आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा हो: मांझी

जीतनराम मांझी, प्रमुख, हिंदुस्तानी आवाम पार्टी
    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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बिहार में हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद में कहा था कि हर दस साल पर आरक्षण की समीक्षा होती रहनी चाहिए.

मांझी का मानना है कि एक बार पूरे आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा हो ताकि यह पता चल सके कि यह अपने मक़सद में कामयाब है या नहीं. यदि इसमें बदलाव ज़रूरी है तो वह भी होना चाहिए.

इसके साथ ही मांझी यह भी कहते हैं कि जब तक देश में सामाजिक स्थितियां नहीं बदलती, आरक्षण रहना चाहिए.

'अनुसूचित जातियों पर धब्बा'

नीतीश कुमार के साथ जीतनराम मांझी

‘हम’ के नेता ने बिहार विधानसभा के निवर्तमान स्पीकर उदय नारायण चौधरी को अनुसूचित जातियों पर ‘धब्बा’ क़रार दिया.

उन्होंने कहा कि चौधरी ने स्पीकर पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए आठ विधायकों को निलंबित कर दिया था और ख़ुद उन्हें भी असंबद्ध क़रार दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उनके फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया.

मांझी ने इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज़िम्मेदार ठहराया. उनके मुताबिक़, नीतीश कुमार अनुसूचित जातियों के लोगों का सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ‘रबड़ स्टैंप’ बना कर रखते हैं.

मांझी ने कहा कि वे ख़ुद तीन महीने तक नीतीश के इशारे पर काम करते रहे. उनका दावा है कि उन्होंने बाद में ‘रबड़ स्टैंप’ बनने से इंकार कर दिया और नौ महीने तक अपनी इच्छा से काम किया और पूरे बिहार में इसकी चर्चा है.

पासवान की आलोचना

रामविलास पासवान, लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख

हम के नेता ने एनडीए के अपने सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान की भी आलोचना की.

मांझी के मुताबिक़, "पासवान राजनीति में मेरे वरिष्ठ हैं और बहुत बड़े नेता हैं. पर जिस तरह ताड़ और खजूर का बड़ा पेड़ किसी को छाया नहीं दे सकता, उसका फल बहुत ही दूर होता है. उसी तरह पासवान ने भी दलितों के लिए कुछ नहीं किया."

मांझी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार के दलितों के लिए कुछ करना चाहा, पासवान ने उनका समर्थन नहीं किया.

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