हैदराबाद: जजों की हड़ताल, क्यों मचा है बवाल?

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बैंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

जब कभी जज विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगे मनवाने के लिए गवर्नर के पास जाते दिखें तो बहुत अचरज होता है.

ये भी अजीब लगता है कि 200 जज, चाहे वो निचली अदालत के ही क्यों न हों, सामूहिक अवकाश पर चले जाएँ.

हैदराबाद में ऐसा हो रहा है. दरअसल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को अलग-अलग राज्य बना दिया गया लेकिन इनका हाई कोर्ट और ज्यूडिशियल सर्विस एक ही है.

इस मुद्दे से जुड़े कुछ अहम सवाल और उनके जवाब जानिए:

जजों ने सड़कों पर प्रदर्शन क्यों किया?

  • मई में 130 न्यायधीशों की नियुक्ति तेलंगाना की अलग अलग अदालतों हुई, ये सभी न्यायधीश आंध्र प्रदेश के हैं. इन नियुक्तियों का निचली अदालत के सदस्यों ने विरोध किया है. उनका कहना है कि ये आंध्र प्रदेश रीऑर्गेनाइज़ेशन एक्ट 2014 का उल्लंघन है. इन 130 न्यायधीशों की नियुक्ति का फैसला इस आधार पर नहीं हुआ कि वो वहां के हैं, बल्कि जिन लोगों ने वहां काम करने की इच्छा जताई, उनकी वहां के लिए नियुक्ति कर दी गई. आंध्र प्रदेश में ख़ाली पद होने के बावजूद उन्हें तेलंगाना के लिए नियुक्त कर दिया गया.

हाई कोर्ट के अलग होने में देर क्यों?

  • तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दो साल पहले अलग हो चुके हैं. नियमों के मुताबिक अगले 10 साल के लिए हैदराबाद दोनों राज्यों की राजधानी है, जिस तरह से चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है. आंध्र प्रदेश ने विजयवाड़ा के पास अमरावती को अपनी जारधानी बनाने का फ़ैसला लिया. सचिवालय और अन्य दफ्तर तो विजयवाड़ा और गुंटूर में स्थानतरित करने का काम उसने शुरू कर दिया है. लेकिन हाई कोर्ट का आधारभूत ढांचा बनाने के मामले में कुछ नहीं हुआ है. नतीजतन दोनों राज्यों के लिए हाई कोर्ट को अलग नहीं किया गया. यदि हाई कोर्ट अलग हो जाता तो निचली अदालत के जजों की नियुक्ति आसान हो जाती.

केंद्र सरकार मुद्दे को हल क्यों नहीं कर रही है?

  • केंद्र के कानून मंत्री सदानंद गौडा ने इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की थी. इस बीच हाई कोर्ट को अलग करने के मुद्दे पर एक पीआईएल दाखिल कर दी गई. क्योंकि मामला कोर्ट में है इसलिए पीआईएल पर फैसला आने का इंतज़ार करना होगा.

निचली अदालत के अधिकारियों के विरोध का राजनीतिक असर क्या होगा?

  • तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मुद्दे पर दिल्ली में धरने पर बैठने की धमकी दी है. केन्द्रीय कानून मंत्री सदानंद गौडा ने इसे लेकर चंद्रशेखर राव की तुलना दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से की है. राव ने विरोध प्रदर्शन और संघर्ष के बाद तेलंगाना राज्य की मांग मनवाई थी और अब भी वो कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा को निशाना बना रहे हैं.

मुद्दे से कौन कौन प्रभावित?

  • जिनके मुकदमें अदालत में चल रहे हैं वो लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. न्यायपालिका के काम रोकने से आम जनता, अमीर-ग़रीब सब पर इसका असर पड़ रहा है.

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