जीसीएल में भी दिखेगा क्रिकेट का दम

ग्रामीण क्रिकेट लीग, लखनऊ
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज़ पर लखनऊ में ग्रामीण लीग क्रिकेट टूर्नामेंट (जीसीएल) खेला जा रहा है.

इसकी विशेषता ये है कि इसमें भाग लेने वाली सभी टीम बक्शी-का-तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के आसपास के गांवों से जुड़ी हैं.

चार दिवसीय, टेनिस की गेंद से खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में बीकेटी रेड (सुपरकिंग्स), बीकेटी ब्लू (मामपुर), भवानीपुर गांव की भवानी टाइगर्स, अर्जुनपुर गांव का अर्जुनपुर क्रिकेट क्लब हिस्सा ले रहे हैं.

अतुल चंद्रा की रिपोर्ट

इन टीमों के खिलाड़ियों में से कई नंगे पैर खेलते हैं और कई चप्पल पहन कर.

ग्रामीण क्रिकेट लीग, लखनऊ

इनके पास पहनने के लिए कोई विशेष ड्रेस नहीं है. जिसके पास जैसे कपड़े हैं वो उसी में आकर बक्शी-का-तालाब इंटरमीडिएट कॉलेज के ऊबड़-खाबड़ मैदान की पिच पर अपने खेल का हुनर दिखाता हैं.

अब्दुल हसीब, जो पंचायत भवन की ओर से खेलते हैं, कहते हैं कि वे दूध बेचते हैं और क्रिकेट का शौक़ उनको बचपन से है.

एक रोमांचक मैच जीतने से उत्साहित आलराउंडर हसीब को इस बात की फिक्र नहीं है कि वे किस वेशभूषा में खेलने आ गए .

सही दिशा

ग्रामीण क्रिकेट लीग, लखनऊ

सभी खिलाड़ी गरीब हैं और ज़्यादातर खेती-किसानी से जुड़े हैं.

अभी ये टूर्नामेंट बक्शी-का-तालाब में खेला जा रहा है. इसके बाद लखनऊ के ही मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, सरोजिनीनगर और मलिहाबाद क्षेत्रों के गाँवों की टीमें आपस में भिड़ेंगी. हर क्षेत्र की विजेता टीमों के बीच फिर चैंपियनशिप के खिताब के लिए मुक़ाबला होगा.

इस ग्रामीण प्रीमियर लीग टूर्नामेंट को शुरू करने का श्रेय आईआईएम-कोलकाता से मार्केटिंग में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा किए हुए अनुराग सिंह भदौरिया को जाता है.

उनका कहना है,"हमारा उद्देश्य गाँव के युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना है. इसके लिए हमें क्रिकेट प्रतियोगिता सबसे सही लगी. नहीं तो इनमे से बहुत लड़के दिनभर ताश खेल कर अपना समय बर्बाद करते रहते."

हौसला

ग्रामीण क्रिकेट लीग, लखनऊ

अनुराग कहते हैं कि अख़बारों में अगर इनकी फोटो छप जाएगी तो उसी से इनको काफी प्रोत्साहन मिलेगा..

अनुराग के पास इस टूर्नामेंट का कोई बिज़नेस प्रारूप नहीं है.

उन्होंने बताया,"हमने उस नज़रिये से इसे शुरू नहीं किया हैं. हमारा इरादा सिर्फ गरीब ग्रामीण युवकों की ऊर्जा को सही दिशा देना है.”

अब अनुराग इसको राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट बनाने का ख़्वाब देख रहे हैं.

वे कहते हैं,"दिसंबर के अंत या जनवरी में हम पश्चिम बंगाल के वीरभूम में ऐसा ही टूर्नामेंट कराएंगे. वहां भी बहुत गरीबी है लेकिन गज़ब का टैलेंट है."

पिछले वर्ष देसी आईपीएल के नाम से खेले गए इसी टूर्नामेंट से निकले अभिषेक को उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम में जगह मिलने से इन ग्रामीण युवकों का हौसला और बढ़ गया है.

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