सीजेपी नेताओं से बॉन्ड भरवाने का मतलब क्या है, ये प्रदर्शन कर पाएंगे?

सीजेपी
इमेज कैप्शन, 10 अक्तूबर की सुबह कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में लिया था
    • Author, अरशद मिसाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

रविवार को दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया.

मजिस्ट्रेट ने 50 हज़ार रुपये के मुचलके और कुछ शर्तों पर हस्ताक्षर कराने के बाद तीनों को रिहा कर दिया.

हालांकि अभिजीत दीपके ने कहा है कि उन्होंने किसी भी ऐसे बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जो विरोध प्रदर्शन करने से रोकता है.

सीजेपी ने 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था.

सीजेपी के तीनों नेता प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शनिवार सुबह फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें विमान से उतरने से पहले ही हिरासत में ले लिया.

दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक्स पर पोस्ट कर बताया, "अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को बीएनएसएस की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती हिरासत में लिया गया था. सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें 11 अक्तूबर को दिल्ली कैंट स्थित एसईएम अदालत के समक्ष पेश किया गया."

पुलिस ने कहा, "शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए उनसे 50 हज़ार रुपये के मुचलके के साथ एक बेल बॉन्ड भरवाया गया, जो एक वर्ष तक लागू रहेगा. इसके बाद एसईएम अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया."

दिल्ली पुलिस
इमेज कैप्शन, शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेती दिल्ली पुलिस

धारा 126 और 170 क्या हैं, जिनके तहत कार्रवाई हुई?

आशुतोष रांका और सौरव दास
इमेज कैप्शन, रविवार को पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास

सीजेपी के तीन नेताओं के ख़िलाफ़ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है.

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धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा/मुचलका) के तहत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके कारण शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, कारण बताने के लिए कह सकते हैं और उससे शांति बनाए रखने के लिए एक बॉन्ड (मुचलका) भरवाने का आदेश दे सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि संबंधित व्यक्ति तय अवधि के दौरान शांति बनाए रखने की शर्तों का पालन करे. अगर वह बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो क़ानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, बॉन्ड की राशि ज़ब्त की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि सीजेपी के नेताओं के ख़िलाफ़ जो कार्रवाई की गई, वह एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की क़ानूनी शक्तियों के तहत की गई.

उनके ख़िलाफ़ आरोप यह है कि उनसे किसी क्षेत्र की शांति भंग होने की आशंका थी. इसलिए उनसे एक बॉन्ड (मुचलका) भरवाया गया, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने का वादा करना होता है.

उन्होंने कहा, "धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई करने से पहले पुलिस को मजिस्ट्रेट को यह बताना होता है कि संबंधित लोग कोई संज्ञेय अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) कर सकते हैं. इसके बाद पुलिस ऐसे अपराध को रोकने के लिए प्रिवेंटिव कार्रवाई की अनुमति मांगती है, ताकि उन्हें अस्थायी रूप से हिरासत में लिया जा सके."

हालांकि, यह हिरासत 24 घंटे से अधिक नहीं हो सकती. इसलिए अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और 24 घंटे के भीतर उन्हें रिहा कर दिया गया.

दूसरे प्रदर्शनकारियों पर किन धाराओं में कार्रवाई हुई?

आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा
इमेज कैप्शन, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान शनिवार और रविवार को आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया

10 अक्तूबर को पुलिस ने जिन दूसरे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, उन्हें कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया था. साथ ही रिहा करने से पहले उनसे किसी भी प्रकार का बॉन्ड नहीं भरवाया गया था.

निपुण सक्सेना के मुताबिक, "ऐसे मामलों में धारा 172 के तहत हिरासत होती है. धारा 172 की उपधारा (2) में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति पुलिस या प्रशासन के किसी वैध निर्देश का पालन करने से इनकार करता है, तो पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है."

"हिरासत में लेने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्ति को उस स्थान से हटाकर किसी अन्य जगह ले जा सकती है और वहां रिहा कर सकती है."

उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में किसी तरह का बॉन्ड लेने की आवश्यकता नहीं होती. इसे सिंप्लिसिटर डिटेंशन कहा जाता है.

शनिवार और रविवार को आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा और कई प्रदर्शनकारियों को इसी धारा के तहत हिरासत में लिया गया था.

बॉन्ड भरने के बाद क्या सीजेपी के नेता प्रदर्शन कर सकते हैं?

आशुतोष रांका और सौरव दास

निपुण सक्सेना ने बताया कि पहले भी इन नेताओं ने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिससे शांति भंग हुई हो.

उन्होंने कहा, "पहले भी इन्होंने ऐसा कोई आह्वान नहीं किया कि कुछ तोड़ दो या फोड़ दो. वे लोगों से यही कह रहे थे कि अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें."

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि पहली कार्रवाई ही कानूनी तौर पर तार्किक नहीं है और उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है."

इससे पहले अभिजीत दीपके की अगुवाई में सीजेपी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था. इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

निपुण सक्सेना ने कहा कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास किसी भी आम नागरिक की तरह किसी रैली या राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं.

रिहाई के बाद रविवार को सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इस दौरान सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके मौजूद नहीं रहे क्योंकि वे अपनी दादी के देहांत के चलते अपने पैतृक गांव लौट गए.

इस दौरान सीजेपी के नेताओं ने ख़ुद को हिरासत में लिए जाने पर भी बात की.

प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के अब तक के सबसे कायर प्रधानमंत्री हैं."

सौरव दास ने आरोप लगाते हुए कहा, "ये वो सरकार है, जिसने नीरव मोदी और विजय माल्या को फ़्लाइट में बैठाकर देश से बाहर भेज दिया है जबकि हमें फ़्लाइट के अंदर से उठवा लिया गया."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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