पाक कार्टूनिस्ट की हीरोइन पोल्का ड्रेस पहनती है

गोगी कॉमिक्स
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निगार नज़र पाकिस्तान की पहली पेशेवर महिला कार्टूनिस्ट हैं और उन्होंने 'गोगी' को अपने कॉमिक्स की हीरोइन बनाया है.

वे बताती हैं, ''मैं कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही थी लेकिन लगातार अपनी मेडिकल की किताबों के हाशिए पर चित्र बनाती रहती थी.''

निगार कहती हैं, ''फिर मैंने यू-टर्न लिया और अपने माता-पिता को फ़ाइन आर्ट्स की पढ़ाई के लिए तैयार कर लिया.''

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और उनका यह फ़ैसला फ़ायदेमंद साबित हुआ.

निगार की कॉमिक की हीरोइन गोगी प्रगतिशील और शिक्षित पाकिस्तानी महिला है, जो पोल्का डॉट्स वाली ड्रेस पहनती है.

गोगी पाकिस्तान और बाक़ी देशों में काफ़ी लोकप्रिय है.

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उनकी कॉमिक में एक किरदार ऐसा है जो यह पता लगाने की कोशिश करता है कि पाकिस्तान में कितने लोग बेटियों की जगह बेटे चाहते हैं.

नज़र के मुताबिक़, ''हमारे देश में लड़कियों के जन्म पर जश्न नहीं मनाया जाता और यह बात मुझे बिल्कुल पसंद नहीं.''

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निगार नज़र सामाजिक मुद्दों और विरोधाभासों पर काम करती हैं. वे बताती हैं, ''मैं अपने आसपास हो रही चीज़ों से प्रेरणा लेती हूृँ.''

गोगी कॉमिक्स में महिला शिक्षा, पर्यावरण पर संदेश होता है पर इसमें पाकिस्तान की रोज़मर्रा ज़िंदगी के हल्के-फुल्के हंसी मज़ाक भी शामिल होते हैं. नज़र कहती हैं कि उन्होंने अमरीका में बचपन में कॉमिक्स पढ़ना शुरू किया था.

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उन्होंने बताया,"जब हम पाकिस्तान लौटे तो मुझे स्थानीय कॉमिक्स नहीं मिले. मैं दुकानों से अमरीकी कॉमिक्स लाया करती थी."

मेडिकल की पढ़ाई छोड़ने के बाद चित्रकला का अध्ययन शुरू करने पर उन्हें छात्रवृत्ति भी मिल गई.

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हालांकि कॉमिक्स की चित्रकारी का कोई कोर्स न होने से उन्हें संघर्ष भी करना पड़ा.

"पहले तो मैंने कुछ किताबों से कार्टून बनाना सीखना शुरू किया पर असली प्रशिक्षण तब शुरू हुआ, जब मुझे एक अख़बार में पहली नौकरी मिली.''

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गोगी पाकिस्तान में काफ़ी लोकप्रिय हैं लेकिन नज़र के मुताबिक़ सामाजिक विषयों पर कार्टून स्थानीय अख़बारों में कम छपते हैं क्योंकि ये राजनीति पर बनाए कार्टूनों से कम पसंद किए जाते हैं.

वह कहती हैं, "मैं अब अख़बारों की जगह सोशल मीडिया पर कॉमिक के प्रचार पर ध्यान दे रही हूँ."

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निगार ने अब तक चरमपंथ, भ्रष्टाचार, महिला शिक्षा और अधिकारों के विषयों पर 14 कॉमिक बुक्स तैयार की हैं.

प्रेस की आज़ादी को लेकर उनका मानना है कि पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी है पर उन मुद्दों पर आज़ादी नहीं, जो लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं.

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निगार का कहना है कि वो धार्मिक विषयों से दूर रहती हैं पर लड़कियों के शिक्षा के अधिकार पर कार्टून के लिए क़ुरान की आयतों के इस्तेमाल से पहले वह मौलवियों से इजाज़त लेती हैं.

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