'ताकि कोई माँ हादसे में किसी अपने को न खोए'

    • Author, विकास पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 3 मिनट

यह बीबीसी की ख़ास सीरिज़ "हीरो हिंदुस्तानी" #HeroHindustani #UnsungIndians की चौथी कड़ी है.

राजधानी दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर ग़ाज़ियाबाद की सड़कों पर उन्हें यातायात को संचालित करते हुए देखा जा सकता है. यहाँ के लोगों के बीच वे 'ट्रैफ़िक हीरोइन' के रूप में जानी जाती हैं.

डोरिस फ्रांसिस कोई ट्रैफ़िक पुलिस अधिकारी नहीं है, लेकिन हर रोज वो इस व्यस्त सड़क पर यातायात को नियंत्रित करती हैं.

डोरिस फ्रांसिस लोगों के लिए एक मिसाल हैं, लेकिन उनके इस जुनून के पीछे एक दर्द भरी दास्तां भी है. दरअसल, ये वही जगह है जहाँ करीब छह बरस पहले 2010 में उनकी बेटी निक्की की सड़क हादसे में मौत हो गई थी.

डोरिस फ्रांसिस

आत्मविश्वास से लबरेज फ्रांसिस बड़े आराम से यातायात को नियंत्रित करती हैं. इसी चौराहे पर तैनात पुलिस कांस्टेबल कुमार पाल सिंह ने बीबीसी को बताया, "मैं उनकी कहानी जानता हूं, वो निस्वार्थ भाव से काम करती हैं. मैंने बहुत कम लोग देखे हैं जिनके पास ऐसा साहस होता है. मुझे नहीं पता वह कैसे हर रोज उसी जगह पर आ जाती हैं, जहाँ उन्होंने अपनी बेटी को खोया था."

डोरिस फ्रांसिस को वो दिन आज भी अच्छी तरह से याद है, जब एक तेज़ रफ़्तार कार ने उस ऑटो को ज़ोरदार टक्कर मार दी, जिसमें वो अपने पति और बेटी के साथ सफर कर रही थीं.

डोरिस फ्रांसिस

उन्होंने बीबीसी को बताया, "उसकी मौत हो गई, मैं बच गई. काश उस दिन यातायात का बेहतर संचालन होता."

बेटी की मौत के सदमे से उबरने के बाद डोरिस ने फैसला किया कि वो अपनी ज़िंदगी को उसी पटरी पर वापस लाएंगी, जहाँ पहले थी. डोरिस कहती हैं, "मैं सड़क पर निकल पड़ी और मैंने वहाँ यातायात को नियंत्रित करना शुरू किया."

फ्रांसिस बताती हैं कि शुरू में वहाँ से गुजरते लोगों ने उनका विरोध भी किया, लोग कहते कि उन्हें किसने यातायात नियंत्रित करने की इजाज़त दी है.

लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे. फ्रांसिस कहती हैं, "वहाँ दुर्घटनाएं होनी बंद होने लगीं और लोगों को समझ में आ गया कि ये औरत कोई पागल नहीं है, बल्कि ज़िंदगी बचा रही है."

डोरिस फ्रांसिस

ये समझना मुश्किल नहीं है कि इस चौराहे पर उस वक्त हादसों का जोखिम कितना बढ़ जाता है जब कोई यातायात को नियंत्रित नहीं कर रहा होता.

जब फ्रांसिस वहाँ मौजूद रहती हैं, तो अधिकतर वाहन चालक उनके निर्देशों का पालन करते हैं और यातायात तरीके से चलता हुआ लगता है.

कभी-कभी वो लापरवाह पैदल यात्रियों और चालकों से सख्ती से भी पेश आती हैं और उन्हें डंडा तक दिखा देती हैं.

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डोरिस फ्रांसिस

फ्रांसिस बताती हैं, "मुझे ये शुरू किए हुए छह साल से अधिक हो गए हैं. मेरा मिशन लोगों की ज़िंदगियां बचाना है ताकि कोई मां अपनी बेटी, पति या बेटे को न गंवाए. और मैं यही कर रही हूं. मैं तब तक ये करती रहूँगी जब तक मेरे शरीर में ताक़त रहेगी."

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