कलबुर्गी को आरएसएस की श्रद्धांजलि!

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यमंडल की बैठक झारखंड की राजधानी रांची में तीन दिनों तक चली.

इसमें देश भर से आए पदाधिकारियों ने भाग लिया. बैठक में आरएएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और संघ में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले भैयाजी जोशी ने भी हिस्सा लिया.

बैठक एक नवंबर की दोपहर को ख़त्म हो गई. इस दौरान पांच ख़ास बातों पर एक नज़र.

1. अयोध्या में बने राम मंदिर

आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संघ अयोध्या में राम मंदिर बनने के मामले पर अडिग है. भैयाजी का कहना है कि इस पर हमारी कोई दूसरी राय नहीं है.

उन्होंने कहा कि केंद्र में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार होने के बावजूद मंदिर निर्माण मे देरी हो रही है और यह सोचना होगा कि वहां शीघ्र मंदिर कैसे बने.

2. जनसंख्या में असमानता पर प्रस्ताव

केंद्रीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने बताया कि देश की जनसंख्या में वृद्धि की दर असमान है. यही हालत रही तो 2050 तक असम और बंगाल में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे.

इस मुद्दे पर कार्यमंडल की बैठक में प्रस्ताव भी लाया गया.

3. संघ आरक्षण का विरोधी नहीं

सुरेश भैयाजी जोशी ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि संघ आरक्षण का विरोधी नहीं है.

उन्होंने कहा, "हमने कभी नहीं कहा कि इसकी समीक्षा कराओ. यह समाज के लिए ज़रूरी है. हम सिर्फ़ धार्मिक आधार पर आरक्षण के ख़िलाफ़ हैं."

4. कलबुर्गी को श्रद्धांजलि

संघ की बैठक के दौरान प्रोफ़ेसर एमएम कलबुर्गी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. प्रोफ़ेसर कलबुर्गी की कुछ दिनों पहले कर्नाटक में हत्या कर दी गई थी.

हालांकि सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि देश में असहिष्णुता के नाम पर पुरस्कार लौटाने वाले लोगों की दुकानदारी बंद हो चुकी है. ये लोग फ्रस्टेटेड हैं.

5. हिंदुओं पर दोषारोपण ठीक नहीं

भैयाजी जोशी ने कहा कि हिंदुओं को हर बात के लिए कठघरे में करने की कोशिश की जा रही है. इसमें कुछ ताक़तें लगी हैं. यह हिंदू समाज के अपमान की बात है. इसे ठीक करने की ज़रुरत है.

हिंदू समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों को समझने और इसे समाज तक पहुंचाने की ज़रुरत है.

6. सरना अलग धर्म नहीं

संघ के सह सरकार्यवाह डा कृष्णगोपाल ने कहा कि सरना धर्म हिंदू धर्म कोड के तहत ही है.

संविधान में स्पष्ट कहा गया है कि जो ईसाई, मुस्लिम, पारसी या यहूदी नहीं हैं, वे सब हिंदू धर्म कोड के तहत आते हैं. इस लिहाज़ से सरना धर्म कोड की ज़रूरत नहीं. इस मामले में कोई विवाद नहीं है.

उल्लेखनीय है कि झारखंड समेत कई राज्यों के आदिवासी अलग सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं.

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