आईएस को रोकना ज़रूरी है: वेटिकन

yezidi soldier in iraq army-reuters
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वेटिकन का कहना है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का यदि कोई राजनीतिक हल नहीं निकलता तो वहाँ ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों पर चरमपंथी संगठनों के हमलों को रोकने के लिए बल प्रयोग ज़रूरी हो सकता है.

जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में वेटिकन के उच्च राजनयिक आर्कबिशप सिल्वानो तोमासी ने कहा कि ये तथाकथित जिहादी नरसंहार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें रोकना ज़रूरी है.

वेटिकन सामान्य तौर पर इस क्षेत्र में सैन्य दख़ल के ख़िलाफ़ रहा है.

हालाँकि, पोप फ़्रांसिस ने लीबिया में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा मिस्र के 21 ईसाइयों के सिर कलम करने की घटना की तीखी निंदा की थी.

'नरसंहार रोकना होगा'

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इमेज कैप्शन, आर्कबिशप सिल्वानो तोमासी

एक अमरीकी वेबसाइट 'क्रक्स' को दिए इंटरव्यू में आर्कबिशप तोमासी ने कहा, "मध्यपूर्व में बिना हिंसा के राजनीतिक हल तक पहुंचने की हर संभव कोशिश होनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो बल प्रयोग ज़रूरी हो जाएगा.

तोमासी ने कहा, "हमें इस तरह के नरसंहार को रोकना ही होगा, वरना भविष्य में हम रो रहे होंगे कि हमने इस भयानक त्रासदी को रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं किया."

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो

तोमासी ने कहा कि आईएस के हमलों का मुख्य निशाना ईसाई ही हैं, लेकिन सभी अल्पसंख्यक इंसान हैं और उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.

protest in egypt-epa

उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान के लिए जो भी गठबंधन बनाया जाए, इस्लामिक देशों को उसका हिस्सा होना चाहिए और इसे संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देश में काम करना चाहिए.

वेबसाइट 'क्रक्स' का कहना है कि आर्कबिशप ने बड़ी साफगोई से सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया जो सामान्य बात नहीं है.

सीरिया और इराक़ में चरमपंथियों ने जिन इलाकों पर क़ब्ज़ा जमाया है.

फ़रवरी में मानवाधिकार संगठनों ने भी चेतावनी दी थी कि आईएस इराक़ के बहुत से क्षेत्रों से अल्पसंख्यकों को ख़त्म करने की कोशिश कर रहा है.

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