गोवाः अपनी तक़दीर बुन रहीं लमानी महिलाएं

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं
    • Author, सोनिया फ़िलिंटो
    • पदनाम, फ़ोटोपत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

चमक दमक के अलावा गोवा का एक और पहलू भी है. वह है वहां की झुग्गियां, जहां तक़रीबन 26 हज़ार की आबादी रहती है.

गोवा के चमकदार हॉलीडे ब्रॉशरों में आपको इसकी तस्वीरें देखने को नहीं मिलती है.

गोवा में झुग्गियों में रहने वाली कुल 26 हज़ार की आबादी में 90 फ़ीसदी आबादी मरमुगावो के उपनगर में रहती है.

यहां की महिलाएं अपने हाथों अपनी तक़दीर बुन रही हैं.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

यह तस्वीर गोवा की राजधानी पणजी से 25 किलोमीटर दूर ज़ुआरीनगर इलाक़े में स्थित लमानी चाल की है.

कर्नाटक के लमानी समुदाय के लोग यहां रहते हैं. यहां एक अलिखित नियम चलता है. वह यह है कि दूसरे समुदायों के लोग इस चाल में नहीं आ सकते हैं. घरों में बिजली और पानी के कनेक्शन हैं, लेकिन शौचालय की सुविधा नहीं है.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

यहां अधिकांश लोग पड़ोस के औद्योगिक इलाक़े में नौकरी करते हैं और महिलाएं घर पर रहती हैं.

ख़ुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों के तहत ज़ुआरीनगर की इन महिलाओं को नए हुनर सीखने के लिए बढ़ावा दिया जाता है.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

किरण निकेतन सोशल सेंटर में आने वाली महिलाएं अक्सर अपने बच्चों को भी साथ लाती हैं क्योंकि उनकी देखभाल के लिए घर पर कोई नहीं होता है.

अल शादाई ट्रस्ट में मेंहदी लगाने का कोर्स बहुत लोकप्रिय है.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

उन्नीस बरस की मेनाज़ नाथव और नाज़िमा शेख़ ने 12वीं और दसवीं तक की पढ़ाई की है.

मेंहदी कोर्स पूरा करने के बाद अब वे समारोहों में मेंहदी लगाने का काम कर पैसा कमाती हैं.

मेनाज़ पत्राचार से शिक्षण का कोर्स करना चाहती हैं, जबकि नाज़िमा घर पर ही नर्सरी कक्षा के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

क़रीब 35 साल की सुंदरबाई लमानी ने सिलाई करना सीखा है और वे घर पर ही काम लेकर करती हैं.

चार बच्चों और अपने पति के साथ वो रहती हैं. पति के शराब पीने की आदत के कारण उन्हें घर का ख़र्च पूरा करने के लिए बाहर निकलना पड़ा था. अब वो झुग्गियों और पास के इलाक़ों में महिलाओं को हुनर सीखने के लिए प्रेरित करती हैं.

गोवा में लमानी समुदाय की महिलाएं

सुंदरबाई का दिन बहुत व्यस्त रहता है. सुबह लोगों से मिलने के बाद वो दोपहर में ट्यूशन पढ़ाती हैं और उसके बाद शाम को सिलाई सिखाती हैं.

सरोजा लमानी

सरोजा लमानी (32) कहती हैं कि वो बहुत तेज़ सिलाई करती हैं.

उन्होंने सिलाई का कोर्स किया है और अब वो लमानी चाल में अपने घर पर ही बाहर से ऑर्डर लेकर काम करती हैं.

जब वो साल में एक बार कर्नाटक के बीजापुर में अपने पैतृक घर जाती हैं तो वहां से कपड़े ख़रीदती हैं और गोवा लाती हैं.

उनका सपना अंग्रेज़ी सीखना है.

सरोजा

सरोजा सरकार की मदद से चल रही मोमबत्ती बनाने की एक स्कीम से जुड़ी हैं.

लेकिन यह उद्यम बहुत सफल नहीं हो पाया, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि उत्पाद कहां बेचना है.

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