बिहार चुनाव नतीजों के लिए तैयार हैं बैंडवाले भी

बिहार, चुनाव, बैंड
    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

चुनावों में जीतने वाले प्रत्याशी किसी भी दल के हों वह अक्सर अपनी खुशी ज़ाहिर करने, जश्न मनाने के लिए बैंड-बाजे का सहारा भी लेते हैं.

पटना के सुल्तानगंज इलाके में कई बैंड वाले के आॅफिस हैं, जो चंद घंटे बाद, रविवार को 'अचानक मिलने वाले काम' के लिए तैयार हो रहे हैं.

आज़ादी से भी पुराना बैंड होने का दावा करने वाले पंजाब बैंड के जम्मू खान कहते हैं, ‘‘एडवांस बुकिंग नहीं के बराबर होती है. मतगणना का रुझान मिलने के बाद ही जीतने वाले उम्मीदवार संपर्क करना शुरू करते हैं. ऐसे में हमें बिना बुकिंग के भी अचानक मिलने वाले काम के लिए पूरी तरह तैयार रहना पड़ता है.’’

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जम्मू खान के अनुसार इसके अपवाद भी रहे हैं. वो कहते हैं, ‘‘1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी और 1984 में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को अपनी जीत का इतना यकीन था कि उन्होंने एडवांस बुकिंग करवाई थी.’’

वह बताते हैं कि इस बार भी कुम्हरार विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अकील हैदर के एक सहयोगी ने उनसे तैयार रहने को कहा है.

जीत का जश्न मनाने के लिए जो बैंड पार्टी जाती है उसमें अमूमन 15 से 20 साजिंदे होते हैं. बैंड के साथ एक ट्रॉली ज़रूर होती है जिसमें एक गवैया भी होता है.

महाराजा बैंड के मोहम्मद इकबाल बताते हैं, ‘‘विजय जुलूस होने के कारण बैंड अमूमन पार्टी आॅफिस या फिर जीतने वाले उम्मीदवार के घर पर ही बजता है.’’

बिहार, चुनाव, बैंड

आजकल मतदान पूरा होने के बाद दिखाए जाने वाले एक्जिट पोल के आधार पर भी दल दावे करते हैं. लेकिन क्या उनके आधार पर वह बैंड बुक भी करवाते हैं?

बच्चा बैंड के ताजुद्दीन कहते हैं, ‘‘एक्ज़िट पोल के आधार पर अब तक बुकिंग शुरू नहीं हुई है. मतगणना के रुझान या जीत के बाद ही लोग हमसे संपर्क करते हैं.’’

2010 में कुम्हरार से जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी अरुण कुमार सिन्हा ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए ताजुद्दीन के बच्चा बैंड की ही बुकिंग की थी.

जम्मू खान बताते हैं, ‘‘चुनावी जीत के बाद जैसा मौका और माहौल रहता है, उसमें देशभक्ति के गाने ही ज्यादा बजाए जाते हैं. ऐसे गानों की सूची में ‘ए मेरे वतन के लोगों....’ और ‘सारे जहां से अच्छा...’ जैसे गाने सबसे ऊपर हैं.’’

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मोहम्मद इकबाल के मुताबिक फिल्म अपना देश का गाना ‘सुन चंपा, सुन तारा; कोई जीता, कोई हारा’’ इस मौके पर सबसे ज़्यादा बजाए जाने वाला गाना है.

लेकिन गानों के जिक्र करने के बहाने ही मोहम्मद इकबाल आम आदमी की शिकायत भी सामने रख देते हैं, ‘‘जीतने के बाद नेता का ही गाना बजता है, पब्लिक का गाना तो कोई सुनता ही नहीं है.’’

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