तस्वीरेंः असम में हिंसा के बाद का मंज़र

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में मंगलवार को बोडो चरमपंथियों के आदिवासियों पर हुए हमलों और जवाबी हिंसा में मरने वालों की कम से कम 76 हो चुकी है.

पुलिस ने हमलों के लिए नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड(एनडीएफबी) को ज़िम्मेदार ठहराया है.

हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ है. आम लोगों ने चर्च और स्कूल की इमारतों में पनाह ले रखी है.

एनडीएफबी बोडो समुदाय के लिए असम में स्वतंत्र होमलैंड की मांग करता है. मंगलवार को हुए हमलों में ग़ैर-बोडो, खासकर आदिवासियों को निशाना बनाया गया.

बताया जा रहा है कि असम के सोनितपुर और कोकराझार ज़िले में हए हमलों में महिलाएँ और बच्चे विशेषकर शिकार हुए हैं. मारे और घायल लोगों में से ज़्यादातर वो आदिवासी हैं जो स्थानीय चाय के बागानों में काम करते हैं. घटना के बाद बहुत से आदिवासी अपना घरबार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों के लिए जा रहे हैं.

क्रोधित आदिवासियों ने हमलों के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया. बुधवार को पुलिस ने सोनितपुर में एक पुलिस थाने को घेरने वाले आदिवासियों के एक समूह पर गोली चलाई थी जिससे तीन आदिवासियों की मौत हो गई.

सोनितपुर के एक स्कूल में क़रीब 200 आदिवासियों ने शरण ले रखी है.

हमले में बच गए गाँववालों ने बताया कि हथियारबंद विद्रोही पैदल ही आए और उनके घरों के दरवाज़ों को ज़बरदस्ती खोलकर गोलियाँ चलाने लगे. कुछ गाँववालों को उनके घरों में बाहर निकालकर गोली मारी गई.

सोनितपुर ज़िले के समुकजुली गाँव स्थित एक चर्च में क़रीब 100 लोगों ने पनाह ले रखी है. इनमें ज़्यादातर औरतें और बच्चे हैं. सोनितपुर में कम से कम 37 लोग मारे गए हैं जिनमें 10 महिलाएँ थीं.

बोडो लोगों पर हुए जवाबी हमलों के बाद से हिंसा के बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है. इलाक़े में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य बलों की तैनाती की गई है.

ख़बरों के अनुसार कारीगाँव नामक गाँव में आदिवासियों ने कुछ बोडो लोगों की हत्या कर दी है. कुछ बोडो लोगों के घरों पर भी हमले भी हुए हैं.

पिछले कुछ सालों में असम में नस्ली हिंसा की कई घटनाएँ हो चुकी हैं.

राज्य में कई विद्रोही समूह भारत की केंद्रीय सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं. ये समूह अपने समुदाय के लिए स्वायत्ता और स्वतंत्रत होमलैंड की माँग करते हैं.

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