सीरियाई सेना में सैनिकों की कमी: असद

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सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद ने माना है कि सीरियाई सेना को दबाव के कारण युद्ध में कुछ इलाकों को बचाने के लिए कई इलाकों को छोड़ना पड़ा है.

बशर-अल-असद ने कहा कि सेना को सैनिकों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है.

देश के कई इलाकों पर भी सेना का कब्ज़ा नहीं है, ऐेसे में सेना के पास बचाव की नीति के अलावा कोई रास्ता नहीं है.

'बचाव करो और जीतो' पर चलेगी सीरियाई सेना

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बशर-अल-असद ने कहा कि चरमपंथी बाहरी मदद से मिल रही मदद से मज़बूत हो रहे हैं लेकिन सीरियाई सेना की हालत खस्ता हो रही है. बाहरी मदद से उनका मतलब तुर्की, सउदी अरब और क़तर माना जा रहा है.

दमिश्क में टीवी पर प्रसारित एक भाषण में असद ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सेना मुख्य इलाकों जैसे कि दमिश्क, होम्स, हामा औऱ समुद्री किनारे के इलाकों को बचा सकेगी.

लेकिन अन्य बड़े शहरों जैसे उत्तरी सीरिया के अलेप्पो औऱ दक्षिणी सीरिया के डेरा को बचाने को लेकर सवाल बना हुआ है.

'समझौते का सवाल नहीं'

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बशर-अल-असद ने समझौते की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि लड़ाई जारी रहेगी.

उन्होंने कहा, "हार नाम का शब्द सीरियाई सेना डिक्शनरी में नहीं है."

इस साल उत्तर-पश्चिमी प्रांत की राजधानी इदलिब और पलमायरा शहर पर चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट का कब्ज़ा हो गया है.

सीरिया के हालात ख़राब

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सीरिया में चल रहे संघर्ष में अब तक दो लाख 30 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर हुए हैं.

कई इलाके अब भी सरकार के कब्ज़े से दूर हैं.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक कभी सीरियाई सेना में अनिवार्य भर्ती के तहत तैनात किए गए 3 लाख सैनिक थे लेकिन युद्ध में मौत की वजह से यह संख्या तकरीबन आधी रह गई है.

किनारा कर रहे युवक

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सीरिया में जुलाई की शुरूआत में सेना में भर्ती का अभियान शुरू किया गया था लेकिन तकरीबन 70 हज़ार जवानों ने इससे किनारा कर लिया है.

मार्च 2011 में शुरू हुए हिंसक संघर्ष में अब तक 80 हज़ार सैन्यकर्मी औऱ सरकार का समर्थन कर रहे लड़ाकों की मौत हो गई है.

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