शाही पनीर, रायते को तरसे भारतीय पहलवान

    • Author, नौरिस प्रीतम
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

भारतीय युवाओं के बीच भले ही अमरीकी फ़ास्ट फ़ूड ख़ूब लोकप्रिय हो, लेकिन भारतीय पहलवान अमरीका में होते हुए भी तड़का, शाही पनीर और रायते को नहीं भूल पा रहे हैं.

सोमवार से शुरू होने वाली वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए क़रीब 30 ख़िलाड़ी, कोच और अधिकारियों का दस्ता पिछले 8-9 दिन से अमरीका के लास वेगास आया हुआ है.

हालांकि भारतीय कुश्ती महासंघ ने अमरीकी अधिकारियों को पहलवानों के रहने और खाने के पैसे आते ही जमा करा दिए थे.

लेकिन पहलवानों को अमरीकी खाना रास नहीं आ रहा था.

कुछ दिन तो किसी तरह पहलवानों ने बन, पास्ता, और मेयोनीज में डूबे आलू खाकर काट लिए.

लेकिन उसके बाद तलाश शुरू हुई भारतीय खाने की, जो जाकर रुकी एक भारतीय रेस्त्रां 'इंडियन पैलेस' पर.

ख़ूब हुआ आदर-सत्कार

पहलवानों को और क्या चाहिए था. घर से हज़ारों मील दूर घर जैसा खाना और भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले पहलवानों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन.

सोने पर सुहागा तब हुआ जब रेस्त्रां मालिक अमर सिंह चड्ढा ने रेस्त्रां के साथ-साथ दिल के दरवाज़े भी खोल दिए.

जैसे ही उन्हें मालूम पड़ा कि उनके रेस्त्रां में खाने वाले आम भारतीय नहीं, बल्कि वर्ल्ड और ओलंपिक के मेडलिस्ट और अर्जुन अवॉर्ड जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं तो उन्होंने उनकी ख़ूब ख़ातिरदारी की.

पहले दिन जब महिला पहलवान गीता फोगट वहां पहुँचीं तो उनके साथ फ़ोटो खिंचवाने वालों की लाइन लग गई.

सेल्फ़ी सेशन के बीच गीता ने कहा, "घर से हज़ारों मील दूर किसी बड़ी चैम्पियनशिप से पहले अपने लोगों से इतना सम्मान और प्यार मिलने से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ जाता है."

उसके बाद योगेश्वर दत्त, अमित कुमार, विनेश, बबीता और बजरंग पूनिया सभी ने वहीं खाना शुरू कर दिया.

प्रतियोगिता के लिए ज़रूरी

पूर्व ग्रीको रोमन पहलवान और अर्जुन अवॉर्ड विजेता महाबीर सिंह भारतीय दल में कोच के रूप में लास वेगास आए हुए हैं.

उनका कहना है कि शरीर का वज़न पहलवानी प्रतियोगिता में बड़ा मायने रखता है.

उन्होंने कहा, "अगर बड़ी प्रतियोगिता से पहले पहलवान ऐसा खाना खाए जिसका वो आदी न हो तो उसका वज़न अचानक बढ़ सकता है."

वो कहते हैं, "इसलिए यह बहुत बड़ी बात है कि किसी भारतीय ने विदेश में हमारे खिलाड़ियों का ख़्याल रखा."

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