पुष्पा सपने भी संस्कृत में ही देखती हैं

डॉक्टर पुष्पा दीक्षित
    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के गोंडपारा इलाके के इस घर में अगर आप आंखें बंद करके पहुंचें तो आपको लगेगा कि आप आठवीं शताब्दी में हैं.

आप कुछ पूछें उससे पहले ही संस्कृत में एक वाक्य कान से टकराता है, "तानि भ्रमात्मकानि स्थलानि अधुना अवलोकयाम."

<italic><link type="page"><caption> (संस्कृत को बचाने का अभियान)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2009/08/090806_sanskrit_va.shtml" platform="highweb"/></link></italic>

सामने से कोई आठ-नौ साल का बच्चा इसी अंदाज़ में उस वाक्य को लेकर संस्कृत में ही जवाब देता है.

संस्कृत के संवाद वाला यह घर डॉक्टर पुष्पा दीक्षित का है, जहां जीवन की भाषा संस्कृत है.

पढ़ें पूरी रपट

डॉक्टर पुष्पा दीक्षित के विद्यार्थी

डॉक्टर पुष्पा दीक्षित से आप पूछें कि आप सपने किस भाषा में देखती हैं? उनका जवाब होता है, 'संस्कृत.'

STYक्या संस्कृत का समय समाप्त हुआ?क्या संस्कृत का समय समाप्त हुआ?अंग्रेजी, चीनी, फ्रेंच, स्पैनिश जैसी भाषाओं के साथ दौड़ में संस्कृत कहाँ है? क्यों युवाओं को पसंद नहीं आ रही है संस्कृत?2013-03-07T13:12:01+05:302013-03-07T20:05:07+05:30PUBLISHEDhitopcat2

अमरीका में पढ़ाई कर रही शमिनाज़ ख़ान को जब अपने प्रोफेसर शैलेन पॉलक के बारे में पता चला कि वे हॉवर्ड से संस्कृत पढ़ कर लौटे हैं तो उनके मन में भी संस्कृत पढ़ने की इच्छा जागी.

एक दिन अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर वह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में संस्कृत पढ़ने चली आईं. इन दिनों वह दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में संस्कृत में ही पीएचडी कर रही हैं.

देश के अलग-अलग हिस्सों से बिलासपुर आकर संस्कृत पढ़ने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में है और इन्हें संस्कृत पढ़ाती हैं 72 साल की पुष्पा दीक्षित.

संस्कृत अध्ययन के सूत्र

डॉक्टर पुष्पा दीक्षित के छात्र

सरकारी कॉलेज में संस्कृत पढ़ाते हुए पुष्पा दीक्षित ने पाणिनी, सिद्धांत कौमुदी और आर्य प्रणाली से संस्कृत व्याकरण को लेकर कोई तीन दशकों तक शोध किया

और आख़िर पाणिनीय व्याकरण को इस तरह से सूत्रबद्ध किया कि कोई भी तीन महीने में ठीक-ठीक संस्कृत को जान-समझ सके.

बारह साल पहले उन्होंने अपने घर में ही पाणिनी शोध संस्थान की स्थापना की थी.

गुरुकुल की तरह संस्कृत सीखने वाले उनके घर में ही रहते और संस्कृत सीखते. यह सिलसिला आज भी जारी है.

संवाद की भाषा

डॉक्टर पुष्पा दीक्षित के छात्र

पाणिनी शोध संस्थान में अभी 20 बच्चे एक साथ रहते हैं. इसके अलावा शौकिया तौर पर संस्कृत सीखने वाले हर शाम इकट्ठा हो जाते हैं.

पुष्पा दीक्षित रात में फ़ोन पर भी संस्कृत के पाठ पढ़ाती हैं.

पुष्पा दीक्षित कहती हैं, "देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों से, अलग-अलग जाति-धर्म के बच्चे और युवा हमारे साथ रहकर संस्कृत सीखते पढ़ते हैं. मैं चाहती हूं कि देश में कम से कम एक फीसदी लोग संस्कृत को जानें और दूसरे लोग संस्कृत को मानें."

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