जात ही पूछो दिवंगत की

जयपुर का श्मशान घाट
    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

ब्राह्मण स्वर्णकार समाज मोक्षधाम, जैन समाज स्वर्गाश्रम, माली समाज बैकुंठधाम, लोधी समाज श्मशान ...

यह दृश्य है राजस्थान की राजधानी जयपुर के घाटगेट स्थित मोक्षधाम का. शहर के कुछ अन्य मोक्षधामों में भी हर जाति का अपना अलग-अलग श्मशान है, अपनी छतरियां हैं, बरामदे हैं.

क्या श्मशान स्थलों को जाति बंधन में बांधना सही है? जयपुर के रामचंद्र मछ्वाल ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की थी.

राजस्थान हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जयपुर नगर निगम को हाल ही में शहर के सभी मोक्षधामों को तुरंत जाति बंधनों से मुक्त कर रिपोर्ट दाख़िल करने का आदेश दिया है.

पढ़ें पूरी रिपोर्ट

याचिकाकर्ता मछवाल ने बीबीसी को बताया कि श्मशान स्थलों का रखरखाव नगर निगम करता है.

जयपुर का श्मशान घाट

शहर के चाँदपोल, घाटगेट और मानसरोवर आदि स्थानों के प्रमुख मोक्षधाम जातियों के आधार पर बंटे हुए हैं.

अलग जाति का अलग श्मशान

मुख्य न्यायाधीश सुनील अम्बवानी और न्यायाधीश वीएस सिराधना की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद कहा कि श्मशान में बिना किसी भेदभाव के सभी जातियों को अंतिम संस्कार करने का समान अधिकार है.

जयपुर के श्मशान घाट

अगर किसी जाति विशेष के श्मशान घाट में किसी अन्य वर्ग या जाति के लोगों को दाह-संस्कार न करने दिया जाए तो ये संविधान का उल्लंघन है.

जयपुर शहर में घाटगेट क्षेत्र में विभिन्न जातियों के क़रीब 100 और अन्य इलाक़ों में 120 से ज़्यादा श्मशान घाट हैं. हालांकि नगर निगम में रजिस्टर्ड श्मशान स्थलों की संख्या काफ़ी कम है.

78 वर्षीय नरसिंह एक मोक्षधाम में कोई 45 वर्ष से काम कर रहे हैं. वे कहते हैं कि “वैसे एक जाति के श्मशान में दूसरी जाति के अंतिम संस्कार की कोई मनाही नहीं है, पर सभी अपनी जाति के श्मशान में ही दाह संस्कार करना पसंद करते हैं.”

विभिन्न समाजों और संस्थाओं ने यहाँ सुविधाओं का निर्माण भी करवाया है.

यहां जातिबंधन नहीं

लेकिन जातिबंधनों में जकड़े शहर के श्मशानों में एक ऐसा श्मशान भी है जहां जातियों का भेदभाव नहीं होता. आदर्श सहयोग समिति इस मुक्तिधाम का संचालन करती है.

समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश मल्होत्रा ने बीबीसी को बताया कि इस मुक्तिधाम में बिना किसी जातिवाद और भेदभाव के अंतिम संस्कार संपन्न करवाए जाते हैं.

जयपुर के श्मशान घाट

यहाँ अंतिम क्रिया में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्रियों की दरें भी निश्चित हैं.

वैसे राज्य के अन्य स्थानों पर भी कमोबेश यही पुरानी व्यवस्था चल रही है, जहाँ दाह संस्कार के लिए अलग-अलग जातियों के लिए अलग जगह आरक्षित है.

हालांकि, कुछ लोग इसे व्यवस्था के लिहाज़ से उचित ठहराते हैं और उनकी दलील है कि हर जाति समाज के अंतिम संस्कार सम्बन्धी नियम अलग-अलग होते हैं.

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