कंडोम नहीं, इलाज नहीं पर पेंशन मिलेगी

    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

छत्तीसगढ़ में सरकार ने एचआईवी और एड्स पीड़ितों के लिए हर महीने पांच सौ रुपए की सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन पीड़ितों की शिकायत है कि वो बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.

सरकारी आंकड़ों की मानें तो आज की तारीख़ में छत्तीसगढ़ में हर दिन कम से कम सात एड्स पीड़ितों की मौत हो रही है.

यहां तक कि राज्य एड्स नियंत्रण समिति में पिछले पांच महीने से कंडोम की आपूर्ति बंद है.

लेकिन राज्य सरकार ने मरीज़ों की मदद के लिए एक अलग ही तरह से मदद करने की मुहिम शुरू की है.

इसके तहत सरकार एचआईवी और एड्स पीड़ितों को हर महीने 500 रुपये की सहायता राशि देगी.

राज्य सरकार ने हाल ही में इस योजना को मंज़ूरी दी है. इसके अलावा राज्य सरकार ने एड्स पीड़ितों को शहरी आवास योजनाओं में आरक्षण देने का निर्णय भी लिया है.

जांच नहीं

एड्स से संक्रमित रायपुर के विपिन कुमार बार-बार आत्महत्या करने की बात करते हैं.

विपिन कहते हैं, "दो साल पहले मुझे पता चला कि मुझे एचआईवी है. मेरे पास नौकरी नहीं है. घर वालों ने घर से बाहर निकाल दिया है."

वो कहते हैं, "एड्स की दवा के लिए मैं सरकारी अस्पताल पर निर्भर हूँ लेकिन यहां मेरी जांच ही नहीं हो पा रही है."

शुरुआती दौर के एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त लोगों के इलाज की व्यवस्था तो राज्य के अलग-अलग 'एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर' में है.

लेकिन दूसरी और तीसरी श्रेणी के मरीज़ों की जांच की सुविधा भी स्थानीय स्तर पर नहीं है.

दूसरे राज्य

छत्तीसगढ़ में दूसरी श्रेणी के मरीज़ों के रक्त के नमूने जांच के लिए अन्य राज्यों में भेजे जाते थे.

लेकिन दो साल पहले राजधानी रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में 'एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट प्लस सेंटर' की स्थापना की गई, जहां दूसरी श्रेणी के मरीज़ों की जांच और उपचार होना था.

लेकिन चिकित्सकों और ज़रूरी जांच उपकरणों के अभाव में यह सेंटर शुरू ही नहीं हो सका.

संकट यह है कि दूसरी और तीसरी श्रेणी में पहुंच चुका कोई एड्स पीड़ित अगर अपनी जांच भी करना चाहे तो इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति से उसे अनिवार्य अनुमति लेनी पड़ेगी.

नहीं मिलती अनुमति

विपिन कहते हैं, "राज्य में दूसरी श्रेणी की जांच के लिए सेंटर बना दिया गया है. इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति एड्स पीड़ितों को कहीं और से जांच के लिए अनिवार्य अनुमति भी नहीं देती. आप भले मर जाएं, किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता."

राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव विकास शील का दावा है कि 'एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर' में एड्स पीड़ितों के उपचार की पूरी सुविधा है.

वे कहते हैं, "दूसरी श्रेणी के एड्स पीड़ितों की स्थिति को लेकर अगर कोई मामला है तो इसकी जांच की जाएगी."

भयावह स्थिति

पिछले कुछ सालों से एचआईवी पीड़ितों के बीच काम करने वाली मितवा नामक ग़ैर-सरकारी संगठन की अध्यक्ष विद्या राजपूत का मानना है कि राज्य में एड्स पीड़ितों का आंकड़ा बढ़ रहा है.

वो इस स्थिति को भयावह मानती हैं. विद्या कहती हैं, "हर साल ढाई हज़ार से अधिक एड्स पीड़ित मौत के मुंह में समा रहे हैं."

उन्होंने बताया, "अगर जांच और इलाज की समुचित व्यवस्था हो तो इनमें से कई की जान बच सकती है."

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>