'सरबत खालसा' के बाद कई गिरफ़्तारियां

सरबत ख़ालसा
    • Author, रविंदर सिंह रॉबिन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

कट्टरपंथी सिख नेताओं की गिरफ़्तारी के लिए पंजाब पुलिस ने एक बड़ा अभियान चलाया है. 'सरबत ख़ालसा' के सिमरनजीत सिंह मान और भाई मोहकम सिंह की गिरफ़्तारी के एक दिन बाद भी पुलिस की छापेमारी जारी है.

पंजाब पुलिस के कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनज़र ये गिरफ्तारियां की गई हैं.

दरअसल, सिख परंपरा के अनुसार दिवाली के पर्व पर अकाल तख्त के जत्थेदार हरिमंदिर साहिब परिसर से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हैं. आज भी ये संबोधन होगा.

जानकारों के मुताबिक इस कार्यक्रम के दौरान कोई व्यवधान पैदा न हो, इस कारण प्रशासन ने ऐहतियातन ये गिरफ़्तारियां की हैं.

सरबत ख़ालसा

मंगलवार को सरबत खालसा के तले एक बड़ा धार्मिक आयोजन किया गया था जिसके प्रमुख संयोजक सिमरनजीत सिंह मान और मोहकम सिंह थे. इस आयोजन में जत्थेदार अकाल तख़्त को हटाए जाने और अकाल तख्त तक एक जुलूस निकालने का संकल्प लिया गया.

भाई मोहकम सिंह के बेटे सुखदीप सिंह ने बीबीसी से कहा कि उनके पिता को बुधवार तड़के 3 बजे गिरफ्तार किया गया, जबकि वो किसी भी गुनाह में शामिल नहीं थे. सिंह के मुताबिक उनके पिता ने मंगलवार रात को ही प्रशासन को ये जानकारी दे दी थी कि वो मत्था टेकने के लिए स्वर्ण मंदिर जाएंगे.

सरबत ख़ालसा

ख़बरों के अनुसार पुलिस ने हरिंदर सिंह संधू, भाई गुरदीप सिंह भठिंडा, सतनाम सिंह मानावा, भाई बलवंत सिंह गोपाल और भाई अमरीक सिंह को अजनाला के डेरे से गिरफ़्तार किया है.

इससे पहले, सत्ताधारी अकाली दल का विरोध कर रहे सिख नेताओं ने अमृतसर में बुलाए गए "सरबत ख़ालसा" में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा को अकाल तख़्त का जत्थेदार नियुक्त किया. हवारा अभी जेल में हैं.

अकाल तख़्त

अकाल तख़्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है जिसके मुखिया को जत्थेदार कहते हैं. वो अन्य प्रमुख सिख प्रतिनिधियों के साथ धर्म और मर्यादा से जुड़े फ़ैसले लेते हैं जो सभी सिखों पर बाध्य होते हैं.

फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि सिख गुरुद्वारा एक्ट के तहत एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र में इस सरबत ख़ालसा का दख़ल और इसके लिए गए फ़ैसलों को सिख समुदाय अपनी सहमति देगा या नहीं.

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