अध्यात्म का अहसास कराती ईरन्ना की कला

    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

गोलप्पा रुकुमपुर ईरन्ना (जीआर ईरन्ना) का नाम भारत के चुनिंदा कंटेम्पररी आर्टिस्ट में लिया जाता है.

1970 में कर्नाटक के बीजापुर ज़िले के सिंदगी गांव में जन्मा यह कलाकार बचपन से ही कला को समर्पित था.

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जीआर ईरन्ना
इमेज कैप्शन, जीआर ईरन्ना बचपन से ही पेंटर बनना चाहते थे.

जहां और बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर बनने की तैयारी में जुटे थे, गोलप्पा सुन्दर कृतियां गढ़ रहे थे, चित्र बना रहा थे.

"आई लॉस्ट द टेस्ट ऑफ़ गॉड "
इमेज कैप्शन, जी आर ईरन्ना का स्कल्पचर "आई लॉस्ट द टेस्ट ऑफ़ गॉड " .

बचपन में पारंपरिक ढंग से गुरुकुल में शिक्षा लेने की वजह से ईरन्ना अपने को साधक की तरह देखते हैं.

बचपन के उस दौर का असर उनके चित्रों व कलाकृतियों में देखा जा सकता है.

सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं से जूझ रहा आदमी या उससे प्रभावित समाज कहीं न कहीं ईरन्ना की कला यात्रा को प्रभावित करता है.

कई बार रंग अपने तरीके से खुद को बरतता है, अपनी पेंटिंग में रंग भरते हुए कलाकार.
इमेज कैप्शन, कई बार रंग अपने तरीके से खुद को बरतता है, अपनी पेंटिंग में रंग भरते हुए कलाकार.

2010 में ईरन्ना के फ़ाइबर ग्लास, आर्टिफ़िशियल फर, लोहे, लकड़ी और कपड़े से बने स्कल्पचर "वुंडेड टूल्स" को 'एशिया पेसिफिक ब्रिउअरिस फाउंडेशन सिग्नेचर' अवॉर्ड मिला.

" वुंडेड टूल्स " स्कल्पचर के साथ ईरन्ना.
इमेज कैप्शन, " वुंडेड टूल्स " स्कल्पचर के साथ ईरन्ना.

इस कलाकृति में एक गधा हवा में ऊपर जा रहा है, उस पर अब भी औजारों का बोझ लदा हुआ है.

ईरन्ना को फोटोग्राफ़ी का भी काफी शौक है,और अपनी यात्राओं के दौरान उन्हें फ़ोटो खींचना पसंद है.
इमेज कैप्शन, ईरन्ना को फोटोग्राफ़ी का भी काफी शौक है,और अपनी यात्राओं के दौरान उन्हें फ़ोटो खींचना पसंद है.

ईरन्ना का मानना है, उनका जन्म कुछ रचने के लिए ही हुआ है.

अपने गांव के परिवेश में बड़े होते हुए पेड़ों पर चढ़ना, अपने खिलौने खुद बनाना और दूसरे दिन उसे तोड़ देना बचपन की इन्हीं यादों से ईरन्ना की कला प्रभावित है.

दिल्ली के एशियाड विलेज में उनके स्टूडियो का नज़ारा भी कुछ उनके व्यक्तित्व की तरह ही है.

स्टूडियो का किसी भी कलाकार की कला यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान होता है.
इमेज कैप्शन, स्टूडियो का किसी भी कलाकार की कला यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान होता है.

साफ-सुथरे, सलीकेदार और रोशनी से भरे उनके स्टूडियो में कदम रखते ही आपको अहसास होगा कि आप किसी आध्यात्मिक यात्रा पर हैं.

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