शाही होटल पर वसुंधरा से तकरार के आसार

    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

जयपुर में राजमहल पैलेस होटल का मुख्य दरवाज़ा सील करने, तोड़फोड़ और कुछ भूमि का अधिग्रहण किए जाने से राजपरिवार नाराज़ है.

सरकारी अधिकारियों ने 24 अगस्त को होटल का मुख्य द्वार सील कर दिया था.

होटल राजमहल पर राजपरिवार का मालिकाना हक़ है. उन्होंने कहा है कि वे जयपुर विकास प्राधिकरण के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करेंगे.

राजकुमारी दीया कुमारी के पति महाराज नरेंद्र सिंह ने एक बयान में कहा है कि राजमहल पैलेस की 54 बीघा सात बिस्वा ज़मीन अधिग्रहण मुक्त है. उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे प्राधिकरण की बदनीयती का आरोप लगाया है.

राजघराने का कहना है कि इस भूमि के बारे में उनके पास कोर्ट से पहले के काग़जा़त मौजूद हैं.

राजकुमारी दीया की शिकायत है कि उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों को अदालत के फ़ैसले का हवाला भी दिया पर फिर भी बुलडोज़र चला दिया गया.

इसके बाद सियासत भी गरमा गई है. नगर निगम में कांग्रेस के पूर्व सचेतक गिरिराज खंडेलवाल ने जेडीए की कार्रवाई को आधी-अधूरी बताया.

गिरिराज खंडेलवाल का कहना है कि होटल राजमहल का एक हिस्सा ही नहीं बल्कि पूरी ज़मीन ही सरकारी है. बाजार में इसकी कीमत कई हज़ार करोड़ रुपए है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के इशारे पर सिर्फ एक हिस्से को ही ख़ाली कराया गया है.

जयपुर में पूर्व महाराजा मानसिंह ने अपने बड़े बेटे भवानी सिंह को 1957 में राजमहल और उसके आसपास की भूमि उपहार में दी थी. उनकी बेटी दीया कुमारी के बेटे पद्नाभ सिंह उनकी संपत्ति के वारिस हैं. उन्हें ब्रिगेडियर भवानी सिंह ने गोद लिया था.

सुजान ग्रुप की ओर से इसका प्रबंधन हाथ में लेने के बाद इसे सुजान राजमहल पैलेस का नाम दिया गया था.

इस ज़मीन को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं और अब एक नई तकरार छिड़ गई है.

कार्रवाई के वक्त मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भूटान यात्रा पर थीं.

जयपुर राजघराने और मुख्यमंत्री राजे के अच्छे पारिवारिक सम्बन्ध हैं और दीया कुमारी उनकी पार्टी की ही विधायक हैं.

अब सुगबुगाहट हो रही है कि क्या दोनों रिश्तों में खटास आ गई है.

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