अभद्र टिप्पणी के लिए ट्रेनी जज बर्ख़ास्त

इलाहाबाद हाई कोर्ट
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

इलाहाबाद हाई कोर्ट की संस्तुति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 प्रशिक्षु जजों को बर्ख़ास्त कर दिया है.

ये कार्रवाई 7 सितंबर को शराब पी कर हंगामा करने और नशे में एक साथी महिला जज के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में हुई है.

ये जज अब बर्ख़ास्तगी का आदेश मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

ये ट्रेनी जज 2012 बैच के हैं.

''नहीं मिला बचाव का मौका''

यौन उत्पीड़न

बीबीसी से बातचीत में एक बर्ख़ास्त प्रशिक्षु जज ने बताया कि ना तो उनके ख़िलाफ़ आरोप तय किया गया और ना अपना बचाव करने का मौक़ा दिया गया.

उन्होंने कहा, "इतने लोगों को मारने वाले क़साब को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था. यह निर्णय नेचुरल जस्टिस के नियमों के विरुद्ध है."

इस घटना के लिए जजों ने लिखित माफ़ीनामा दिया था और त्रिपाठी का मानना है कि उनका अपराध इतना बड़ा नहीं था कि उन्हें बर्ख़ास्त किया जाए.

बर्ख़ास्त जज का कहना है कि रेस्टोरेंट में पार्टी के दौरान 16 लोग थे जिनमें से 11 बर्ख़ास्त कर दिए गए जबकि पांच के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

अपने पर लगे आरोपों का अध्ययन करने के बाद ये जज सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं.

<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href=" https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>