जम्मू कश्मीरः सरकार और शिक्षकों में ठनी

कश्मीर शिक्षक
    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में सरकार और हज़ारों शिक्षकों के बीच ठन गई है.

सरकार ने रहबर तालीम स्कीम के तहत भर्ती हुए करीब 65,000 शिक्षकों के नए सिरे से स्क्रीनिंग टेस्ट के आदेश दिए हैं.

टीचर्स फोरम ने 5 और 6 अगस्त को राज्य में हड़ताल का ऐलान किया है.

वर्ष 2000 से राज्य में रहबर तालीम स्कीम के तहत भर्तियां शुरू हुईं थीं.

इस स्कीम के तहत भर्ती होने वाले शिक्षकों को पांच वर्ष तक 1500 और 3,000 रुपए की तनख़्वाह पर नौकरी करने के बाद उनकी नौकरी पक्की होती है.

चुनौती

कश्मीर स्कूल
इमेज कैप्शन, कश्मीर घाटी में एक स्कूल

रहबर तालीम शिक्षकों की परीक्षा और डिग्रियों की जाँच का फैसला उस समय लिया गया जब इसी वर्ष मई के महीने में जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट में रहबर तालीम के तहत भर्ती हुए एक शिक्षक को चुनौती दी गई थी.

कोर्ट से कहा गया था कि जिस शिक्षक को नौकरी दी गई है उसकी परीक्षा ली जाए.

हाई कोर्ट ने इस बात का सख़्त नोटिस लिया और शिक्षक को खुली अदालत में गाय पर निबंध लिखने के लिए कहा गया जिसमें वह फेल हो गया.

इसके बाद कोर्ट ने रहबर तालीम स्कीम के तहत भर्ती किए गए सभी शिक्षकों की डिग्रियों की जाँच और स्क्रीनिंग टेस्ट के आदेश दिए.

जावेद अहमद परे रहबर तालीम शिक्षक के तौर पर पिछले पांच वर्ष से काम कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में कहा कि सरकार का ये क़दम किसी तरह से भी दुरुस्त नहीं है.

उन्होंने कहा,"क्या ये मुमकिन है कि जो शिक्षक पिछले पांच वर्ष से प्राइमरी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहा है, वह इस समय किसी परीक्षा के लिए तैयार होगा? अगर किसी कलेक्टर को, जो पिछले दस वर्षों से नौकरी कर रहा है, स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए कहा जाए तो क्या वह उसमें पास हो जाएगा? हम स्क्रीनिंग टेस्ट से डरते नहीं हैं बल्कि ये तो हमारे साथ मज़ाक़ है. "

अफ़सोसनाक फ़ैसला

कशमीर शिक्षक

टीचर्ज़ जॉइंट एक्शन कमेटी, कश्मीर के प्रमुख क़यूम वाणी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि सरकार का ये फैसला अफ़सोसनाक है जिसका विऱोध किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "हमारी समझ में ये बात नहीं आ रही है कि सरकार के इस फैसले के पीछे कौन सी अक़्ल है? अगर किसी के पास नक़ली डिग्री है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए. सरकार के इस क़दम से एक शिक्षक ज़हनी मरीज़ बन जाएगा. अगर सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेगी तो हम राज्य भर में सख्त आंदोलन चलाएंगे."

एक नीति की ज़रूरत

कशमीर

कश्मीर के जाने माने शिक्षाविद विश्लेषक, प्रोफेसर गुलाम नबी मदहोश रहबर तालीम के हज़ारों शिक्षकों की स्क्रीनिंग टेस्ट ज़लील करने के बराबर मानते हैं.

उनका कहना है,"पहली बात तो ये है कि सरकार के पास कोई पॉलिसी ही नहीं है. शिक्षा विभाग में जो समस्या है उस के लिए पॉलिसी बनाने की ज़रूरत है. सरकार समस्या को खत्म करने के लिए शार्टकट रास्ता ढूंढ़ती है, जैसे स्क्रीनिंग टेस्ट की अब बात हो रही है. ऐसा करना मेरे नज़दीक ज़लील करने के बराबर है."

राज्ये के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर कहते हैं कि वे अदालत के आदेश पर अमल कर रहे हैं और इसका पालन करना होगा.

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