'बैंकॉक धमाका पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर निशाना'

बैंकॉक
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थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में सोमवार शाम एक हिंदू मंदिर के पास हुए धमाके में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 120 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. दो अन्य बमों को निष्किय किया गया है. अभी ये पता नहीं चल पाया है कि इस हमले के पीछे किसका हाथ था.

ये धमाका इरावान मंदिर के पास हुआ जहां धमाके के वक्त बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. धमाके के वक्त घटनास्थल पर मौजूद एक व्यक्ति रिचर्ड स्रीकुरेजा ने बीबीसी को बताया, ''मैं मंदिर के पास एक मॉल की ओर जा रहा था कि तभी मैंने एक ज़ोरदार धमाका सुना जिसके बाद मैंने देखा लोग यहां-वहां भाग रहे थे.''

दृश्य दिल दहलाने वाला

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धमाके के बाद घटनास्थल का दृश्य दिल दहलाने वाला था. एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी जेम्स सेल्स ने बीबीसी को बताया, ''वहां कई लाशें पड़ी थीं. एक व्यक्ति तो ऐसा था जिसका शरीर धमाके की वजह से दो हिस्सों में टूट गया था. कई लाशें चीनी पर्यटकों की थीं.''

शहर के कुछ और हिस्सों में भी बम लगाए थे. बैंकॉक पोस्ट के संवाददाता मार्क ह्यूग्स ने बीबीसी को बताया पूरे शहर में सायरन बज रहे थे. कुल तीन बम लगाए गए थे. अच्छी बात ये हुई कि शहर में अलग-अलग जगहों पर दो और बमों में धमाका नहीं हुआ.

धमाका काफी शक्तिशाली था. थाईलैंड के पुलिस प्रमुख सोम्योत पोम पुमउयांग का कहना है, ''धमाके का असर लगभग 100 मीटर के दायरे में हुआ. जानकारों का कहना है कि धमाके के लिए तीन किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था. इस हमले के पीछे कोई भी मक़सद हो सकता है.''

निशाने पर विदेशी पर्यटक

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थाईलैंड में इस समय सेना समर्थित सरकार है. सैन्य सरकार के प्रवक्ता का कहना है, ''सरकार का पूरा ज़ोर इस बात पर है कि इस धमाके की जांच के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी और इसके लिए जि़म्मेदार लोगों न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा.''

वहीं थाईलैंड के रक्षा मंत्री प्रवित वोंग सुवान का कहना है कि ये धमाका विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाने के इरादे से किया गया था. इसीलिए धमाके के लिए इरावान मंदिर को चुना गया जहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं.

थाईलैंड में कुछ मुसलमान चरमपंथी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, लेकिन वो सिर्फ़ देश के दक्षिणी हिस्से तक ही सीमित हैं और अन्य हिस्सों में शायद ही कभी हमले हुए हों.

लेकिन बैंकॉक में पिछले एक दशक के दौरान राजनीतिक गुटों के बीच हिंसक प्रतिद्वंद्विता ज़रूर देखी गई है.

सेना ने पिछले साल मई में महीनों की अशांति के बाद एक चुनी हुई सरकार को हटा कर सत्ता अपने हाथ में ले ली.

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