मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव ने मिलकर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कैसे बढ़ाया था?

वीडियो कैप्शन, जनवरी, 1991 में भारत के पास महज 89 करोड़ डॉलर (नवासी) की विदेशी मुद्रा रह गई थी.
मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव ने मिलकर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कैसे बढ़ाया था?
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1991 में भारत एक ऐसे आर्थिक संकट से गुज़र रहा था जब देश के पास सिर्फ़ दो हफ़्तों के आयात लायक विदेशी मुद्रा बची थी.

तेल संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते कर्ज़ के बीच भारत को अपना सोना तक गिरवी रखना पड़ा.

ऐसे दौर में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने वो आर्थिक सुधार लागू किए जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी.

रिपोर्टः रेहान फ़ज़ल

प्रेज़ेंटर- नवीन नेगी

एडिट- सदफ़ ख़ान

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)