया था. कुछ महीनों के बाद मारिया के तीनों बच्चे भी उनके साथ रहने आ गए.

कोलंबिया में बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पर्यावरण के लिए आंदोलन करने वालों और सामाजिक नेताओं की हत्या होती रही है. इन हत्याओं के पीछे हथियारबंद गुटों, आपराधिक गिरोहों और वामपंथी गुरिल्ला संगठन ईएलएन (नेशनल लिबरेशन आर्मी) का हाथ होता है.

कैथोलिक पादरी हेक्टर फैबियो हेनाव ने कोलंबिया सरकार और फ़ार्क के बीच शांति समझौते में बड़ी भूमिका निभाई है. वो कहते हैं, "यहां नशे के अवैध कारोबार और सोने की अवैध खुदाई करने वाले अपने आसपास पर्यावरण को बचाने वालों को नहीं देखना चाहते हैं". वो यहां के मूल निवासियों और यौन हिंसा की निंदा करने वालों को पसंद नहीं करते हैं. इसीलिए वो यहां की आबादी को निजी सेना की मदद से कंट्रोल में रखते हैं.

दूसरी तरफ सरकार और फ़ार्क संगठन इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि पिछले 50 साल में मानवाधिकार हनन की जांच और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए एक विशेष ट्राइब्यूनल बनाया जाएगा. इसमें यह भी सहमति हुई है कि यौन हिंसा या रेप करने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा.

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