भारत रंग महोत्सव में बिखरे कला के रंग

भारत रंग महोत्सव

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    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित 17वां भारत रंग महोत्सव(भारंगम) चल रहा है. भारत रंग महोत्सव में देश के लगभग हर राज्य व 12 देशों के नाटकों को शामिल किया गया है. एक फ़रवरी से शुरू हुआ महोत्सव 18 फ़रवरी, 2015 तक चलेगा.

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'भारंगम' में नाटकों के अलावा कला की अन्य विधाओं से भी रूबरू हुआ जा सकता है. मशहूर कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज, प्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय, वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा सोबती का व्याख्यान और दर्शकों से संवाद भी आयोजित किया जाएगा.

इस बार भारंगम में महिला प्रधान नाटक व मोनो एक्ट (एकल नाटक) भी दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं. इसके अलावा थिएटर बाजार भी दर्शकों को लुभा रहा है. यहां थिएटर से जुड़ी लाइटिंग, मेकअप, पपेट, मास्क, कॉस्टूयम व किताबें देखी जा सकती हैं.

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टेलीफोन के अविष्कार के पहले सन्देश भेजने के लिए कबूतरों का प्रयोग किया जाता था. निर्देशक चोइती घोष के मोनो एक्ट 'अ बर्ड्स आई व्यू ' में मीलू नाम के कबूतर को जन्म से संदेश भेजने के लिए प्रशिक्षित करने और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उसके संदेश पहुंचाने की यात्रा को ऑब्जेक्ट थिएटर के द्वारा दर्शाया गया.

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हैप्पी रणजीत का लिखित एवं निर्देशित नाटक 'अ स्ट्रेट प्रपोज़ल' भारत में एलजीबीटी से जुड़ी समस्याओं को दर्शाता है. नाटक एक समलैंगिक व्यक्ति मितेश के बारे में है, जो अपने समलैंगिक रिश्ते की समाज में स्वीकार्यता चाहता है और आत्मसम्मान के साथ जीना चाहता है.

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महान दार्शनिक सुकरात की सत्य के लिए तड़प और लोकतंत्र में उसकी आस्था पर आधारित मैक्सवेल एंडरसन का नाटक 'बेयर फूट इन एथेंस' मौजूदा समाज में भी प्रासंगिक है.

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'बेयर फूट इन एथेंस' के निर्देशक राज बिसारिया अत्यंत सम्मानित रंग निर्देशक, अभिनेता और शिक्षाविद हैं.

हेमा सिंह के निर्देशन में जॉन स्टीनबैक के उपन्यास पर आधारित नाटक 'ऑफ़ माइस एंड मेन ' का मंचन हुआ. बरेली के 'रंग विनायक मंडल' की यह 'भारंगम' में पहली प्रस्तुति थी.

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'ऑफ़ माइस एंड मेन' अक्तूबर, 1929 से द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत तक 12 साल मंदी से गुजर रहे अमेरिका में रह रहे दो दोस्तों की कहानी है. दोनों दोस्त कैसे अपने सपने के सच होने के इंतजार में काम की तलाश में भटकते हुए एक दूसरे का सहारा बनते हैं, इसे नाटक में बहुत रोचक ढंग से पेश किया गया है.

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फ्रांस की मार्सिया बार्सेलोस ने 'ले चैन्त्स दे इ उमई' संगीतमय नाटक पेश किया. यह नाटक संगीत, प्रकाश, वीडियो व मल्टीमीडिया के रूप में पांच हिस्सों में बंटा हुआ था. मार्सिया ने नाटक का समापन तुलसीदास के पद 'श्री राम चन्द्र कृपालु भजमन' से किया .

तीजन बाई, भारत रंग महोत्सव

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विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई ने महाभारत की कथा में से 'दुस्शासन वध' को पंडवानी शैली में पेश किया. छत्तीसगढ़ की रहने वाली तीजन बाई 13 वर्ष की आयु से पंडवानी गाती आ रही हैं. पंडवानी मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में खेली जानेवाली लोकगाथा गायन शैली है.

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