योग दिवस को लेकर तनाव क्यों?

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    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराने में कामयाबी तो पाई, साथ ही इस मौक़े पर दिल्ली में एक विशाल आयोजन करने की घोषणा भी कर डाली.

नरेंद्र मोदी सरकार रविवार को राजधानी में हज़ारों लोगों से योग कराने की तैयारियाँ कर रही है.

मोदी योग के समर्थक हैं और उन्होंने एक जीवनीकार से कहा कि वो सुबह में उठकर एक घंटे योग करने की कोशिश करते हैं.

रविवार का यह आयोजन आख़िर भारत के बारे में क्या बताता है?

विश्व रिकॉर्ड से प्यार

योग दिवस

सरकार की योजना है कि दिल्ली के राजपथ पर रविवार की सुबह 35 मिनट तक 35,000 लोग गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए योग करें.

गिनीज़ के अधिकारियों को इस आयोजन के लिए आमंत्रित किया गया है ताकि वे एक ही जगह पर सबसे बड़ी योग कक्षा का रिकॉर्ड बनते देखें.

पहले से ही भारतीयों के नाम योग से जुड़े कई गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं, मसलन सबसे बड़ी योग कक्षा, लंबी योग श्रृंखला, सबसे लंबे समय तक योग, विभिन्न जगहों पर लंबे समय तक चलने वाली योग कक्षा.

योग दिवस

मोदी के ही आग्रह पर भारत की नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) रविवार को एक नया रिकॉर्ड क़ायम करना चाहती है.

एनसीसी के मुताबिक़, "किसी वर्दी वाले संगठन का एक ही दिन भारत की अलग-अलग जगहों से एक साथ योग का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा."

एनसीसी के 10 लाख कैडेट 1,900 जगहों पर एक साथ योग करेंगे.

क्या है हक़ीक़त?

योग

भारतीयों ने वर्ष 2013 में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में क़रीब 3,000 रिकॉर्ड के लिए आवेदन दिए और इस लिहाज़ से अमरीका और ब्रिटेन के बाद भारत इनसे थोड़ा ही पीछे है.

पिछले पांच सालों में रिकॉर्ड बनाने वाले भारतीयों की तादाद हैरतअंगेज़ तरीके से 250 फ़ीसदी तक बढ़ी है.

भारत दुनिया में दूसरा सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है. इससे भारत को सबसे अधिक रक्तदान करने के अभियान में और हाथ मिलाने वाले लोगों की ज़्यादा तादाद का रिकॉर्ड बनाने में मदद मिली है.

लेखक सामंत सुब्रमण्यम इसे 'रिकॉर्ड क़ायम करने की धुन' कहते हैं.

योग

अगर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड संभव नहीं है तब भी चिंता की कोई बात नहीं है.

हमारी उपलब्धियों का ख़्याल रखने के लिए देसी 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' हैं.

लेकिन साफ़ तौर पर मोदी ने अपना लक्ष्य ऊंचा रखा है.

शहरी भारतीय फिट नहीं

असल में रविवार का आयोजन याद दिलाता है कि शहरी भारतीयों को स्वस्थ रहने की ज़रूरत है.

डॉक्टरों का कहना है कि भारत के शहरों में डायबिटीज़ और दिल की बीमारी बढ़ रही है.

एक नए शोध के मुताबिक़, साल 1990 और 2013 के बीच भारत में डायबिटीज़ की दर 123 फीसदी तक बढ़ी है, जबकि दुनिया में यह दर 45 फ़ीसदी है.

चार में से एक भारतीय की मौत दिल की बीमारी से होती है. लोगों में मोटापा बढ़ रहा है.

मध्य वर्ग का दायरा और उनकी हैसियत बढ़ रही है, ऐसे में शहरी क्षेत्रों में ज़्यादातर लोगों का काम और ज़िंदगी एक ही ढर्रे में तब्दील हो रही है जहां टहलने की रवायत भी नहीं है.

योग

जंक फूड और चिकनाई वाली खाने-पीने की चीज़ों से भी समस्या बढ़ रही है.

अध्यात्म जुड़ा हो न हो, अगर मोदी के इस क़दम से ज़्यादा भारतीय योग करने लगते हैं तो भी ये अपना मकसद हासिल कर लेगा.

राजनीति का योग

जैसे ही मोदी ने अपनी व्यापक योग योजना को सामने रखा उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने इस पर ख़ूब शोर मचाया.

दलित नेता मायावती ने कहा कि मोदी की पार्टी और उनके कट्टरपंथी सहयोगी योग का इस्तेमाल "सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने" के लिए कर रहे हैं.

योग

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नेता सरकार के इरादे से सहज नहीं हैं और वे मोदी के योग के सरकारी प्रचार को हिंदुत्व को बढ़ावा देने जैसे क़दमों से जोड़ कर देखते हैं.

भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ के बयान ने इस विवाद में और घी डालने का काम किया. उन्होंने कहा कि जो लोग सूर्य नमस्कार का विरोध करते हैं उन्हें "समुद्र में डूब जाना चाहिए".

हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनकी इस टिप्पणी को दबाने की कोशिश की.

सरकार ने भी रविवार के आयोजन से सूर्य नमस्कार व्यायाम को अलग करने का फ़ैसला किया है और वह इसे धर्मनिरपेक्ष आयोजन के तौर पर दिखाना चाहती है.

राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी का कहना है कि रविवार का आयोजन प्रधानमंत्री की कामयाबी ही है, क्योंकि इससे उनकी छवि बेहतर होगी और कट्टरपंथी भी ख़ुश होंगे.

पाकिस्तान योग गुरू

हालांकि आलोचकों का कहना है कि मोदी ने यह क़दम ऐसे वक़्त पर उठाया है जब भारत के अल्पसंख्यकों के बीच चिंता बढ़ रही है.

कई लोग उन्हें संदेह की नज़रों से देख रहे हैं कि उनकी पार्टी भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की कोशिश कर रही है.

विश्लेषक एजाज़ अशरफ़ कहते हैं कि मोदी का यह योग उत्सव "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, व्यवसायीकरण और गूढ़ दबाव का एक मिश्रण है".

हालांकि इतिहासकार दिलीप सिमियॉन योग के बारे में भ्रामक बातों की आलोचना करते हैं. वो कहते हैं कि भारतीय हिंदू राष्ट्रवादियों को ख़ुश करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत के लिए योग सीखेंगे.

सांस्कृतिक चिंता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य का कहना है, "योग प्राचीन भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है."

योग

उनका कहना है कि व्यापक स्तर पर योग करके हम अपने गौरवपूर्ण अतीत को स्थापित कर रहे हैं.

हालांकि कुछ लोगों की यह भी चिंता है कि भारत ने पश्चिमी देशों के हाथों 'ब्रांड योगा' से अपना नियंत्रण खो दिया है और योग अब दुनिया भर में कई अरबों डॉलर का उद्योग बन चुका है.

हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत कभी भी योग पर "बौद्धिक संपदा अधिकार का ठप्पा लगाना पसंद नहीं करेगा".

योग एक धार्मिक गतिविधि है?

योग पाकिस्तान

<bold>बीबीसी मैगजीन</bold> के <link type="page"><caption> एक लेख में</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/magazine-25006926" platform="highweb"/></link> इस पर रोशनी डाली गई है.

हालांकि भारत में स्वराज्य जैसी पत्रिकाएं ये सवाल पूछ रही हैं कि योग को उसकी जड़ों से क्यों अलग किया जाए.

"द हिंदूजः ऐन ऑल्टरनेटिव हिस्ट्री" किताब की लेखक वेंडी डॉनिजर कहती हैं कि कई हिंदू अपनी छवि को लेकर चिंतित रहते हैं और उन्हें इस बात का डर है कि पश्चिमी जगत में उनके धर्म को काफ़ी रुढ़िवादी नज़रिए से देखा जाता है.

डॉनिजर कहती हैं कि इससे योग का जटिल और विवास्पद इतिहास अनदेखा रह जाता है.

इस बात को लेकर कम से कम पाँच परस्पर विरोधी दावे हैं कि योग कब शुरू हुआ जिसमें मार्क सिंगलटन का ये उत्तेजक कथन भी है कि आधुनिक योग की जड़ें प्राचीन भारत में नहीं हैं.

सिंगलटन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय एंगलोफ़ोन योग ब्रितानी बॉडी बिल्डिंग, अमरीकी आत्मवाद, ईसाई विज्ञान, नैचुरोपैथी, स्वीडन की जिमनास्टिक और वाईएमसीए का एक दिलचस्प मिश्रण है.

योग

अंत में, जैसा कि डॉनिगर कहती हैं, "कुछ लोगों के लिए योग धार्मिक ध्यान है तो कुछ के लिए व्यायाम और कुछ के लिए दोनों ही."

दिलचस्पी

भारत में हास्य की कमी नहीं है और रविवार को होने वाला आयोजन भी कोई अपवाद नहीं है.

समाजशास्त्री शिव विश्वनाथन ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "वे एक नई तरह की सांस्कृतिक क्रांति लाना चाहते हैं. मुझे इसका हास्य वाला हिस्सा पसंद है- मोटे पुलिस वाले, नौकरशाह व्यायाम करते हुए. ये भारत है, जो मिल्कशेक पीकर और हैमबर्गर खाकर मोटा हो रहा है. मोदी कई रूपों में भारत के बेन्यामिन फ़्रेंकलिन हैं."

योग

यहां तक कि भारत के गृह मंत्री भी अपने दफ़्तर में अधिकारियों को काम के बाद योग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. अधिकारी योग करते हैं और वो उन पर नज़र रखते हैं.

आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से कहा कि योग से हिंसक अपराधों में कमी आएगी और नौकरशाह बेहतर बनेंगे. उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर अफ़सरों के काम करने के तरीक़े में बदलाव आएगा. जब वे पतले होंगे तो उनकी सारी ऊर्जा सिर्फ़ काम में ही लगेगी."

पिछले हफ़्ते चर्चित योग गुरू बाबा रामदेव ने दिल्ली के एक स्टेडियम में योग का अभ्यास कर रहे लोगों से कहा कि योग के एक आसन से 'दुनिया गैस की समस्या से' मुक्त हो जाएगी.

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