नेपालः टूर ऑपरेटरों ने हाथ खड़े किए

नेपाल भूकंप
    • Author, नवीन सिंह खड़का
    • पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी
  • प्रकाशित

पिछले दिनों आए विनाशकारी भूकंप से बदहाल नेपाल के टूरिस्ट ऑपरेटर ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय जानना चाह रहे हैं.

वो शीर्ष भूगर्भशास्त्रियों का आंकलन इसलिए जानना चाहते हैं क्योंकि भूकंप से हिले पहाड़ों पर ख़तरा बढ़ गया है.

नेपाल में इस तरह का पर्यटन आमदनी का प्रमुख स्रोत है.

देश के बड़े बड़े पर्यटन स्थल अभी भी भूस्खलन के ख़तरों का सामना कर रहे हैं. भूकंप और उसके बाद आने वाले छोटे छोटे झटकों से ख़तरा बढ़ गया है.

सरकार से अपील

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केंद्रीय नेपाल में स्थित मानसालू, लांगतांग, रोलिंग और हेलाम्बू जैसे ट्रेकिंग इलाक़ों के अलावा पर्यटकों के पसंदीदा अन्नपूर्णा और एवरेस्ट के इलाक़े भी ख़तरे से खाली नहीं रह गए हैं.

ट्रेकिंग एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ नेपाल के अध्यक्ष रमेश धामला कहते हैं, “भूकंप प्रभावित इन इलाक़ों को पर्यटकों के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले हमें अंतरराष्ट्रीय भूगर्भशास्त्रियों की आंकलन रिपोर्ट लेनी होगी. विशेषज्ञ जल्द ही इन इलाक़ों का मुआयना करने वाले हैं.”

उनके अनुसार, “हमने सरकार से लिखित रूप से कहा है कि जब तक विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट नहीं दे देते इन इलाक़ों को ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए नहीं खोला जाना चाहिए.”

ट्रेकिंग एजेंटों का कहना है कि यदि वर्तमान हालात में इन इलाक़ों में पर्यटकों को इजाज़त दी जाती है और फिर से आपदा आती है तो देश के पर्यटन उद्योग को अपूर्णीय क्षति होगी.

आर्थिक पहलू

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नेपाल माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष आंग शेरिंग शेरपा भी रमेश धामला से सहमति जताते हैं.

लेकिन कुछ टूर ऑपरेटरों को लगता है कि व्यवसाय को जल्द से जल्द पटरी पर लौटना चाहिए क्योंकि तबाही हर ओर हुई है और कुछ इलाक़े ऐसे हैं जहां ख़तरा कम है.

साल 2013 में आठ लाख पर्यटक नेपाल आए थे और 2012 में भी लगभग यही संख्या थी. इनमें से 13 प्रतिशत पर्यटक ट्रेकिंग और पर्वातारोहण वाले थे.

नेपाल भूकंप
इमेज कैप्शन, नेपाल में भूकंप के झटकों के कारण भूस्खलन का ख़तरा बढ़ गया है.

अन्नपूर्णा इलाक़े में एवरेस्ट के बाद सबसे अधिक ट्रेकिंग करने लोग आते हैं.

बीते 25 अप्रैल को आए भूकंप का केंद्र काठमांडू के पश्चिम में गोरखा क्षेत्र में था, लेकिन इसने पूरब के सुदूर एवरेस्ट को भी हिला दिया था.

भूकंप का सबसे अधिक असर लांगतांग घाटी में हुआ जहां सारे सारे गांव तूफ़ान और भूस्खलन में दफ़न हो गए और मलबे में विदेशी ट्रेकरों समेत 200 लोग मारे गए थे.

अन्नपूर्णा इलाक़े में अभी भी अधिकांश पहाड़ों में भूस्खलन रुक रुक कर हो रहा है और बीते रविवार को भूस्खलन से एक बड़ी नदी की धारा बंद हो गई है.

मानसून में ख़तरा बढ़ेगा

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बीती 12 मई को 7.3 तीव्रता का शक्तिशाली आफ़्टरशॉक आया था, जिसका केंद्र काठमांडू के उत्तरपूरब में स्थित लोकप्रिय ट्रेकिंग इलाक़ों रोलिंग और हेलाम्बू वाले इलाक़े में था.

इस झटके से इलाक़े में काफ़ी तबाही मची और एवरेस्ट क्षेत्र में दोबारा क्षति हुई.

अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को माउंट एवरेस्ट के पास एक बर्फ़ीला तालाब टूट गया, जिससे स्थानीय लोगों में भूकंप का डर ताज़ा हो गया.

भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि भूकंप के झटकों से प्रभावित इलाक़ों में 3,000 से ज़्यादा भूस्खलन हुए और आने वाले बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है.

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