ऐसे करें शॉर्ट फ़िल्मों से कमाई...

    • Author, खुशबू दुआ
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

कभी सिर्फ़ फ़िल्म फ़ेस्टिवल या किसी विशेष मौक़ों पर दिखाई जाने वाली शॉर्ट फ़िल्मों का बाज़ार धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

पहले जहां सिर्फ़ सिनेमा और मीडिया के छात्र प्रयोग के तौर पर शॉर्ट फिल्में बनाते थे वहीं अब बड़े-बड़े फ़िल्ममेकर भी इस विधा में हाथ आज़मा रहे हैं.

लेकिन शॉर्ट फ़िल्मों के अचानक से लोकप्रिय हो जाने का कारण क्या है?

अगर आप फ़िल्म निर्माण में थोड़ी बहुत भी दिलचस्पी रखते हैं तो आपके लिए यह ख़बर फ़ायदेमंद हो सकती है.

दरअसल डिजिटलीकरण के इस दौर में शॉर्ट फ़िल्में बनाना अब काफ़ी आसान और कम ख़र्चीला हो गया है और एक शॉर्ट फ़िल्म बनाने के लिए आपको सिर्फ़ एक अच्छी स्क्रिप्ट और एक मोबाइल कैमरा चाहिए.

इसलिए आजकल शॉर्ट फ़िल्मों के माध्यम से छोटे फ़िल्मकार लोकप्रियता तो पा ही रहे हैं साथ ही साथ पैसा भी कमा रहे हैं.

इसका एक उदाहरण हैं अब्बास सैय्यद, जो अब तक चार शॉर्ट फ़िल्में बना चुके हैं और हाल ही में बनाई गई उनकी फ़िल्म ‘मखमल’, को सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रियता मिली है. इसमें जैकी श्रॉफ़ ने मुख्य भूमिका निभाई है.

अब्बास के अनुसार, “शॉर्ट फ़िल्मों को देखने वाले लोग बहुत हैं लेकिन उनसे आने वाला पैसा बेहद कम है. ऐसे में, या तो आप फ़िल्म को किसी कंपनी से फ़ंड लेकर बनाए या फिर डेली मोशन, वीडियो ऑन डिमांड जैसी वेबसाइट्स पर अपनी फ़िल्म अपलोड करें जिससे आपको पैसा मिल सकता है.”

लेकिन ऐसा नहीं है कि पहले दिन से ही आपको घर चलाने लायक आय होने लगेगी. इसमें वक़्त लगता है और चार फ़िल्में बना चुके अब्बास भी घर चलाने के लिए एक मीडिया कंपनी में काम करते हैं.

भारत की ओर से ऑस्कर में जाने वाली ऑफ़िशियल फ़िल्म 'कोर्ट' के निर्देशक चैतन्य तमाहाने भी ख़ुद एक शॉर्ट फ़िल्म मेकर रहे हैं.

वो बीबीसी को बताते हैं, “मैंने अपने करियर की शुरुआत एक शॉर्ट फ़िल्म से की थी और शुरुआत में ये 'जुगाड़' यानी दोस्तों या परिवार से पैसा लेकर बनती हैं पर बाद में फ़ायदा भी होता है.”

चैतन्य के अनुसार सोशल मीडिया के चलते शॉर्ट फ़िल्मों का भविष्य उज्ज्वल है और आई ट्यून्स, वीडियो आन डिमांड, शॉर्ट फ़िल्म्स क्लब, क्राउड फ़ंडिंग (लोगों से पैसा लेना), शॉर्ट फ़िल्म मार्केट और पिचिंग फ़ोरम्स के माध्यमों से कोई भी शॉर्ट फ़िल्मों से पैसा कमा सकता है, बशर्ते फ़िल्म अच्छी हो.

हालांकि भारत में इसका चलन कम है लेकिन कई बार चैनल या सिनेमाघर भी शॉर्ट फ़िल्मों को ख़रीद लेते हैं.

शॉर्ट फ़िल्मों से पैसा कमाया जा रहा है, इस बात को और पुख़्ता करते हुए यूट्यूब (भारत) के कंटेंट ऑपरेशन्स के अध्यक्ष सत्या राघवन मानते हैं, “आप यूट्यूब पर अपनी फ़िल्म अपलोड करते ही पैसा कमा सकते हैं और इसके लिए आपको बस अपना एक यूट्यूब चैनल बना कर यूट्यूब पर पहले से मौजूद ‘मोनेटाइज़’ का ऑप्शन सेलेक्ट करना होगा और आपकी फ़िल्म में विज्ञापन आना शुरू हो जाएँगे.”

ज़ाहिर सी बात है कि जितने लोग आपकी फ़िल्म से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापन देखेंगे, एक पूर्वनिश्चित दर से आपको प्रति व्यू का पैसा मिलना शुरू हो जाएगा.

सत्या राघवन ने साफ़ किया कि विज्ञापन से होने वाली इस कमाई का 55 प्रतिशत वीडियो अपलोड करने वाले को और 45 प्रतिशत यूट्यूब के पास आता है.

यूट्यूब के आंकड़ों के मुताबिक यूट्यूब की ऑडियन्स बहुत बड़ी है और कई फ़िल्मों को 20 लाख़ से ज्यादा दर्शक मिल जाते है और शायद इसलिए, एआईबी, वायरल फ़ीवर और आजकल तो यशराज फ़िल्मस भी अपनी वेब सीरीज़ और शॉर्ट फ़िल्मों पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है.

ऐसे में आप क्यों पीछे रहें, अगर आपके पास एक आइडिया, एक कैमरा और थोड़ी सी फ़िल्म मेकिंग की समझ है तो आप भी शॉर्ट फ़िल्मों से काफ़ी पैसे कमा सकते हैं.

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