दिल्ली आग: मालवीय नगर में इतने विदेशी नागरिकों की जान क्यों गई?

    • Author, पवन कांत दिगावली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

भारत में मेडिकल टूरिजम तेजी से बढ़ रहा है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि इलाज के लिए विदेशों से आने वाले लोगों को भारत में अपेक्षाकृत कम ख़र्च में बेहतर सर्विस मिल जाती है.

अफ़्रीका और मध्य-पूर्व के कई देशों के लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत का रुख़ करते हैं.

इसी तरह इलाज के लिए भारत आए कुछ विदेशी नागरिकों के लिए दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज़ रानी इलाक़े में एक इमारत में लगी आग की घटना दुखद त्रासदी बन गई.

इस हादसे में मारे गए और घायल हुए कई लोगों के परिजनों ने मीडिया को बताया कि वे इलाज के सिलसिले में भारत आए थे.

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस हादसे में 13 विदेशी नागरिकों की मौत हुई है. उन्होंने कहा कि 20 से 22 विदेशी नागरिक घायल भी हुए हैं.

आग की तेज़ लपटों और उससे उठे धुएं के कारण कई लोगों की दम घुटने से मौत हो गई.

इमारत में मौजूद अन्य 47 लोगों में से कुछ ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी, जबकि कुछ लोगों को पुलिस, अग्निशमन कर्मियों और स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए अंदर जाकर सुरक्षित बाहर निकाला.

गद्दों से बची लोगों की जानें

होटल के सामने स्थित एक गद्दे की दुकान के मालिक ने इमारत से कूद रहे लोगों को बचाने के लिए अपनी दुकान के सभी गद्दे सड़क पर बिछा दिए. सड़क पर बिछाए गए इन गद्दों की वजह से इमारत से कूदने वाले आठ लोगों की जान बच गई, हालांकि उन्हें चोटें आईं.

गद्दे की दुकान के मालिक रियाज़ुद्दीन ने कहा, "दुकान के गद्दे सड़क पर डालने से मुझे क़रीब दो लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है. लेकिन मुझे संतोष है कि मैं आठ लोगों की जान बचा सका. मुझे उम्मीद नहीं थी कि अंदर फँसे इतने लोगों की जान चली जाएगी."

'बेड एंड ब्रेकफास्ट' को नियम के तहत केवल छह कमरों की अनुमति मिली थी, उसमें अनौपचारिक रूप से 20 से अधिक कमरे चलाए जा रहे थे. इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार था.

गलियारे की ओर जाने वाला गेट बंद था. बिना वेंटिलेशन वाली इस संकरी पांच मंजिला इमारत में आग से बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था. इस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई. इनमें से आठ लोग गुरुग्राम के एक ही परिवार के सदस्य थे.

सेंट्रलाइज्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सिस्टम के ऑपरेशंस प्रभारी आलोक द्विवेदी ने कहा, "हमें सुबह 8:50 बजे आग लगने की सूचना मिली थी और हमारी पहली एंबुलेंस 9:01 बजे मौके पर पहुंच गई थी. कुल 16 एंबुलेंस घटनास्थल पर भेजी गईं."

नेहरू प्लेस फायर विभाग के डिविजनल अधिकारी रविंदर ने पुष्टि की कि सूचना मिलते ही दमकल जल्द से जल्द मौक़े पर पहुँच गई थीं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिकों में चार नाइजीरियाई, तीन किर्गिस्तान के नागरिक के अलावा मोजाम्बिक, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, लाइबेरिया और इराक़ के एक-एक नागरिक शामिल थे.

हादसे वाले दिन कुल 15 लोगों को पास के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इनमें 13 विदेशी नागरिक थे. मैक्स अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि सभी मरीज़ों की हालत में सुधार हो रहा है और वे स्वस्थ हो रहे हैं.

इलाज के लिए दिल्ली आने वाले विदेशी नागरिक

भारत उन देशों में शामिल है जो मेडिकल टूरिजम का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है.

मेडिकल टूरिजम इंडेक्स 2020-21 के अनुसार, मेडिकल टूरिजम के लिए दुनिया के 46 देशों में भारत का स्थान 10वां है.

अफ्रीका और मध्य पूर्व से इलाज के लिए भारत आने वाले अधिकांश विदेशी नागरिक दिल्ली और गुरुग्राम का रुख़ करते हैं.

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में 91.5 लाख विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 5,07,244 लोग उपचार के मक़सद से भारत पहुँचे.

जॉइंट कमिशन इंटरनेशनल (जेसीआई) से मान्यता प्राप्त अस्पतालों सहित उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और अन्य देशों से बेहतर हवाई संपर्क के कारण दिल्ली देश में मेडिकल टूरिजम का प्रमुख केंद्र बन गई है.

यहाँ आने वाले विदेशी मरीज़ मुख्य रूप से मैक्स, मेदांता मेडिसिटी, अपोलो, फोर्टिस और आर्टेमिस जैसे अस्पतालों में इलाज कराते हैं. ऐसे अस्पतालों की मौजूदगी ने देश की राजधानी दिल्ली को एक बड़े मेडिकल हब के रूप में स्थापित किया है.

नाइजीरिया के कानो राज्य के 37 वर्षीय याकूब जान्को ने बीबीसी से कहा, "मेरे देश की तुलना में यहाँ इलाज सस्ता है और बेहतर सुविधाएं मिलती हैं. मेरे पिता को हृदय संबंधी समस्या है. डॉक्टरों ने उन्हें भारत ले जाने की सलाह दी थी. इसी वजह से मैं उन्हें इलाज के लिए दिल्ली लेकर आया हूं."

याकूब उस अस्पताल के पास हुए इस घटनास्थल को देखने पहुंचे थे, जहाँ दिल्ली में उनके पिता का इलाज चल रहा है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की मौत की ख़बर डरावनी है.

बीबीसी ने दुर्घटनास्थल पर मौजूद 47 वर्षीय एमरोस से भी बात की, जो आईवीएफ़ के लिए कैमरून से दिल्ली आई हैं.

एमरोस के लिए अनुवादक के रूप में काम करने वाली 44 वर्षीय कैमरून निवासी मिशेल माइकल ने कहा, "एमरोस पिछले दो महीनों से आईवीएफ़ उपचार के लिए दिल्ली में हैं. ठीक दो महीने पहले वह अपने पति के साथ दो सप्ताह तक फ्लोरिश बेड एंड ब्रेकफास्ट में रुकी थीं. इस हादसे के बारे में सुनकर वह बहुत डर गईं और गहरे सदमे में आ गईं."

मेडिकल टूरिजम इंडेक्स में 10वां स्थान

हालिया प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने कहा है कि विश्व मेडिकल टूरिजम इंडेक्स में भारत 10वें स्थान पर है. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मरीज़ों से अंग्रेज़ी में बात करने में सक्षम नर्सों और पेशेवर स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी भी विदेशी नागरिकों को भारत आकर्षित करता है.

कोविड महामारी के बाद भारत में इलाज के लिए आने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

2020 में लगभग 1.83 लाख विदेशी नागरिक उपचार के लिए भारत आए थे जबकि 2025 तक यह संख्या बढ़कर पांच लाख से अधिक हो गई. केंद्र सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी.

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) इंडस्ट्री अब कई अरब डॉलर का उद्योग बन चुका है. पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, 2025 में भारत के मेडिकल टूरिज्म बाजार का आकार 8.7 अरब डॉलर का है. सरकार का अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा.

विदेशी मरीज़ों की ओर से सबसे अधिक प्राथमिकता दिए जाने वाले जॉइंट कमीशन इंटरनेशनल (जेसीआई) मान्यता प्राप्त अस्पताल भारत के दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता, नागपुर और कोच्चि जैसे शहरों में स्थित हैं.

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जेसीआई मान्यता प्राप्त अस्पतालों की संख्या सबसे अधिक दिल्ली में है, जहां ऐसे 9 अस्पताल हैं. इसके बाद मुंबई में 6 अस्पताल हैं. दक्षिण भारत में बेंगलुरु में तीन जबकि चेन्नई और हैदराबाद में दो-दो जेसीआई मान्यता प्राप्त अस्पताल हैं.

2026 तक भारत में कुल 1,299 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्हें नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त है.

इन सभी अस्पतालों को लगभग 600 सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है, जिनकी निगरानी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया करती है.

विदेशी नागरिक भारत में हार्ट सर्जरी, हड्डी एवं जोड़ संबंधी इलाज, कैंसर, किडनी प्रत्यारोपण और अन्य अंग प्रत्यारोपण, गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, कॉस्मेटिक सर्जरी, दंत चिकित्सा, आईवीएफ जैसे प्रजनन इलाज के लिए बड़ी संख्या में आ रहे हैं.

बांग्लादेश और इराक़ से बड़ी संख्या में आते हैं लोग

2025 में बांग्लादेश और इराक़ से सबसे अधिक मरीज़ भारत आए.

वर्ष 2025 में इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या बांग्लादेश के लोगों की रही.

2025 में तीन लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक इलाज के लिए भारत आए, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक है.

इसके बाद इराक़ से 30,989, उज्बेकिस्तान से 13,699, सोमालिया से 11,506, तुर्कमेनिस्तान से 10,231, ओमान से 9,738 और कीनिया से 9,357 लोग उपचार के लिए भारत पहुंचे.

ये आंकड़े इस वर्ष मई में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की ओर से जारी एक दस्तावेज़ में प्रकाशित किए गए हैं.

मेडिकल टूरिजम से कितना रोज़गार जुड़ा है?

हालांकि मेडिकल टूरिजम पर निर्भर क्षेत्रों और उनसे जुड़े कर्मचारियों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पर्यटन क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 8.46 करोड़ लोगों को रोज़गार मिलता है. इसमें मेडिकल टूरिजम का भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर और हौज़ रानी इलाक़े में, जहाँ तीन जून को आग की घटना हुई थी, वहाँ स्थानीय ट्रैवल और फॉरेक्स कारोबारी यू.एस. पांडेय ने बीबीसी को बताया कि यहाँ क़रीब 10,000 लोगों की आजीविका मेडिकल टूरिजम के तहत आने वाले विदेशी नागरिकों पर निर्भर है.

इनमें अनुवादक, गाइड, दवा दुकानदार, विदेशी मुद्रा कारोबारी, ट्रैवल एजेंट, होटल कर्मचारी और रेस्तरां कर्मी शामिल हैं.

बोल्ड फॉरेक्स एंड ट्रैवल्स के मालिक यू.एस. पांडेय ने कहा, "विदेशी नागरिकों से जुड़ा स्थानीय कारोबार करोड़ों रुपये का है. हमारी फॉरेक्स कंपनी अकेले सालाना एक से डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार करती है. हर दिन कम से कम 50 से 60 विदेशी नागरिक हमारी दुकान पर मनी एक्सचेंज के लिए आते हैं. वे सभी अमेरिकी डॉलर लेकर आते हैं और उन्हें स्थानीय मुद्रा में बदलवाते हैं."

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टेज़ बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में हुई आग की घटना के सिलसिले में पुलिस ने होटल के मालिक लवकेश बजाज और एक रसोइया केशव नेगी को गिरफ्तार किया है.

अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शनिवार सुबह 65 वर्षीय केशव नेगी को इस मामले में गिरफ्तार किया था.

साथ ही पुलिस इस होटल के अकाउंटेंट जय मिश्रा को लेकर सर्च ऑपरेशन चला रही है.

पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि बुधवार को हौज़ रानी इलाके में हुए इस हादसे के पीछे केशव नेगी की लापरवाही एक कारण हो सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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