जो ब्रितानी संसद की छत पर जमे रहे रात भर

प्रकाशित

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस ने भारत में अपने पंजीकरण पर 180 दिनों के निलंबन का पुरज़ोर विरोध किया है और अपने कर्मचारियों से कहा है कि तालाबंदी से पहले लड़ाई के लिए सिर्फ एक महीना बचा है.

सरकार ने भारत में ग्रीनपीस के बैंक खातों को भी फ्रीज़ कर दिया है. इस पर ग्रीनपीस इंडिया ने कहा है कि उसके पास अपने कर्मचारियों के वेतन और अन्य ख़र्चों के लिए एक महीने भर का पैसा बचा है.

ग्रीनपीस इंडिया ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि वो भारत सरकार के फ़ैसले को क़ानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रहा है.

प्रिया पिल्लई

इससे पहले मोदी सरकार ने ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई को विदेश जाने से रोक दिया था.

उन पर भारत के हितों के ख़िलाफ़ काम करने के आरोप थे. हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई थी.

क्या है ग्रीसपीस

ग्रीनपीस एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) है. इसकी शुरूआत वर्ष 1971 में हुई थी. आज ये एनजीओ 40 से अधिक देशों में सक्रिय है.

ग्रीनपीस का दावा है कि वो धरती को बचाने और शांति को बढ़ावा देने के लिए काम करता है.

ग्रीनपीस

ग्रीनपीस धरती को हराभरा बनाने को अपना लक्ष्य बताता है ताकि पृथ्वी पर कुदरती विविधता को बचाया जा सके.

ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

ग्रीनपीस कार्यकर्ता दुनियाभर में अपने विरोध प्रदर्शन के तरीक़ों के लिए भी जाना जाता है.

पिछले महीने ही प्रशांत महासागर में तेल के लिए खुदाई के विरोध में ग्रीनपीस के कार्यकर्ता मशीनों पर चढ़ गए थे.

इससे पहले 2009 में ग्रीनपीस के कार्यकर्ता जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अपने प्रदर्शन के दौरान ब्रितानी संसद की छत पर चढ़ गए थे और रात भर वहीं जमे रहे.

<bold>(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>