छत्तीसगढ़: ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 फ़ीसदी करने पर हाईकोर्ट की रोक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फ़ैसले पर रोक लगा दी है जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 की जगह 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई थी.

इसी साल 15 अगस्त को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का दायरा 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत करने की घोषणा की थी.

इस बढ़ोतरी के साथ ही राज्य में आरक्षण का दायरा बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया था.

राज्य सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का दायरा बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन की पीठ ने बढ़े हुए आरक्षण पर रोक लगा दी है.

याचिकाकर्ता के वकील पलाश तिवारी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी और एन नागराज के मामले में सुनवाई के बाद आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत रखे जाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं. लेकिन राज्य सरकार ने पिछड़ेपन का हवाला देकर, बिना किसी जनगणना के, एनएसएसओ के एक सर्वे को आधार बना कर आरक्षण का दायरा 27 प्रतिशत कर दिया. हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है."

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आर्थिक रुप से कमज़ोर सामान्य जातियों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने को लेकर कोई टिप्पणी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है.

स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी के बीच आए हाईकोर्ट के इस फ़ैसले पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार इस फ़ैसले का अध्ययन करके अदालत में अपना पक्ष रखेगी.

उन्होंने कहा, "अदालत ने अभी 69 प्रतिशत स्वीकार किया है. अनुसूचित जाति का जो एक प्रतिशत बढ़ाया था, उसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है. अब जो बचा हुआ 14 प्रतिशत है, वह हमारे पिछड़ा वर्ग के लिए था, उसके बारे में भी सरकार अपना पक्ष रखेगी."

छत्तीसगढ़ की एक महिला

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छत्तीसगढ़ में आरक्षण

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 12 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहा है. कुछ महीने पहले ही में राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति के आरक्षण में एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी. यह सब मिला कर राज्य में 58 प्रतिशत आरक्षण लागू था.

इसके बाद इसी साल 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत करने का फ़ैसला लिया. पिछले महीने की 4 तारीख़ को एक अध्यादेश जारी कर इसे लागू भी कर दिया गया था.

इस तरह आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्णों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद राज्य में आरक्षण की सीमा 82 प्रतिशत हो गई थी.

पिछड़ा वर्ग को 14 के बजाए 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के छत्तीसगढ़ सरकार के फ़ैसले का पिछड़ा वर्ग ने देश भर में स्वागत किया था. यहां तक कि इस फ़ैसले के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों के अलावा बिहार और दिल्ली में भी सम्मानित किया गया था. लेकिन हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश ने सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सरकार के आरक्षण के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वालों में से एक कुणाल शुक्ला ने बीबीसी से कहा, "जातिगत आरक्षण के अलावा पूर्व सैनिक, दिव्यांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि को मिलने वाले आरक्षण को जोड़ दें तो छत्तीसगढ़ में आरक्षण की सीमा 90 प्रतिशत पहुंच गई थी. यह संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है."

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और संविधान के प्रावधान के तहत है.

कुणाल शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट के फ़ैसले से राज्य के एक बड़े वर्ग को राहत मिलेगी.

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